चीनियों से लड़ाई में US दे रहा था रीयल टाइम जानकारियां, जानिए कैसे इंडियन आर्मी ने की PLA की कुटाई?

अरूणाचल प्रदेश को चीन तिब्बत का हिस्सा बताता है और चीन की कोशिश अरूणाचल प्रदेश में घुसपैठ करने की है। जिसे पिछले बार इंडियन आर्मी ने नाकाम कर दिया था।

US-India vs China Border Clash

US-India vs China Border Clash: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अब काफी गंभीर होने लगी है और अमेरिका ने चीन के साथ संघर्ष की स्थिति में भारत को मदद करनी शुरू कर दी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल जब भारतीय जवानों का चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ संघर्ष हो रहा था, उस वक्त अमेरिका भारत को चीनियों के बारे में रीयल टाइम जानकारियां दे रहा था। यूएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना भारत को पीएलए सैनिकों के बारे में लगातार रीयल टाइम जानकारी दे रहा था, जिसकी वजह से भारतीय सैनिकों को चीनियों को खदेड़ने में काफी मदद मिली।

US-India vs China Border Clash

अमेरिका ने भारतीय सैनिकों की मदद की

यूएस न्यूज ने दावा किया है, कि भारतीय सैनिकों द्वारा खदेड़े जाने के बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना की सेना है, वो बैकफुट पर चली गई थी और चीन की सरकार, जो जमीन हड़पने के लिए कुख्यात है, वो हिमालयी क्षेत्र में अपने एक्शन पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर हो गई। यूएस न्यूज ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, कि अरूणाचल प्रदेश में अमेरिका ने पहली बार चीनी सैनिकों के पॉजीशन, उनकी ताकत और उनके मूवमेंट को लेकर हर एक जानकारी भारत को रीयल टाइम एडवांस में सौंपी, जिससे भारतीय सैनिकों को लगातार पता चल रहा था, कि चीनी सैनिकों की मूवमेंट क्या है। अमेरिका ने पहली बार ऐसा किया है। अमेरिका ने भारतीय सैनिकों को ये जानकारियां सैटेलाइट इमेज के साथ साथ अन्य टेक्नोलॉजी पर आधारित दी थी, जो काफी विस्तृत और काफी तेज थी, लिहाजा चीनियों का मुकाबला करने में भारतीय सैनिकों को काफी मदद मिली।

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चीनियों को दिया गया करारा जवाब

आपको बता दें, कि पिछले साल 9 दिसंबर को चीनी सैनिक हाथों में नुकीले तारों की लाठियां, लोहे के रॉड और दूसरे हथियार लेकर आए थे, लेकिन भारतीय सैनिकों की तरफ से उनका मुंहतोड़ जवाब दिया गया, जिसके बाद वो भाग खड़े हुए थे। हालांकि, इस झड़प में किसी सैनिक की मौत नहीं हुई थी, लेकिन चीनी सैनिकों को भागना पड़ा था, जिसके बाद से ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना को अपनी स्ट्रैटजी पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यूएस न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया है, कि "जब चीनी सैनिक आगे बढ़ रहे थे, तो अमेरिकी जानकारी के आधार पर भारतीय सैनिक उनक पहले से ही इंतजार कर रहे थे, जिसकी उम्मीद चीनियों ने नहीं की थी। अमेरिका जानकारी के आधार पर भारत पूरी तरह से तैयार था।" यूएस मीडिया ने कहा है, कि "चीनियों के खिलाफ मिली ये बड़ी कामयाबी बताती है, कि कैसे दोनों देशों की सेनाएं अब सहयोग कर रही हैं और आपस में खुफिया जानकारियां शेयर कर रही हैं।"

