US Trade Deal: टैरिफ से धमकाने वाले ट्रंप को झटका, 27 देशों ने किया बड़ा फैसला, भारत को क्या होगा फायदा?
US Trade Deal: भारत समेत अन्य देशों को ट्रेड टैरिफ लगाकर धमकाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दोहरा झटका लगने वाला है। क्योंकि यूरोपीय संघ (EU) 27 जनवरी को भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा करेगा। इस डील से भारतीय उत्पादों को EU बाजारों में कम या शून्य टैरिफ पर पहुंच मिलेगी। ट्रंप के लिए 'दोहरे झटके' इसलिए है क्योंकि एक ओर EU भारत से निकटता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ उसके व्यापार समझौते पर तलवार लटक रही है।
EU अमेरिका के साथ व्यापार समझौता निलंबित कर सकता है
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समिति से जुड़े बीबीसी सूत्रों के मुताबिक, फ्रांस के स्ट्रॉसबर्ग में यूरोपीय पार्लियामेंट बुधवार, 21 जनवरी, 2026 को अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते को निलंबित करने का ऐलान कर सकती है।

EU में हैं 27 देश
याद रहे यूरोपीय संघ (EU) यूरोप के 27 देशों का एक साझा मंच है, जो आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। यह संगठन अपने सदस्य देशों के बीच शांति बनाए रखने, आपसी सहयोग को बढ़ावा देने और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से काम करता है, ताकि पूरे यूरोप में स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
अमेरिका-EU के बीच पिछला व्यापार समझौता क्या था?
पिछले साल जुलाई में स्कॉटलैंड में हुए इस समझौते में अमेरिका ने यूरोपीय सामानों पर टैरिफ 30% से घटाकर 15% कर दिया था, बदले में यूरोपीय देशों ने अमेरिका में निवेश और निर्यात बढ़ाने पर सहमति दी। हालांकि, अब ट्रंप ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोप पर दबाव बनाने के लिए अगले महीने से 10% टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं।
ट्रंप अब EU पर नए टैरिफ क्यों लगाने की धमकी दे रहे हैं?
ट्रंप की टैरिफ धमकियों से यूरोपीय देश नाराज हैं। उन्होंने 1 फरवरी से आठ यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ये वही देश हैं जिन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के ट्रंप के फैसले का खुलकर विरोध किया था।
किन यूरोपीय देशों पर अमेरिका ने 10% टैरिफ लगाया है?
18 जनवरी को ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट में लिखा, जिसमेंफरवरी से आठ देशों पर टैरिफ लगाया गया है, इनमें डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड के सामानों पर 10% टैरिफ लगेगा और यह बढ़ भी सकता है।" ये सभी देश ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के साथ हैं और ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध किया था।
ग्रीनलैंड ट्रंप के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियां अमेरिका के लिए खतरा हैं, इसलिए वह इस पर तत्काल अमेरिकी नियंत्रण चाहते हैं। ग्रीनलैंड दुनिया के सबसे बड़े द्वीपों में से एक है और लगभग 300 सालों से डेनमार्क का हिस्सा रहा है।
ग्रीनलैंड की वर्तमान राजनीतिक स्थिति क्या है?
- ग्रीनलैंड लगभग 300 वर्षों से डेनमार्क का हिस्सा है
- 1979 से इसे स्वायत्तता प्राप्त है
- विदेश और रक्षा मामलों में डेनमार्क निर्णय लेता है
- डेनमार्क नाटो का सदस्य है, इसलिए ग्रीनलैंड को NATO सुरक्षा प्राप्त है
- नमार्क नाटो (NATO) का सदस्य होने के कारण ग्रीनलैंड को इस संधि के तहत सुरक्षा प्राप्त है।
यूरोपीय देशों की ट्रंप की टैरिफ नीति पर क्या प्रतिक्रिया है?
ग्रीनलैंड पर ट्रंप के फैसले का ब्रिटेन और फ्रांस ने विरोध किया, फ्रेंच विदेश मंत्री ने टैरिफ को 'ब्लैकमेलिंग' करार दिया। इस बीच, 27 जनवरी को होने वाले भारत-EU FTA से दोनों देशों को बाजारों तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय व यूरोपीय उत्पादों को कम या शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा।
भारत-EU FTA से दोनों पक्षों को क्या फायदा होगा?
इसके साथ ही, अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर भी 50% टैरिफ लगाया है, जो वैश्विक व्यापार में जटिलताओं को बढ़ाता है।












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