अमेरिका की राजनीति में भारतीय दिखा रहे ताकत, जानिए कैसे विवेक रामास्वामी, निक्की हेली बदल रहे देश की दिशा
27 सितंबर को अमेरिकी में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी के लिए रिपब्लिकन पार्टी की दूसरी बहस हुई थी। इस बहस में डोनाल्ड ट्रम्प शामिल नहीं हुए थे। ऐसे में पूरी बहस का केंद्र में विवेक रामास्वामी और निक्की हेली रहे। इस दौरान दोनों भारतवंशियों ने एक दूसरे पर जमकर निशाना साधा।
अब एक बार फिर से दोनों ही बुधवार को तीसरे राष्ट्रपति पद की बहस के लिए फिर से मिलने के लिए तैयार हैं। ये अगले साल जीओपी प्राथमिक में मतदान शुरू होने से पहले बड़े दर्शकों के सामने अपना पक्ष रखने के उनके अंतिम अवसरों में से एक है।

हालांकि विवेक रामास्वामी हों या निक्की हेली दोनों ही 2024 के नामांकन की दौड़ में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बहुत पीछे हैं। लेकिन अमेरिका में जहां पर सिर्फ 1.5 फीसदी भारतीय-अमेरिकी मतदाता हैं वहां हेली और रामास्वामी जैसे भारतीय मूल के अमेरिकियों का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव एक बहुत बड़ी बात है।
हेली और रामास्वामी भारतीय अमेरिकियों के बीच विचारों की विविधता का उदाहरण हैं। 2024 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की होड़ में दो भारतीयों की मौजूदगी ने लोगों के बीच भारतीयों के प्रति कौतूहल जगाया है।
एक तरफ दक्षिण कैरोलिना के पूर्व गवर्नर और बाद में ट्रम्प के लिए संयुक्त राष्ट्र की राजदूत निक्की हेली जहां यूक्रेन के लिए निरंतर समर्थन का आह्वान करती हैं वहीं पार्टी में उनके विरोधी विवेक रामास्मावी यूक्रेन को जारी सहायता पर सवाल उठाते नजर आते हैं।
आश्चर्य की बात है कि ये दोनों ही नेता भारतीय अमेरिकियों के व्यापक समुदाय के साथ तालमेल से बाहर हैं, जो डेमोक्रेट्स का भारी समर्थन करते हैं। एशियाई अमेरिकियों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। अन्य एशियाई समूहों के समान भारतीय भी डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं।
प्यू रिसर्च सेंटर के एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि 68 फीसदी भारतीय अमेरिकी पंजीकृत मतदाताओं की पहचान डेमोक्रेट के रूप में और 29 फीसदी की पहचान रिपब्लिकन के रूप में हुई है।
इसके बावजूद जब कोई भारतीय-अमेरिकी समुदाय का व्यक्ति रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ता दिखेगा तो चुनाव प्रक्रिया में उस समुदाय की हिस्सेदारी बढ़ती हुई नजर आएगी। कई भारतीय अमेरिकी वोटर रामास्वामी, हेली और हैरिस के उदय को भारतवंशियों की सफलता के साथ जोड़कर देखेंगे।
हो सकता है कि रिपब्लिकन अमेरिका में भारतीय प्रवासियों पर जीत हासिल करने की कगार पर न हों। लेकिन करीबी मुकाबले वाले राज्यों में मामूली लाभ भी उल्लेखनीय हो सकता है।
अमेरिका में अधिकांश भारतीय अमेरिकी हिंदू हैं। जबकि ईसाइयों और मुस्लिमों की संख्या कम है। रामास्वामी हिंदू हैं लेकिन उनका फोकस ईसाई वोटरों पर है। कई ईसाई युवा विवेक रामास्वामी से काफी प्रभावित भी नजर आते हैं।
रटगर्स विश्वविद्यालय में सार्वजनिक नीति के स्नातक छात्र, 26 वर्षीय रोहन पकियानाथन ने कहा कि भले ही उनके माता-पिता डेमोक्रेट और प्रगतिशील हैं, लेकिन वे रामास्वामी की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं।
पकियानाथन, जो ईसाई हैं, कहते हैं कि रामास्वामी की हिंदू आस्था उनके लिए कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि वह अमेरिका को एक ईसाई देश के रूप में देखते हैं जिसकी स्थापना यहूदी-ईसाई मूल्यों पर हुई थी।
वहीं, मूलत: सिख निकी हेली राजनीति में आने से कई साल पहले क्रिश्चियन हो गई थीं। हैरिस की मां हिंदू और पिता ईसाई हैं। वे मंदिर और चर्च जाते हुए बड़ी हुई हैं। अब वे क्रिश्चियन हैं।












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