F-21, F-35: US ने भारत को दिया 5th जेनरेशन फाइटर जेट्स का ऑफर, PM मोदी से क्यों मिले लॉकहीड मार्टिन के CEO?

India-US Defence Deal: क्या अमेरिका ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का ऑफर दिया है? ये सवाल इसलिए उठने शुरू हो गये हैं, क्योंकि अमेरिका की प्रमुख फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन के CEO जिम टाइकलेट ने 18 जुलाई को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है।

इस मुलाकात के बाद पता चला है, कि लॉकहीड मार्टिन भारत में डिफेंस इंडस्ट्री को परवाज देने के लिए काम कर सकती है। इस मुलाकात के दौरान लॉकहीड मार्टिन ने F-21 लड़ाकू विमान, सिकोरस्की नौसेना हेलीकॉप्टर, और कंधे पर रखकर दागी जाने वाली एंटी-आर्मर हथियार जैवलिन को भारत में बनाने के लिए बड़े प्रस्ताव दिए हैं।

India-US Defence Deal

लॉकहीड मार्टिन ने अपनी वेबसाइट पर भी लिखा है, 'F-21: For India. From India.'

MRFA के लिए भारत को चाहिए टेक्नोलॉजी

लॉकहीड मार्टिन के CEO की प्रधानमंत्री मोदी से उस वक्त मुलाकात हुई है, जब ऐसी खबरें आईं थीं, कि राफेल बाने वाली फ्रांसीसी फाइटर जेट कंपनी डसॉल्ट एविएशन से MRFA पर भारत की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बात नहीं मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, डसॉल्ट एविएशन ने शायद MRFA फाइटर जेट की टेक्नोलॉजी देने से मना कर दिया है और ये वही कंपनी है, जिससे भारत ने पहले 36 राफेल फाइटर जेट खरीदे थे और भारतीय नौसेना के लिए राफेल मरीन खरीदने के लिए बातचीत चल रही है।

इसके अलावा, डसॉल्ट एविएशन भारत सरकार की 114 मीडियम रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) डील को लेकर भी दिलचस्पी रखता है और उसने टेंडर भरा है। और इसी फर्म का विमान मिराज-2000, भारतीय वायु सेना (IAF) की लिस्ट में एकमात्र ऐसा फाइटर जेट था, जिसका निर्माण भारत में नहीं हुआ था।

MRFA सौदे पर कोई आगे की कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि, स्वदेशी फाइटर जेट एलसीए एमके1ए में देरी से IAF का आधुनिकीकरण पटरी से उतर सकता है, क्योंकि भारतीय वायुसेना के पास 42 फाइटर जेट स्क्वाड्रन होने चाहिए, लेकिन इस वक्त सिर्फ 31 फाइटर जेट स्क्वाड्रन रह गए हैं। और चीन की आक्रामकता को देखते हुए ये अच्छी स्थिति नहीं है, क्योंकि भारत को हमेशा दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ने की क्षमता बनाए रखने की सलाह दी जाती रही है।

वायुसेना की तरफ से किया गया आगाह

वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर 'आत्मनिर्भरता' हासिल करने के प्रति आगाह किया था।

वायुसेना के उप प्रमुख ने कहा था, कि "आत्मनिर्भरता ही वह चीज है, जिस पर हम सवार हैं... लेकिन यह आत्मनिर्भरता, देश की सुरक्षा की कीमत पर नहीं हो सकती।"

उन्होंने आगे कहा, कि "क्योंकि जब नेशनल सिक्योरिटी की बात आती है, तो जिन चीजों की हमें जरूरत है, वो चीजें अगर हमें मिलती हैं, या जिस तरह की प्रणाली और हथियार आज की दुनिया में जीवित रहने के लिए जरूरी हैं, तो हम अपने रास्ते से भटकने के लिए मजबूर हो सकते हैं।"

उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने इतनी बातों में ही सबकुछ कह दिया है और उनकी ये बातें निश्चित तौर पर एक चेतावनी है और स्थिति की गंभीरता को उजागर करती है।

उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह के बयान से एक दिन पहले ही लॉकहीड के CEO जिम टेसलेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। लॉकहीड मार्टिन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, कि "CEO जिम टेसलेट माननीय नरेंद्र मोदी से मिले। तीन दशकों से ज्यादा समय से एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में, हम स्थानीय उद्योग की होनहार प्रतिभा और क्षमताओं को पहचानते हैं और अपने दोनों देशों के बीच रक्षा और औद्योगिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

F-21, F-35 की सीढ़ी?

