USSC Report: अमेरिका ने पहलगाम टेररिस्ट अटैक को बताया विद्रोही हमला! पाक की जीत के पढ़े कसीदे
USSC Report: अमेरिका के US China Economic And Security Commission (USSC) की नई रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 में हुए चार दिवसीय भारत-पाकिस्तान युद्ध को पाकिस्तान की जीत के तौर पर पेश किया गया है। यह युद्ध पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुआ था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने इस स्थिति का 'अवसरवादी' लाभ उठाया, अपनी हथियारों की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का परीक्षण भी कर लिया और प्रचार भी।
चीन ने रिपोर्ट को बताया फर्जी
'यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन' (USCC) की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन ने नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स और AI-बेस्ड तस्वीरों का उपयोग करके एक दुष्प्रचार अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य फ्रांसीसी राफेल विमानों को बदनाम करना और अपने J-35 लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देना था।

अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई रिपोर्ट
बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत के साथ चार-दिवसीय युद्ध में पाकिस्तान की सैन्य सफलता ने चीनी हथियारों की क्षमता को प्रदर्शित किया।" रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे।
पहलगाम के बाद भारत ने लिया था एक्शन
यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। इस हमले में 26 नागरिकों, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, की मौत हुई थी। आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहलगाम के पास बैसरन घाटी के मैदान में पर्यटकों पर गोलीबारी की थी।
USCC का दावा, भारत से अलग
USCC का यह दावा युद्ध पर भारत के रुख के विपरीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा है कि भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया था और कुछ ही घंटों में पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था।
चीन ने युद्ध को अवसर के रूप में देखा
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि "इस युद्ध को 'छद्म युद्ध' के रूप में चित्रित करना चीन की भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर बता सकता है, लेकिन बीजिंग ने अपने हथियारों की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी कीक टेस्टिंग करने के लिए इस युद्ध का अवसरवादी लाभ उठाया।" यह चीन के भारत के साथ सीमा तनाव और अपने रक्षा उद्योग के विस्तार के लक्ष्यों के संदर्भ में उपयोगी साबित हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका पर सवाल
USCC की रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए यह दावा दोहराते रहे हैं कि उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को समाप्त करने अमेरिका ने ही सीजफायर कराया था।
USCC क्या है?
यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन एक स्वतंत्र और दो दलों वाला अमेरिकी आयोग है, जिसे 2000 में अमेरिकी कांग्रेस ने स्थापित किया था। इसका काम चीन के साथ अमेरिका के व्यापार और आर्थिक संबंधों के राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की निगरानी करना है।
रिपोर्ट हर साल टेक्नोलॉजी, अर्थशास्त्र, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित 28 सिफारिशें देती है और यह भी जांच करती है कि चीन भविष्य की तकनीकों में बढ़त हासिल करने के लिए औद्योगिक नीति का उपयोग कैसे कर रहा है।
भारत-पाकिस्तान युद्ध में चीन की भूमिका
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस युद्ध ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि पाकिस्तान की सेना चीनी हथियारों पर निर्भर थी और कथित तौर पर चीनी खुफिया जानकारी का लाभ उठा रही थी। पहलगाम घटना को आतंकी हमला कहने के बजाय, रिपोर्ट ने इसे "भारत द्वारा एक घातक विद्रोही हमले के जवाब में शुरू किया गया" बताया, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी।
चीन द्वारा हथियारों की सफलता का प्रचार
रिपोर्ट में लिखा है कि "युद्ध के बाद के हफ्तों में, चीन के दूतावासों ने भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपने सिस्टम की सफलताओं की सराहना की, जिसका उद्देश्य हथियारों की बिक्री को बढ़ावा देना था।"
कांग्रेस को मिल गया मुद्दा
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने रिपोर्ट को राजनयिक प्रयासों के लिए एक गंभीर झटका बताया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पहलगाम आतंकी हमले को "विद्रोही हमला" बताती है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत पर पाकिस्तान की जीत का संकेत देती है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
जयराम रमेश का बयान
20 नवंबर को पोस्ट में रमेश ने कहा, "2025 की सालाना रिपोर्ट लगभग 800 पन्नों की है। जिसमें पेज नंबर 108 और 109 पर सेक्शन K आश्चर्यजनक और समझ से परे हैं। यह अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को, जिसे पाकिस्तान ने अंजाम दिया था, एक 'विद्रोही हमला' बताती है। यह चार-दिवसीय झड़प में 'भारत पर पाकिस्तान की सैन्य सफलता' की बात करती है।" उन्होंने विदेश मंत्रालय से इस रिपोर्ट के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की मांग भी की।
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