चार महीने में मंगल पर पहुंचेगा इंसान! भारत का दोस्त तैयार कर रहा परमाणु विमान, जल्द बसेगी बस्ती?

मंगल को लेकर पूरी दुनिया में कई अंतरिक्ष कार्यक्रम चल रहे हैं और एलन मस्क मंगल ग्रह पर इंसानों की बस्ती बसाना चाहते हैं, लिहाजा मंगल पर पहुंचने के लिए तेज एयरक्राफ्ट की जरूरत होगी।

nasa nuclear powered spacecraft

US developing nuclear powered spacecraft: मंगल पर बस्ती बसाने के लिए इंसान काफी लंबे अर्से से प्लान बना रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल इस बात को लेकर है, कि आखिर मंगल ग्रह तक पहुंचा कैसे जाए। फिलहाल इंसानों के पास जिस किस्म की टेक्नोलॉजी हैं, उनके जरिए मंगल पर पहुंचने में कई महीनों का वक्त लगता है। लेकिन, संयुक्त राज्य अमेरिका एक ऐसा विमान तैयार कर रहा है, जिसके जरिए सिर्फ 4 महीने में इंसान मंगल ग्रह पर पहुंच जाएगा। अगर ये प्लान कामयाब रहता है, तो अंतरिक्ष की दुनिया के लिए ये एक महाक्रांति की तरह होगी।

2027 तक मंगल पर पहुंचने की तैयारी

2027 तक मंगल पर पहुंचने की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका न्यूक्लियर फ्यूजन की शक्ति के सहारे चलने वाले एक अंतरिक्ष यान के निर्माण पर काफी तेजी से काम कर रहा है, जिससे मंगल ग्रह की यात्रा करने का अनुमानित समय 9 महीने से घटकर सिर्फ 4 महीने तक रह जाएगी। नासा ने मंगलवार को कहा है, कि वह न्यूक्लियर थर्मल प्रपोल्शन इंजन को साल 2027 कर विकसित करने के लिए और उसके जरिए अंतरिक्ष आधारित मिशनों को अंजाम देने के लिए यूएस मिलिट्री रिसर्च एंड डेवलपमेंट एंजेंसी DARPA के साथ साझेदारी कर रहा है। आपको बता दें कि, नासा पिछले लंबे वक्त से न्यूक्लियर थर्मल प्रपोल्शन इंजन के कंसेप्ट पर काम कर रहा है।

क्या है न्यूक्लियर थर्मल प्रपोल्शन इंजन कंसेप्ट?

क्या है न्यूक्लियर थर्मल प्रपोल्शन इंजन कंसेप्ट?

नासा के मुताबिक, न्यूक्लियर थर्मल प्रपोल्शन इंजन कंसेप्ट में न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर से निकलने वाली ऊष्मा को जोर देने के लिए हाइड्रोजन प्रोपेलेंट में पेश किया जाता है। माना जाता है, कि इस प्रक्रिया में उत्पन्न ऊर्जा, वर्तमान में उपयोग में आने वाले रासायनिक-आधारित रॉकेट इंजनों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली है। पारंपरिक रासायनिक-आधारित रॉकेट इंजन के साथ पृथ्वी से मंगल तक की यात्रा में लगभग 9 महीने लगते हैं। लेकिन न्यूक्लियर थर्मल प्रपोल्शन टेक्नोलॉजी के साथ यात्रा करने पर, ये समय घटकर आधे से भी कम हो जाएगा, यामि सिर्फ 4 महीने। नासा का मानना है, कि यह इंसान को अंतरिक्ष में गहराई तक भेजने के लिए महत्वपूर्ण है।

अंतरिक्ष की दुनिया में महाक्रांति

अंतरिक्ष की दुनिया में महाक्रांति

यात्रा के समय में कटौती का मतलब होगा, कि अंतरिक्ष यात्री कम समय के लिए अंतरिक्ष रेडिएशंस के संपर्क में आ पाएंगे और उनके साथ काफी सामान (भोजन और अन्य जरूरी वस्तुओं) को भेजने की जरूरत होगी। नासा के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर और पूर्व अंतरिक्ष यात्री पाम मेलरॉय ने रॉयटर्स के हवाले से कहा, कि "अगर हमारे पास इंसानों के अंतरिक्ष में यात्रा करने के लिए तेज वाहन हैं, तो वो यात्राएं सुरक्षित होंगी।" अंतरिक्ष का ये कार्यक्रम, जिसमें अब नासा भी शामिल हो रहा है, वो मौजूदा DARPA अनुसंधान कार्यक्रम का हिस्सा है। यह अमेरिकी स्पेस फोर्स को चंद्रमा के नजदीक परिक्रमा करने वाले उपग्रहों को ट्रांसफर करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

Recommended Video

    NASA के परसेवेरेंस रोवर ने Mangal ग्रह पर धूल के बवंडर की आवाज Record की | वनइंडिया | *International
    कई कंपनियां कर रही हैं काम

    कई कंपनियां कर रही हैं काम

    आपको बता दें, कि जनरल एटॉमिक्स, लॉकहीड मार्टिन और जेफ बेजोस की अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजिन को परमाणु रिएक्टरों और अंतरिक्ष यान के डिजाइन का अध्ययन करने के लिए 2021 में बजट आवंटित किया गया था। इस कार्यक्रम की प्रबंधक तबिता डोडसन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, कि नासा मार्च 2027 तक के प्रदर्शन के लिए परमाणु अंतरिक्ष यान बनाने के लिए इन कंपनियों में से एक कंपनी का चयन करेगी। आपको बता दें कि, मंगल को लेकर अमेरिका में कई कार्यक्रम चल रहे हैं, जिसमें एलन मस्क का मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने का कार्यक्रम है।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+