रूसी तेल खरीद पर चर्चा करने के लिए आएंगे अमेरिकी अधिकारी, क्या भारत पर लगेगा प्रतिबंध?
नईदिल्ली, 25 मईः अमेरिकी प्रतिबंधों के विषय में अधिकारियों और निजी उद्योगपतियों के साथ बात करने और रूसी तेल खरीद को लगातार बढ़ने से रोकने के लिए बाइडेन प्रशासन के अधिकारी मंगलवार को भारत पहुंचे हैं। ट्रेजरी विभाग के एक प्रवक्ता के मुताबिक आतंकवादी वित्तपोषण और वित्तीय अपराधों की सहायक सचिव एलिजाबेथ रोसेनबर्ग गुरुवार को नई दिल्ली और मुंबई का दौरा करेंगी।

तेल खरीद पर हल्के प्रतिबंध लगाने पर विचार
ट्रेजेरी विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक रोसेनबर्ग की भारत यात्रा बिडेन प्रशासन के व्यापक प्रयास का एक हिस्सा है जिसमें दुनिया भर के अमेरिकी सहयोगियों को यूएसए द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और निर्यात नियंत्रणों के कार्यान्वयन के बारे में अधिकारियों और उद्योगपतियों के समक्ष रखा जाएगा। वर्तमान में रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने से नहीं रोकते हैं। लेकिन बाइडेन प्रशासन के अधिकारियों ने ऐसे मध्यम प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं जो इन खरीद को प्रतिबंधित कर सकते हैं।

भारत ने रूस से तेल खरीद बढाई
तेल खपत में अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत तेल आयात करता है। भारत ने अप्रैल में रूसी तेल आयात को बढ़ाकर लगभग 277,000 बैरल प्रति दिन कर दिया, जो मार्च में 66,000 बैरल प्रति दिन था। बीते साल 8 ऐसे देश थे जिनसे भारत ने रूस की तुलना में अधिक तेल खरीदा था लेकिन इस के अप्रैल महीने तक यह आंकड़ा कहीं आगे बढ़ गया है।

चौथा तेल आपूर्तिकर्ता देश बना रूस
रूस अप्रैल में भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। इससे अधिक तेल भारत इराक, सऊदी अरब और यूएई से खरीद रहा है। भारत के कुल तेल आयात में अफ्रीकी तेल की हिस्सेदारी मार्च में 14.5 फीसदी से घटकर अप्रैल में 6 फीसदी रह गई जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग आधी होकर मात्र 3 फीसदी तक सिमट गयी। मार्च 2022 तक भारत जहां रूस, कजाकिस्तान और अरबैजान से मात्र 3 फीसदी तेल खरीद रहा था वहीं मात्र एक महीने बाद यह हिस्सा बढ़कर 11 फीसदी पर पहुंच गया। रूस, भारत को 487,500 बैरल प्रति दिन तेल बेचने को तैयार है।

सामान्य दिनों में रूस से तेल खरीदना महंगा
रूस से भारत का कच्चा तेल खरीदना बस एक अवसरवादी खरीद है क्योंकि यह सामान्य दिनों में भारतीय रिफाइनरों के लिए एक महंगा सौदा होता है। तेल की सप्लाई के लिए परिवहन की दूरियां बेहद लंबी हैं, शिपिंग समय लंबा है, माल ढुलाई महंगी है इसके साथ-साथ सामान्य दिनों में रूस के पास इतना तेल नहीं होता कि वह भारत को तेल बेच पाए। हालांकि रूस-यूक्रेन विवाद ने भारत के लिए सस्ते तेल आयात का बड़ा मौका उपलब्ध कराया है।












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