अमेरिकी विमान निर्माता लॉकहीड मार्टिन की F-21 के लिए बिक्री पिच "भारत के लिए, भारत से" है। लॉकहीड मार्टिन ने F-21 कार्यक्रम में औद्योगिक अवसरों का पता लगाने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, कि "लॉकहीड मार्टिन भारत-अमेरिका एयरोस्पेस और रक्षा औद्योगिक सहयोग में एक प्रमुख भागीदार है। हम 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' के विजन को साकार करने की दिशा में इसकी प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं।"

मोदी सरकार 'मेक इन इंडिया' पर जोर देती है और लॉकहीड मार्टिन, भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने और निर्यात के लिए भारत में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए तैयार है। इसने भारतीय फर्म टाटा समूह के साथ साझेदारी की है और टाटा-लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर लिमिटेड बनाया गया है। भारत में यह सुविधा भारत में विमान और F-16 ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए कंपोनेंट्स का निर्माण करेगी।

पहली नजर में, F-21 का डिजाइन F-16 ब्लॉक 70 लड़ाकू जेट के समान दिखता है, लेकिन यह F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग II के डीएनए से भी प्रेरित है। F-21 और F-16 की सप्लाई चेन का लगभग आधा हिस्सा 5वीं पीढ़ी के दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों के साथ समान है।

F-21 को F-22 से अलग करने वाली विशेषताएं इसकी एयरफ्रेम, हथियार क्षमता, इंजन मैट्रिक्स और इंजन संचालन की उपलब्धता हैं। F-21 जेट को अब तक निर्मित सबसे एडवांस F-16 वैरिएंट बताया गया है, जिसमें F-35 लाइटनिंग II और F-22 रैप्टर के भविष्य के एवियोनिक्स शामिल हैं।

लेकिन यहीं पर IAF के दिग्गजों को परेशानी है। पूर्व IAF अधिकारियों ने बताया है, कि इनमें से एक विमान सिंगल-इंजन वाला है, और दूसरी बात ये, कि F-16 लड़ाकू विमानों का संचालन पाकिस्तान करता है।

हालांकि, कंपनी का कहना है, कि F-21 सिर्फ F-16 का नया नाम नहीं है, बल्कि यह F-16 ब्लॉक-70 लड़ाकू विमानों से ज्यादा शक्तिशाली है और इसे 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर F-22 रैप्टर से सिर्फ एक कदम पीछे बताया गया है।

कुछ विशेषज्ञ इसे F-35 लाइटनिंग II की ओर एक कदम के तौर पर देखते हैं। भले ही अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक पेशकश नहीं की गई है या भारत ने स्पष्ट दिलचस्पी नहीं दिखाई है, लेकिन एयरो इंडिया 2023 में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के आगमन ने रक्षा समुदाय में उत्सुकता जगा दी है।

यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (सेवानिवृत्त) ने कहा, "यह पहली बार था, जब पांचवीं पीढ़ी के विमान ने भारतीय धरती पर उड़ान भरी। क्या यह भारतीय प्रतिष्ठान के लिए एक संकेत था? हालांकि, अमेरिका चाहता है कि भारत अपने लड़ाकू विमानों के इको सिस्टम के लिए पहले F-16, F-18 या F-15 सीरिज के विमान खरीदे।"

क्या मेक इन इंडिया से IAF के ऑप्शन कम कर रहा है?

