अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा, नॉर्थ कोरिया के नेता किम के साथ मीटिंग कर दूंगा कैंसिल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी और नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की मीटिंग पर एक अहम बयान दिया है। ट्रंप ने बुधवार को इस बात की उम्मीद जताई है कि उनकी और किम जोंग की मुलाकात किसी नतीजे पर जरूर पहुंचेगी।
पाम बीच, फ्लोरिडा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी और नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की मीटिंग पर एक अहम बयान दिया है। ट्रंप ने बुधवार को इस बात की उम्मीद जताई है कि उनकी और किम जोंग की मुलाकात किसी नतीजे पर जरूर पहुंचेगी। ट्रंप ने इसके साथ ही यह भी कहा कि अगर मुलाकात के बाद कोई नतीजा नहीं निकला तो फिर वह मीटिंग से उठकर चल देंगे या वह मीटिंग को कैंसिल कर देंगे। ट्रंप ने यह बात जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित उनके रिसॉर्ट मार-ए-लागो पर हुई मीटिंग के बाद मीडिया से कही। ट्रंप की ही तरह आबे ने भी इस बात की उम्मीद जताई है कि किम के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति की मुलाकात के बाद कोई अच्छा नतीजा जरूर निकलेगा।

मीटिंग के लिए ट्रंप ने दिया खुद को श्रेय
ट्रंप जब किम से मुलाकात करेंगे तो वह तीन अमेरिकी नागरिकों की रिहाई का मुद्दा भी उठाएंगे जिन्हें नॉर्थ कोरिया ने बंधक बनाकर रखा हुआ है। ट्रंप के मुताबिक ऐसा हो सकता है क्योंकि अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में कुछ नरमी आ रही है। नॉर्थ कोरिया और अमेरिका की सरकार के बीच बीच किसी भी तरह के औपचारिक रिश्ते नहीं हैं। ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि ऐसी मुलाकात जिसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा, हम नहीं करने वाले हैं। मैं जिस मीटिंग में हूं अगर उसका कोई नतीजा न निकलें तो फिर मैं उस मीटिंग को छोड़ कर चला जाना पसंद करूंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि उनका इरादा हमेशा एक मध्यस्थ के तौर पर लचीला रूख अपनाने का है। उनका मानना है कि उनकी इसी रणनीति की वजह से ही इस एतिहासिक मुलाकात की जमीन तैयार हो सकी है।

नतीजा नहीं निकला तो मीटिंग कैंसिल
यह पहला मौका है जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नॉर्थ कोरिया के किसी नेता से मुलाकात करने वाले हैं। ट्रंप का मानना है कि उनकी यह मीटिंग सफल होने वाली है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर मीटिंग कैंसिल हो जाएगी। ट्रंप की ही तरह जापानी पीएम आबे ने भी उम्मीद जताई है कि अगले हफ्ते किम जोंग उन और साउथ कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए इन की मीटिंग पूर्वी एशिया में उच्च स्तर के खतरे के बीच एक तरह की एकता का प्रदर्शन है। ट्रंप ने जानकारी दी कि वह मई के अंत या फिर जून के शुरुआती दिनों में किम के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने इस बात की पुष्टि भी की कि सीआईए डायरेक्टर माइक पोंपेयो ने दो हफ्ते पहले प्योंगयांग जाकर किम से मुलाकात की थी। ट्रंप की मानें तो उनकी प्लानिंग बहुत ही आराम से चल रही थी।

जापानी पीएम के बयान से बढ़ा दबाव
जापान के पीएम आबे ने इसी बीच एक अहम बयान देकर ट्रंप पर किम के साथ उनकी मुलाकात के साथ बेहतर नतीजों को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। आबे ने जोर देकर यह बात कही है कि नॉर्थ कोरिया को सिर्फ बातचीत की इच्छा जताने के लिए पुरस्कृत नहीं किया जाना चाहिए। ट्रंप से मीडिया ने इस दौरान यह सवाल भी किया कि आखिर पोंपेयो नॉर्थ कोरिया जाकर भी खाली हाथ लौटे हैं और उन्होंने तीन अमेरिकी नागरिकों की रिहाई को लेकर किसी भी तरह की जानकारी क्यों नहीं दी ? ट्रंप ने इसका जवाब दिया और कहा कि उनका प्रशासन तीन अमेरिकी नागरिकों की रिहाई के लिए काफी मेहनत से कोशिशें कर रहा है।

जापानी नागरिकों का भी मुद्दा
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह किम पर 13 जापानियों की रिहाई के लिए भी दबाव बनाना चाहते हैं जिनका अपहरण साल 1970 और 1980 में किया गया था। आबे के लिए इन 13 नागरिकों की रिहाई सबसे बड़ी प्राथमिकता है और जापान के लिए यह एक संवेदनशील मुद्दा भी है। इसके साथ ही ट्रंप ने अमेरिकी कॉलेज स्टूडेंट आट्टो वारम्बियर की मौत का भी जिक्र किया। वारम्बियर की मौत पिछले वर्ष हुई थी और नॉर्थ कोरिया की कैद से 17 माह के बाद वह रिहा हुए थे। इसके बाद वह कोमा में चले गए थे और कोमा में ही उनका निधन हो गया था। ट्रंप की मानें तो अपहरण का मुद्दा उनके लिए महत्वपूर्ण है और वह इसे सुलझाने के लिए काफी कोशिशें भी कर रहे हैं।












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