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चीन के विस्तारवाद को झटका

अमेरिका के कई कुछ पूर्व विश्लेषकों और अधिकारियों में से कुछ ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, कि "भारत और अमेरिका के सहयोग ने चीनी विस्तारवाद को पीछए धकेल दिया है और इससे दोनों देशों की साझा महत्वाकांझा को मान्यता मिलती है, जिसमें भारतीय जमीन पर चीनियों के खिलाफ अमेरिका का अभूतपूर्व समर्थन शामिल है"। अमेरिकी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि "नई साझेदारी ने, जो फिलहाल बहुत हद तक अस्पष्ट है, उसने बता दिया है, कि इसके व्यापक नतीजे आ सकते हैं, कि कैसे अमेरिका और उसके सहयोगी, बीजिंग की महत्वाकांक्षाओं को प्रभावी तौर पर रोक सकते हैं।" पेंटागन में क्षेत्रीय मुद्दों के पूर्व शीर्ष अधिकारी विक्रम सिंह, जो अब यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस थिंक टैंक के साथ हैं, उन्होंने यूएस न्यूज को कहा, कि "पीपुल्स लिबरेशन आर्मी फिलहाल शायद जांच के दौर में है। वो शायद ये जानना चाहते हैं, कि भारतीय कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और उनका एक्शन क्या होगा। पीएलए शायद इस बात की जांच करना चाहता हैं, कि भारतीय क्या-क्या पता लगा सकते हैं।" उन्होंने कहा, कि "यह चीन के भविष्य के संघर्ष की तैयारी के बारे में है।"

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चीन के एक्शन की पूरी थी जानकारी

इस खुफिया जानकारी से परिचित अत्यधिक विश्वसनीय सूत्र ने यूएस न्यूज को बताया, कि "भारतीय सैनिकों से मुठभेड़ से पहले के हफ्तों में ही अमेरिकी सरकार को पूरी तरह से पता चल गया था, कि चीन इस क्षेत्र में परीक्षण अभ्यास कर रहा है, ताकि यह देखा जा सके, कि क्या वो इस क्षेत्र में कोई नया मुकाम हासिल कर सकता है। चीन इस कोशिश में था, कि किसी नये क्षेत्र में कदम रखा जाए, या उन क्षेत्रों में कदम रखा जाए, जिनको लेकर भारत और चीन, दोनों अपना अपना दावा करते हैं।" रिपोर्ट के मुताबिक, इस काम के लिए कई सौ पीएलए सैनिकों को शामिल किया गया और यह देखने की योजना बनाई गई, कि क्या वो आगे बढ़ सकते हैं और सीमा के उस हिस्से के साथ आगे बढ़ सकते हैं, जो आधिकारिक तौर पर अभी तक सीमांकित नहीं है, जैसा की चीनी सेना ऐसे पहले भी करती रही है, और जैसा की उसने 2020 में गलवान घाटी में भी करने की कोशिश की थी, जिसमें दोनों पक्षों की तरफ से सैनिकों की जान गई थी।

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भारतीय सैनिकों ने कैसे चीनियों को रोका?

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    यूएस न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, चीनियों के साथ पहले की मुठभेड़ों से अलग, इस बार अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद भारतीय सैनिकों ने चीनियों को रोकने के लिए पहले से ही युद्धाभ्यास कर लिया था और उन रास्तों की पहचान कर ली थी, जिनके जरिए चीनी सैनिक आगे बढ़ रहे थे और फिर जैसे ही चीनी सैनिक आए, भारतीय सैनिक उनपर टूट पड़े। आपको बता दें, कि भारत और अमेरिका के बीच नई खुफिया जानकारी साझाकरण व्यवस्था को लेकर 2020 में समझौता हुआ था, जिसमें दोनों देशों की सरकार ने दस्तखत किए थे। इस समझौते का नाम Basic Exchange and Cooperation Agreement (BECA) है, जिसे बुनियादी एक्सचेंज एग्रीमेंट के तौर पर जाना जाता है। भारत और अमेरिका के बीच हुआ ये चौथा समझौता है, जिसमें सैन्य, रसद, अनुकूलता और सुरक्षा सूचना आदान-प्रदान को लेकर दोनों देशों के बीच दस्तखत किए गये। चीनी सरकार ने इस घटना और उसके बाद के बारे में कई सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया था।

    व्हाइट हाउस ने किया इनकार

    हालांकि, व्हाइट हाउस ने सोमवार को अमेरिकी रिपोर्ट की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछले साल भारतीय सेना को महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी प्रदान की थी, जिससे भारत को चीनी "घुसपैठ" से सफलतापूर्वक निपटने में मदद मिली। व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल कॉर्डिनेटर जॉन किर्बी ने सवाल पूछे जाने पर कहा, कि "नहीं, मैं इसकी पुष्टि नहीं कर सकता।" हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अमेरिका सार्वजनिक तौर पर इसकी पुष्टि कर भी नहीं सकता है और मिलिट्री इंटेलिजेंस में ऐसी सैकड़ों कहानियां होती हैं, जो सार्वजनिक नहीं होती हैं।

    (सभी तस्वीर- फाइल)

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