विदेश मंत्री जयशंकर और पोंपेयो के बीच एक और टेलीफोन कॉल, चीन को माना समान खतरा
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को अपने अमेरिकी समकक्ष माइक पोंपेयो से फोन पर बात की है। दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के वेस्टर्न सेक्टर में चीन के साथ टकराव को 11 हफ्ते हो चुके हैं। पोंपेयो और जयशंकर के बीच जून के तीसरे हफ्ते में पहली फोन कॉल हुई थी और यह दोनों नेताओं के बीच एक और हाई लेवल फोन वार्ता थी। जयशंकर और पोंपेयो के बीच इस वार्ता में चीन को लेकर बात हुई तो सैन्य सहयोग पर भी चर्चा हुई।

चीन खतरनाक तरीके से टकराव में बिजी
दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई है, इस पर अभी भारत की तरफ से अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है। जबकि पोंपेयो की तरफ से इस पर बड़ा बयान दिया गया है। पोंपेयो ने कहा, 'हमनें देखा है कि चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) कैसे अपने पड़ोसियों को चिढाने में लगी हुई है, दक्षिण चीन सागर का सैन्यकरण करर रही है और साथ ही भारत के साथ टकराव को खतरनाक तौर पर आगे बढ़ा रही है।' पोंपेयो ने आगे कहा, 'आप किसी भी समुद्री सीमा क्षेत्र जहां पर आपका कोई दावा नहीं, वहां अपना दावा नहीं कर सकते हैं। न ही आप दूसरे देशों को डरा सकते हैं या और हिमालय के क्षेत्र में उन्हें चिढ़ा सकते हैं।' पोंपेयो के मुताबिक चीन, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ) को अपने मकसद के लिए प्रयोग कर रहा है। पिछले कई हफ्तों से अमेरिकी प्रशासन के साथ मोदी सरकार के मंत्री लगातार बात कर रहे हैं। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने अमेरिकी समकक्ष मार्क एस्पर से फोन पर बात की थी।












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