काबुलः अमेरिकी हवाई हमले में आम लोगों के मारे जाने की जांच होगी
काबुल, 30 अगस्त। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता बिल अर्बन ने कहा कि हम किसी भी आम नागरिक की जान जाने की संभावना से दुखी हैं. एक बयान जारी कर अर्बन ने कहा, "हम आज काबुल में एक वाहन पर किए गए हमले के दौरान आम नागरिकों के मारे जाने की खबरों से परिचित हैं. हम जानते हैं कि वाहन के नष्ट होने से ताकतवर धमाके हुए थे, जिससे संकेत मिलता है कि वाहन में बड़ी मात्रा में विस्फोटक थे. हो सकता है इससे और लोगों की भी जानें गई हों. अगर ऐसा हुआ होगा तो हमें बहुत दुख है."

अमेरिका ने रविवार को काबुल के करीब एक वाहन पर मिसाइल से हमला किया था. कहा गया था कि इस वाहन में एक आत्मघाती हमलावर था जो काबुल में हमला करने के मकसद से जा रहा था. शुक्रवार को इस्लामिक स्टेट खोरसान ने काबुल में एक आत्मघाती हमला कर सौ से ज्यादा लोगों मार डाला था.
अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन ने खबर दी कि इस हमले में एक ही परिवार के नौ लोगों की जान गई. मरने वालों में छह बच्चे होने की बात कही गई है. एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर समाचार एजेंसी एपी को बताया कि काबुल एयरपोर्ट के करीब हुए इस हवाई हमले में तीन बच्चे मारे गए.
उधर तालिबान ने कहा है कि वे भी इस हमले की जांच कर रहे हैं और पता लगाया जाएगा कि जिस वाहन पर हमला किया गया, उसमें वाकई कोई आत्मघाती हमलावर सवार था या नहीं.
देखें:तस्वीरों में मिशन काबुल
विदेश मंत्रियों की बैठक
सोमवार को कई देशों के विदेश मंत्री अफगानिस्तान पर चर्चा के लिए मिलने वाले हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया है कि कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, युनाइटेड किंग्डम, तुर्की, कतर, यूरोपीय संघ और नाटो के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल होंगे.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा, "ये प्रतिनिधि आने वाले दिनों और हफ्तों में अफगानिस्तान पर एक साझी रणनीति अपनाने पर चर्चा करेंगे." बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन का संबोधन भी होगा जिसमें वह अफगानिस्तान में हो रही गतिविधियों पर जानकारी देंगे.
अफगानिस्तान में जिंदगी दूभर
सरकार के न रहने के कारण अफगानिस्तान में लोगों की आम जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है, जिस कारण भुखमरी और आर्थिक संकट का अंदेशा जताया जा रहा है. आम जरूरत की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं और लोगों के पास संसाधन खत्म हो रहे हैं.
देश में आटा, तेल और चावल बहुत महंगा हो चुका है. देश की मुद्रा कमजोर हो रही है और पाकिस्तान में करंसी बदलने वाले अफगान मुद्रा को लेने से इनकार कर रहे हैं. शनिवार को अधिकारियों ने बैंकों को दोबारा खोलने के आदेश दिए. पैसे निकालने की सीमा 20 हजार अफगानी यानी लगभग 17 हजार भारतीय रुपये कर दी गई है. बैंकों के बाहर लंबी कतारें देखी जा सकती हैं.
तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि कुछ दिन के भीतर नई केबिनेट का ऐलान किया जाएगा और नए प्रशासन के आने के साथ ही ये दिक्कतें खत्म हो जाएंगी.
तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों से अफगानिस्तान के साथ संबंध कायम रखने की अपील की है. ब्रिटेन ने कहा है कि ऐसा तभी हो सकता है जब तालिबान मानवाधिकारों का सम्मान करे और जाना चाहने वाले लोगों को सुरक्षित निकलने दे.
वीके/एए (रॉयटर्स, एपी, डीपीए)
Source: DW
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