इजराइल की मदद नहीं करे अमेरिका: रामास्वामी बोले- राष्ट्रपति बना तो किसी जंग का हिस्सा नहीं बनूंगा
अमेरिका के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की रेस में शामिल भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ने गैर-हस्तक्षेपवादी विदेश नीति की वकालत की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इजराइल की मदद करने से परहेज करना चाहिए।
बायोटेक उद्यमी विवेक रामास्वामी ने कहा कि अमेरिका को अपने हथियार इजराइल भेजना बंद करना होगा। इसके साथ इजराइल को मिलने वाली आर्थिक मदद भी रोकनी होगी। रामास्वामी ने कहा कि अमेरिका को सिर्फ कूटनीति के स्तर भी ही इजराइल का साथ देना चाहिए, तभी इजराइल अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा।

रामास्वामी ने कहा कि अमेरिका, इजराइल को केवल "राजनयिक आयरन डोम" की पेशकश करनी चाहिए, सैन्य नहीं। हालांकि रामास्वामी के अभियान ने बाद में स्पष्ट किया कि "निकट भविष्य में किसी भी समय" इज़राइल को सहायता में कटौती करने का "कोई मतलब नहीं" होगा।
रामास्वामी ने मंगलवार को "नो टू नियोकन्स" नामक एक प्रतिज्ञा जारी करते हुए कहा कि उनका पहला उद्देश्य तृतीय विश्व युद्ध को रोकना है। युद्ध कभी भी प्राथमिकता नहीं है, केवल एक आवश्यकता है; अमेरिकी सांसदों का एकमात्र कर्तव्य अमेरिकी नागरिकों के प्रति है।"
रामास्वामी ने अपने बयान में कहा कि अगर आप अगले 20 सालों तक अपने हितों को छोड़कर अंतहीन जंग चाहते हैं तो मैं आपके लिए सही नहीं हूं। लेकिन अगर आप अमेरिका को इन युद्ध से दूर रखना चाहते हैं और देश को मजबूत बनाना चाहते हैं तो मुझे पता है कि यह कैसे करना है।
रामास्वामी ने बताया कि बुधवार को मियामी में रिपब्लिकन पार्टी की तीसरी डिबेट में वो "नो टू नियोकन्स" के लिए लिए शपथ भी लेंगे। इसके तीन मुख्य उद्देश्य बताए गए हैं। इसके मुताबिक अमेरिका उस विचार पर नहीं चलेगा जिसमें शांति के लिए दूसरे देशों के अंतरराष्ट्रीय मामलों में दखल देने की बात कही गई है।
आपको बता दें कि यूक्रेन जंग पर भी विवेक रामास्वामी के अलग विचार हैं। उनका कहना है कि अमेरिका को जंग में यूक्रेन की मदद बंद कर देनी चाहिए। उन्होंने यह भी शिकायत की है कि अमेरिका "इतने सारे उपकरण दे रहा है, हमारे पास अभी अपने लिए गोला-बारूद नहीं है।"












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