US Election: अमेरिका में बस एक बार होता है चुनाव, राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति दोनों मर गए तो प्रेसिडेंट कौन बनेगा?
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में अब बस कुछ समय और शेष बचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में 5 नवंबर, मंगलवार को वोटिंग है, जिसमें लगभग 244 मिलियन वोटर्स यानी 24.4 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में इस बार मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच है।
आपको बता दें कि अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव न सिर्फ इस देश के लिए, बल्कि पुरी दुनिया के लिए एक अहम चुनाव माना जाता है, क्योंकि इस देश के राष्ट्रपति को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि जीत हासिल करने के लिए पार्टियां एड़ी-चोटी की ताकत लगा देती हैं, और प्रत्याशी इसके लिए पानी की तरह पैसा बहाते दिखाई देते हैं।

लिहाजा, हम दुनिया के इस सबसे अहम चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरिज चला रहे हैं। इसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण और दिलचस्प जानकारियां आपसे शेयर कर रहे हैं। आज इस सीरिज का छठा भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरिज आपको काफी पसंद आ रही होगी। आज इस सीरिज में आपको अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल से जुड़ी जानकारियां देंगे।
आपको बता दें कि अमेरिका में प्रेसिडेंशिल सिस्टम है। अमेरिका में राष्ट्रपति न सिर्फ औपचारिक प्रमुख बल्कि वास्तविक प्रमुख भी होता है। जैसे भारत से तुलना करें तो भारत में राष्ट्रपति औपचारिक प्रमुख होता जबकि वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री के अधीन होती हैं। अमेरिका में ऐसा नहीं है। अमेरिका में दोनों ही शक्तियां राष्ट्रपति के अंदर होती हैं।
अमेरिका में 4 साल पर चुनाव
अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के मुताबिक, हर चार साल में राष्ट्रपति चुनाव कराने की जरूरत होती है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद अगले जनवरी में पद ग्रहण किया जाता है। एक बार अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाने के बाद उसे हटाना लगभग असंभव हो जाता है। अमेरिका में राष्ट्रपति को सिर्फ महाभियोग द्वारा ही हटाया जा सकता है।
अमरीकी संविधान के अनुच्छेद 2 (4) के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा ही हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति पर महाभियोग देशद्रोह, भष्टाचार या किसी घोर अपराध पर ही लगाया जा सकता है। अभी तक किसी भी राष्ट्रपति को हटाने की नौबत नहीं आई है।
अमेरिका में राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद उपराष्ट्रपति ही राष्ट्रपति का दायित्व संभालता है। भारत की तरह अमेरिका में राष्ट्रपति की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं कराए जाते हैं। ऐसे में अमेरिका में उपराष्ट्रपति का पद काफी महत्वपूर्ण होता है।
अगर अमेरिका में राष्ट्रपति की मौत के बाद यदि उपराष्ट्रपति की भी मौत हो जाती है तो प्रेसिडेंसियल लाइन के हिसाब से किसी कैबिनेट सदस्य को नया राष्ट्रपति चुना जाता है। इस सक्शेसन लाइन के हिसाब से राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बाद स्पीकर ऑफ द हाउस का नंबर आता है। अमेरिका में स्पीकर ऑफ द हाउस माइक जॉनसन हैं जो कि रिपब्लिकन पार्टी के हैं।
कैबिनेट सदस्यों में इसके बाद क्रमशः सीनेट के अध्यक्ष प्रो टेम्पोर (आमतौर पर, सीनेट में सबसे लंबे कार्यकाल वाले सीनेटर), राज्य के सचिव, राजकोष का सचिव, रक्षा सचिव, महान्यायवादी, आंतरिक सचिव, कृषि सचिव आदि का स्थान है। बाइडेन कैबिनेट में उपराष्ट्रपति को जोड़कर कुल 16 लोग हैं जो इस लाइन में आते हैं और वरीयता के आधार पर देश का राष्ट्रपति बन सकते हैं।
अमेरिका में अब तक 8 राष्ट्रपतियों का पद पर रहने के दौरान निधन हो चुका है। हालांकि कभी ऐसा नहीं हुआ है कि एक ही कार्यकाल में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का निधन हो गया हो। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यालय कभी भी एक साथ खाली नहीं हुए हैं, इसलिए अमेरिका को कभी भी सक्सेशन लाइन से नीचे नहीं जाना पड़ा है।
इससे जुड़ी एक और दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका में कभी भी एक साथ ये सभी कैबिनेट सदस्य इकठ्ठा नहीं होते हैं। जब भी कभी ऐसी मीटिंग की जरूरत होती है तो एक न एक कैबिनेट सदस्य को किसी अज्ञात जगह पर छुपा दिया जाता है।
इसके पीछे ये वजह है कि किसी आपदा, हमले या किसी अन्य अप्रत्याशित घटना के मामले में सभी कैबिनेट सदस्यों की मौत हो जाए तो एक न एक सदस्य वैसी स्थिति में भी अमेरिका का नेतृत्व करने के लिए बचा रहता है।












Click it and Unblock the Notifications