Explain: 50 साल में 15 लाख लोगों की हत्या, सब्जी की तरह बंदूकें खरीदते लोग.. अमेरिका बना सबसे खतरनाक!

अमेरिकी रिपोर्ट्स में भारत में मानवाधिकारों की आलोचना की जाती है, लेकिन क्या वो देश भारत को लेक्चर दे सकता है, जहां हर साल 40 हजार से ज्यादा लोग सड़कों पर मार दिए जाते हों?

US mass shootings

US mass shootings: संयुक्त राज्य अमेरिका के डलास शहर के उत्तर में एक व्यस्त शॉपिंग मॉल में एक बंदूकधारी ने गोली मारकर आठ लोगों की हत्या कर दी और कम से कम सात अन्य को घायल कर दिया।

अमेरिका में अब गोलीबारी की घटनाएं इतनी आम हो गई हैं, कि हेडलाइन भी बननी बंद होने लगी है और अमेरिका में लोगों को डर लगने लगा है। स्कूल, मॉल, बाजार, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स... कहीं भी और कभी भी गोलीबारी शुरू हो जाती है।

इस साल 7 मई तक, यानि सिर्फ 4 महीने 7 दिनों में अमेरिका में 164 फायरिंग की घटनाएं हो चुकी हैं। लिहाजा समझा जा सकता है, कि अमेरिका कितना खतरनाक होता जा रहा है और गन कल्चर ने इस देश की क्या स्थिति कर दी है। मानवाधिकार के नाम पर भारत को 'बदनाम' करने वाला अमेरिका, खुद अपनी कल्चर पर लगाम लगाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।

गन कल्चर से कराहता अमेरिका

पिछले महीने अप्रैल की 16 तारीख को अल्बामा में एक बर्थडे पार्टी के दौरान एक शख्स ने दनादन फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि 28 लोग घायल हो गये।

गन वायलेंस आर्काइव एक गैर लाभकारी संस्था है जो अमेरिका में मास शूटिंग की घटनाओं पर नजर रखती है। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में साल 2016 के बाद से ये सबसे बड़ा आंकड़ा है। अमेरिका में मास शूटिंग की घटनाएं अब आम हो चुकी हैं। ऐसा कोई दिन नहीं बीतता, जब देश के किसी शहर से गोलीबारी की खबरें नहीं आतीं।

गन वायलेंस आर्काइव के मुताबिक मास शूटिंग उस घटना को कहा जाता हैं जिसमें शूटर सहित चार या अधिक लोग घायल या मारे जाते हैं। गन वायलेंस आर्काइव की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में अब तक बंदूक हिंसा से संबंधित 11,521 मौतें दर्ज की गई हैं।

अगर साल 2022 की बात की जाए, तो पिछले साल अमेरिका में मास शूटिंग की कुल 647 घटनाएं दर्ज की गई थीं। यानि, हर महीने 53 फायरिंग, यानि हर दिन अमेरिका में दो जगहों पर मास शूटिंग की जाती है। अमेरिका में मास शूटिंग में पिछले साल करीब 45 हजार लोग मारे गये, जिनमें से 6,000 से ज्यादा बच्चे थे।

US mass shootings

नागरिकों से ज्यादा बंदूकों की संख्या

स्विस रिसर्च परियोजना स्मॉल आर्म्स सर्वे की रिपोर्ट में कहा गया है, कि अमेरिका दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां नागरिकों की तुलना में बंदूकों की संख्या ज्यादा है। साल 2021 की रिपोर्ट में बताया गया है, कि अमेरिका में हर 100 अमेरिकियों के पास 120 बंदूकें हैं। जबकि, 2011 में ये आंकड़ा 88 था, यानि साफ है, कि अभी भी अमेरिका में बंदूकों का कारबोर थमा नहीं है, जबकि पिछले साल बाइडेन प्रशासन ने कानून भी बनाया था।

