US Election: 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप दोहरा रहे 2020 की रणनीति! एक्सपर्ट्स से जानें कितनी कारगर?
US Election 2024 Voting: अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदान आज यानी 5 नवंबर को आयोजित है। आज लाखों अमेरिकी मतदान केंद्रों पर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में अपने मत का प्रयोग करने वाले हैं। इस बार के चुनाव में, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच सीधी टक्कर है।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर से डोनाल्ड ट्रंप 2020 की रणनीति अपनाते हुए चुनाव प्रक्रिया और इसके परिणामों पर संदेह पैदा कर रहे हैं। ट्रंप और उनके सहयोगी पहले से ही दावा कर रहे हैं कि डेमोक्रेट्स चुनाव में धांधली कर सकते हैं, ताकि उनके समर्थक पहले से ही इस सोच में रहें कि अगर ट्रंप हारते हैं, तो चुनाव वैध नहीं है। आइए जानते हैं ट्रंप के दावे और उनके प्रभाव...

ट्रंप ने विभिन्न माध्यमों, जैसे रैलियों और सोशल मीडिया, का उपयोग करते हुए बिना प्रमाण के आरोप लगाए हैं कि...
- नॉन-रेजिडेंट्स द्वारा मतदान: ट्रंप का दावा है कि गैर-नागरिक मतदान कर सकते हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे गलत बताते हैं।
- विदेशी और सैन्य मतपत्रों पर शंका: ट्रंप का कहना है कि इनमें धोखाधड़ी हो सकती है, जबकि चुनाव अधिकारियों का मानना है कि सख्त जांच प्रक्रियाएं इस संभावना को कम करती हैं।
- मेल-इन वोट्स: ट्रंप ने इन पर बार-बार सवाल उठाए, हालांकि इस बार उन्होंने अपने समर्थकों को इसका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
इन सब दावों का उद्देश्य उनके समर्थकों को चुनाव की वैधता पर संदेह कराना है, ताकि हार की स्थिति में वे इसे अस्वीकार कर सकें।
पेन्सिलवेनिया और कानूनी चुनौतियां
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेन्सिलवेनिया, एक प्रमुख राज्य, जहां 2024 का चुनाव काफी प्रतिस्पर्धी हो सकता है, कानूनी विवादों और झूठी सूचनाओं का केंद्र बन गया है। ट्रंप ने यहां वोटिंग फ्रॉड के आरोप लगाए हैं, लेकिन चुनाव अधिकारी कहते हैं कि यह गलत है और पंजीकरण प्रक्रिया में गड़बड़ियों को जल्दी पकड़ा जाता है।
सोशल मीडिया और गलत सूचना
एलन मस्क के स्वामित्व वाले X (पूर्व ट्विटर) पर चुनाव से संबंधित गलत सूचनाएं तेजी से फैल रही हैं। चुनाव एक्सपर्ट्स के अनुसार, मस्क द्वारा इन झूठे दावों का समर्थन करने से भ्रम और बढ़ गया है। मिशिगन के अधिकारियों को भी मस्क द्वारा साझा की गई एक गलत सूचना का खंडन करना पड़ा, जिसमें दावा किया गया था कि वोटिंग में धांधली हुई है।
मतदाता धोखाधड़ी: वास्तविकता और मिथक
चुनाव एक्सपर्ट्स का कहना है कि मतदाता धोखाधड़ी के मामले बहुत कम होते हैं। जॉर्जिया के एक हालिया उदाहरण में, 8.2 मिलियन रजिस्टर्ड मतदाताओं में से केवल 20 गैर-नागरिक पाए गए, जिनमें से 9 ने ही मतदान किया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान प्रणाली में मजबूत सुरक्षा उपाय होते हैं, जिससे धोखाधड़ी का पता आसानी से लगाया जा सकता है।
शुरुआती मतदान का मुद्दा
2020 में ट्रंप ने शुरुआती मतदान पर हमला किया था, लेकिन 2024 में उन्होंने इसके समर्थन का आह्वान किया है। हालांकि, ट्रंप और उनके समर्थक अभी भी इसकी वैधता पर सवाल उठाते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, शुरुआती मतदान डेटा पर निष्कर्ष निकालना गलत है क्योंकि यह सिर्फ वोट डालने वालों की संख्या दर्शाता है, न कि उनके राजनीतिक रुझान।
चुनाव परिणामों को चुनौती देने की संभावना
2020 में हारने के बाद, ट्रंप ने चुनाव परिणामों को चुनौती देने की कोशिश की थी। 2024 में भी, ऐसी संभावना है कि अगर वे हारते हैं, तो वह इसे फिर से वैधता पर प्रश्न खड़े करेंगे। चुनाव अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों ने ऐसे किसी भी प्रयास से निपटने के लिए तैयारी कर ली है।
ट्रंप की इस चुनाव में रणनीति 2020 के समान है, जहां वे पहले से ही परिणामों को संदिग्ध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव एक्सपर्ट्स और अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शिता और सुरक्षा के चलते चुनाव परिणामों पर सवाल उठाना अनुचित है, और यह अमेरिकी लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर सकता है।
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