भारतीय वायुसेना ने अगस्त 2000 में ही 126 मिराज 2000 II विमान खरीदने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन 2004 में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया और 2007 में MMRCA के तहत 126 विमान खरीदने का फैसला लिया गया। बाद में इसे भी रद्द कर दिया गया और भारतीय वायुसेना ने फ्रांस सरकार के साथ अंतर-सरकारी समझौते (IGA) के जरिए 36 राफेल विमान खरीदे।

भारतीय वायुसेना MRFA के तहत लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए मामला बना रही है और सरकार की स्वीकृति की आवश्यकता (AoN) का इंतजार कर रही है। मीडिया रिपोर्टों ने सुझाव दिया है, कि भारत सरकार ने पूरे बेड़े के लिए भारत में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए तैयार विक्रेता से 114 MRFA विमान खरीदने के लिए अपनी नीति में बदलाव किया है।

भारतीय नौसेना के लड़ाकू विमानों के लिए योग्यता रखने वाले राफेल का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में कोई शानदार रिकॉर्ड नहीं है।

2020 में, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में तर्क दिया, कि विदेशी विक्रेताओं ने टेंडर के लिए क्लालिफाई प्राप्त करने के लिए ऑफसेट प्रतिबद्धताएं कीं, लेकिन इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए वे गंभीर नहीं थे।

इस संदर्भ में राफेल सौदे का जिक्र करते हुए CAG ने कहा, कि "उदाहरण के लिए, 36 मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) से संबंधित ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट में, विक्रेता मेसर्स डसॉल्ट एविएशन और मेसर्स MBDA ने शुरू में (सितंबर 2015) DRDO (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) को हाई टेक्नोलॉजी की पेशकश करके अपने ऑफसेट दायित्व का 30 प्रतिशत निर्वहन करने का प्रस्ताव दिया था।"

CAG ने कहा, कि "DRDO लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए इंजन (कावेरी) के स्वदेशी विकास के लिए तकनीकी सहायता हासिल करना चाहता था। लेकिन आज तक, फ्रांसीसी कंपनी ने इस टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर की पुष्टि नहीं की है।"

दूसरी तरफ भारत में फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी को तत्काल फाइटर जेट के लिए इंजन चाहिए और इंजन नहीं मिलने की वजह से लड़ाकू विमानों का निर्माण अटका हुआ है। और यही वजह है, कि तेजस लड़ाकू विमान अभी तक एयरफोर्स को मिले ही नहीं हैं, जबकि कई डेडलाइन बीत चुके हैं।

Su-57 vs F-35?

इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत एक बार फिर अपने रूसी सहयोगियों पर भरोसा करना चाहिए और Su-35 या MiG-35 में से किसी एक को चुन लेना चाहिए। हालांकि, अगर भारत रूसी फाइटर जेट्स के साथ जाता है, तो भारत की हथियारों के बेड़े में विविधता लाने की कोशिश को झटका लगेगा, लेकिन सवाल ये हैं, कि फिर भारत के पास विकल्प क्या बचते हैं?

Su-35 यूक्रेन में चल रहे युद्ध में रूसी वायु सेना का फ्रंटलाइन फाइटर जेट है। प्रसिद्ध सुखोई डिजाइन ब्यूरो ने इसे बनाया है और यह एक सिंगल-सीट फाइटर जेट है, जिसे अत्यधिक युद्धाभ्यास और मल्टी-रोल विमान के रूप में डिजाइन किया गया है।

यह शीत युद्ध के दौर के Su-27 "फ्लैंकर" का एक एडवांस वेरिएंट है, जो एक समर्पित हवाई श्रेष्ठता वाला भारी लड़ाकू विमान है। Su-35 पुराने Su-27 से ज्यादा एडवांस है। हालांकि, यूक्रेन में इसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। अकेले फरवरी में, मास्को ने अपने 120 Su-35 एयरफ्रेम में से कम से कम छह फाइटर जेट खो दिए। फोर्ब्स के मुताबिक, जिस दर से रूस अपने फ़्लैंकर-ई जेट खो रहा है, उतनी तेजी से वो अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।

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