चीन की टेक कंपनियों में निवेश पर जो बाइडेन ने लगाया बैन
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीनी सेना को मदद करने वाली टेक कंपनियों पर लगाम कसने की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने एग्जेक्युटिव ऑर्डर पर साइन किया है, जिसमे चीन की बड़ी टेक कंपनियों में अमेरिकी उद्योगपतियों के निवेश पर रोक लगाई जा रही है।
राष्ट्रपति बाइडेन ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि जो चीनी टेक कंपनियां चीन की सेना की क्षमताओं को मजबूत करते हैं उसे मदद ना मिले। बाइडेन के इस कदम को चीन से अमेरिका को और दूर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

जो बाइडेन के इस आदेश के बाद जो वेंचर कैपिटलिस्ट फर्म और इक्विटी फर्म हैं वो चीन की उन कंपनियों में निवेश नहीं कर पाएंगे जो सेमीकंडक्टर और अन्य माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, क्वांटम कंप्यूटर, आर्टिफिशिय इंटेलिजेंस एप बनाने का काम करती हैं।
प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए लिया गया है। वहीं चीन इसे खुद को बड़े स्तर पर आगे बढ़ने को रोकने के तौर पर ले रहा है। अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते में इस फैसले को बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच फासला और बढ़ सकता है।
चीनी अर्थव्यवस्था इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है, ऐसे में अमेरिका की ओर से लिया गया यह कदम चीन के खिलाफ एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। चीन के शहरों में इस वर्ष को चीन में निवेश का वर्ष बताया है। उन्हें उम्मीद है कि कोरोना काल के बाद स्थानीय अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी।
मई माह में जापान के हिरोशिमा में हुई जी-7 की बैठक के दौरान जो बाइडेन के प्रतिनिधि मंडल ने हाई टेक निवेश पर चर्चा की थी। कई देशों के प्रतिनिधियों ने इसका समर्थन करने का संकेत दिया था। जिसमे यूके, यूरोपियन यूनियन भी शामिल हैं।












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