'हर एक इंच की रक्षा करेंगे', यूक्रेन को रूस ने तोड़ा तो बौखलाए जो बाइडेन, पुतिन ने भेजा परमाणु बॉम्बर
रूस और अमेरिका के बीच तनाव काफी ज्यादा है और क्यूबा मिसाइल तनाव के 60 सालों के बाद ही ऐसा तनाव महसूस किया जा रहा है, जो कोल्ड वार के समय हुआ था।
वॉशिंगटन/कीव/मॉस्को, अक्टूबर 01: रूस ने यूक्रेन को एक बार फिर से तोड़ दिया है और जोनबास क्षेत्र का विलय पुतिन ने अपने देश में करवा लिया है, जिसके बाद बौखलाए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर जबरदस्त पलटवार किया है और कम से कम 1000 रूसी लोगों के साथ साथ रूस के आर्म्स सप्लाई नेटवर्क, कई कंपनियों को प्रतिबंधित कर दिया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चेतावनी देते हुए कहा है, वो यूक्रेनी जमीन का इंच- इंच वापस हासिल करने की दम लेंगे। माना जा रहा है, कि यूक्रेनी क्षेत्र के रूस में विलय होने के बाद अब युद्ध काफी खराब दिशआ में जा सकता है और अब एक्सपर्ट्स परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भी इनकार नहीं कर रहे हैं।
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बाइडेन की शपथ
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि, उनका प्रशासन यूक्रेन के किसी भी उस प्रयास का समर्थन करेगा, जिसका मकसद रूस से उन क्षेत्रों को वापस छीनना होगा। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने घोषणा की है, कि उनका देश नाटो सैन्य गठबंधन में शामिल होने के लिए एक "त्वरित" बोली लगाएगा और अगर यूक्रेन को फौरन नाटो में शामिल किया जाता है, तो फिर विश्वयुद्ध छिड़ने की किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। बाइडेन ने वॉशिंगटन में संवाददाताओं से कहा कि, "अमेरिका और उसके सहयोगी देश पुतिन और उनके लापरवाह शब्दों और धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि पुतिन "अपने पड़ोसी के क्षेत्र को जब्त नहीं कर सकते और क्षेत्र पर कब्जा करने के बाद ऐसे वापस नहीं जा सकते।" आपको बता दें कि, राष्ट्रपति पुतिन ने इस हफ्ते की शुरूआत में ही डोनबास श्रेत्र में जनमत संग्रह कराने और उसका रूस में विलय करने की घोषणा कर दी थी, जिसे मानने से यूक्रेन समेत पश्चिमी देशों ने इनकार कर दिया था।

परमाणु जंग के करीब दुनिया?
रूस और अमेरिका के बीच तनाव काफी ज्यादा है और क्यूबा मिसाइल तनाव के 60 सालों के बाद ही ऐसा तनाव महसूस किया जा रहा है, जो कोल्ड वार के समय हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान भी यूक्रेन में रूस के 'अवैध' जनमत संग्रह करा मुद्दा उठाया था, जिसमें यूएन के ज्यादातर सदस्य देशों ने अमेरिका का समर्थन किया था और यूक्रेन में जनमत संग्रह को लेकर रूस का विरोध किया था। वहीं, शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात को दोहराया है, कि अमेरिका और नाटो सहयोगी रूस को एक मजबूत सैन्य प्रतिक्रिया का सामना किए बिना पास के किसी भी नाटो सदस्य पर हमला करने की अनुमति नहीं देंगे। बाइडेन ने कहा कि, नाटो अपने सदस्य देशों के जमीन की एक-एक इंच की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है और उन्होंने पुतिन को संबोधित करते हुए कहा कि, 'मैं जो कह रहा हूं, मेरी बातों को गलत समझने की भूल ना करें।'

रूस के खिलाफ और भी सख्त कदम
वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी यूरोपीय देश उस उपाय तक पहुंचने की कोशिश के लिए दौड़भाग कर रहे हैं, जिससे रूसी अर्थव्यवस्था को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचे और इसके लिए सबसे पहले रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाया जा सकता है और अगर रूसी तेल पर प्राइस कैप लगा दिया जाता है, तो फिर भारत और चीन के लिए रूसी तेल खरीदना काफी मुश्किल होगा, भले ही ये दोनों देश उस प्राइस कैप में शामिल ना हों और जाहिर तौर पर रूस को इससे नुकसान होगा। तेल पर प्राइस कैप लगाने से समुद्री तेल निर्यात पर एक कैप लगा दिया जाएगा, जिसका सीधा असर तेल के ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा और दुनियाभर में रूसी तेल की कीमत बुरी तरह से गिर जाएगी। वहीं, बाइडेन ने कहा कि, उन लोगों और उन कंपनियों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जो यूक्रेनी क्षेत्र की स्थिति को बदलने के अवैध प्रयासों को राजनीतिक या आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं।" प्रतिबंध उन देशों, लोगों या फर्मों पर लागू होंगे, जो रूस के कब्जे वाले डोनबास क्षेत्र में किसी भी रूसी कंपनी के साथ व्यापार करेंगे।

परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ा
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने परमाणु खतरों को लेकर भी बात की है और उन्होंने कहा है कि, 'रूस जिस तरह से परमाणु हथियारों के बारे में बात कर रहा है, वो गैर-जिम्मेदारी की पराकाष्ठा है और यह कुछ ऐसा है जिसे हम बहुत गंभीरता से लेते हैं।" उन्होंने कहा कि, "आज तक" अमेरिका ने यह नहीं देखा है कि "रूस वास्तव में ऐसा कुछ भी कर रहा है जिससे पता चलता है कि वे परमाणु हथियारों के उपयोग पर विचार कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि, "मैं आपको बस इतना बता सकता हूं कि, हम संभावित परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से संबंधित हर संभावत बातों पर ध्यान दे रहे हैं और परमाणु हथियारों के खिलाफ योजना बनाते हैं।"

फिनलैंड सीमा पर रूस के परमाणु बॉम्बर
वहीं, इजरायली खुफिया एजेंसली इमेजसैट इंटरनेशन ने दावा किया है, कि उसने फिनलैंड की सीमा के पास ओलेन्या एयरबेस पर रूसी परमाणु बम बर्षक जहाजों को देखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये रूसी बम बर्षक जहाज TU-160 और TU-96 हैं। इजरायली खुफिया एजेंसी ने सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देकर कहा है, कि ओलेन्या एयरबेस पर चार TU-160 बम बर्षक विमानों को देखा है, जो परमाणु हथियारों को ले जाने वाले जहाज हैं। आपको बता दें कि, 12 अगस्त तक एयरबेस पर एक भी बम बर्षक जहाज मौजूद नहीं थे, लेकिन अब चार जहाजों की मौजूदगी किसी अनहोनी की आशंका की तरफ इशारा कहती हैं। इन विमानों के जरिए क्रूज मिसाइलो और स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर हथियारों का ट्रांसपोर्टेशन किया जाता है। चूंकी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसी हफ्ते डोनबास में जनमत संग्रह और नाटो के शामिल होने पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात कर चुके हैं।












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