रिपोर्ट में अमेरिका के गन कल्चर पर काफी डरावनी बातें कही गई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है, कि साल 2022 में अमेरिका में 45 फीसदी नागरिकों के पास बंदूक है। यानि, जिस समाज में 45 प्रतिशत लोगों के हाथों में बंदूक हो, वो समाज कितना खतरनाक हो सकता है, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है, क्योंकि किस शख्स के दिमाग में किस वक्त क्या आ जाएगा, उसे कौन समझ पाएगा।

50 साल पहले अमेरिका में करीब 37 प्रतिशत लोगों के पास बंदूके थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 1972 में अमेरिका में 9 करोड़ बंदूकें थीं। अभी का आंकड़ा करीब करीब 40 करोड़ के आसपास है।

अमेरिका की जनसख्या 33 करोड़ है और लोगों के पास 40 करोड़ बंदूके हैं। 1968 से 2017 तक के 50 सालों में अमेरिका में गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम 15 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

अमेरिका में हर मास शूटिंग की घटनाओं के बाद बड़े पैमाने पर बंदूक नियंत्रण का मुद्दा राजनीति और मीडिया में उछलता है लेकिन इसका अब तक कोई भी फायदा देखने को नहीं मिला है। जो अमेरिका सबसे अधिक मानवाधिकार-मानवाधिकर पर शोर मचाता है, उसी के देश में कब, किस इंसान की गोली मारकर हत्या कर दी जाए, कोई नहीं जानता।

फोर्ड्स लॉ सेंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक उच्च आय वाले देशों से यदि अमेरिका की तुलना की जाए तो यहां नागरिकों की बंदूक से हत्या में मरने की संभावना 25 गुना ज्यादा है, इसीलिए अमेरिका को सबसे खतरनाक विकसित देश कहा जा सकता है।

US mass shootings

गन कल्चर क्यों नहीं हो रहा खत्म?

अमेरिकी लोगों के लिए बंदूक रखना एक नशा के समान है। इसीलिए, अमेरिकी समाज से इस अफीम को निकालना अत्यंत मुश्किल है।

अमेरिका भले ही दुनिया में सबसे प्रगतिशील देश होने का दंभ भरता हो, लेकिन गन कल्चर को कंट्रोल करने में वो बुरी तरह से नाकाम रहा है। इसके पीछे यहां का बनाया गया कल्चर, बंदकू कंपनियों की तगड़ी लॉबी और राजनीति जिम्मेदार है।

अमेरिका के दर्जनों राष्ट्रपतियों ने गन कल्चर की वकालत की है। राष्ट्रपतियों ने सख्त बंदूक कानून बनाने का विरोध किया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनमें शामिल हैं। पिछले साल राष्ट्रपति जो बाइडेन ने लोगों की पहुंच से बंदूक को दूर रखने के लिए कानून बनाना शुरू किया, तो गन लॉबी ने उनका तगड़ा विरोध किया था। हालांकि, बाइडेन प्रशासन कानून बनाने में कामयाब रहा, लेकिन अभी तक लोगों के हाथ में बंदूक जाने कम नहीं हुए हैं और ना ही लोगों का मरना ही कम हुआ है।

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    बंदूक बनाने वाली कंपनियों का अमेरिका की राजनीति में गहरा दखल है। 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 63 हजार लाइसेंस्ड गन डीलर थे, जिन्होंने उस साल अमेरिकी नागरिकों को 83 हजार करोड़ रुपए की बंदूकें बेची थीं। जाहिर है राजनीति में पैसे का प्रवाह बनाए रखने में ये बंदूक बनाने वाली कंपनियां मददगार साबित होती हैं।

    आपको बता दें, कि साल 1791 में अमेरिका में संविधान के दूसरे संशोधन के तहत अमेरिकी नागरिकों को हथियार रखने और खरीदने का अधिकार दिया गया था। बताया जाता है, कि ऐसा गन लॉबी की वजह से किया गया था, जिसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है और कोई भी सनकी, ताबड़तोड़ फायरिंग कर कई लोगों को मौत के घाट उतार देता है।

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