US Iran War: 8 ईरानी लड़कियों को फांसी से क्यों बचा रहे Trump? कौन हैं वो और किस बात के लिए सजा-ए-मौत?
US Iran War: ईरान से युद्ध के बीच एक अजीब खबर आई है, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मुद्दे को लेकर ईरान से गुहार लगाई। मामला 8 ईरानी लड़कियों की फांसी का है। लेकिन ट्रंप नहीं चाहते कि ईरान उन्हें सजा-ए-मौत दे, इसके लिए वे खुद इन लड़कियों की पैरवी सोशल मीडिया के जरिए कर रहे हैं।
ट्रंप ने ईरान से की अपील
Trump ने ईरान से उन आठ महिलाओं को रिहा करने की सार्वजनिक अपील की है, जिन्हें कथित तौर पर फांसी दी जाने वाली है। ट्रंप का मानना है कि अगर ईरान ऐसा करता है, तो इससे अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में पॉजिटिव माहौल बन सकता है। उन्होंने खासतौर पर इन महिलाओं को बख्शने की बात कही, जिनमें एक 16 साल की लड़की और एक डॉक्टर भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, इन सभी महिलाओं को इस साल की शुरुआत में देशभर में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था।

Truth Social पर ट्रंप का मैसेज
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए ईरानी नेताओं से अपील की। उन्होंने लिखा-
"ईरानी नेताओं से, जो जल्द ही मेरे प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे, मैं इन महिलाओं की रिहाई की बहुत सराहना करूंगा। मुझे यकीन है कि वे इस बात का सम्मान करेंगे कि आपने ऐसा किया। प्लीज उन्हें कोई नुकसान न पहुंचाएं! यह हमारी बातचीत की शानदार शुरुआत होगी!!!" Trump Minister Resign: ट्रंप की महिला मंत्री ने दफ्तर में पी शराब, बनाए संबंध, खुली पोल और चली गई कुर्सीकौन हैं वो 8 महिलाएं जिन्हें ईरान दे रहा फांसी
ईरान जिन आठ महिलाओं को कथित तौर पर फांसी देने की तैयारी कर रहा है, उनके नाम हैं- पनाह मोवाहेदी, बीता हेम्मती, महबूबा शबानी, एनसिए नेजाती, गजल घालंदरी, डायना ताहेरबादी, गुलनाज नाराघी और वीनस हुसैननेजाद। ये सभी महिलाएं अलग-अलग बैकग्राउंड से आती हैं, लेकिन एक चीज कॉमन है, इन पर सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट से उठा मामला
ट्रंप की यह अपील अमेरिकी-इजरायल समर्थक कार्यकर्ता Eyal Yakoby की पोस्ट के बाद आई। उन्होंने X पर दावा किया था कि ईरान इन आठ महिलाओं को फांसी देने जा रहा है। उनकी पोस्ट में इन महिलाओं की तस्वीरें भी शामिल थीं, जिनमें जनवरी के विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार की गई बीता हेम्मती भी नजर आईं।
NCRI का दावा: बीता हेम्मती पर गंभीर आरोप
विपक्षी संगठन National Council of Resistance of Iran के मुताबिक, बीता हेम्मती पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें विस्फोटक या हथियारों का इस्तेमाल, कंक्रीट ब्लॉक फेंकना और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना शामिल है। उन्हें उनके पति और अपार्टमेंट में रहने वाले दो अन्य पुरुषों के साथ गिरफ्तार किया गया था। इन चारों को कथित तौर पर शासन के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई गई है।
नाबालिग और अन्य महिलाओं पर भी आरोप
याकोबी की पोस्ट में 16 साल की डायना ताहेरबादी और 33 साल की महबूबा शबानी का भी जिक्र था। इन दोनों को भी इस साल की शुरुआत में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। अन्य प्रदर्शनकारियों की तरह ताहेरबादी पर अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया, जो इस्लामिक गणराज्य में फांसी की सजा वाला अपराध माना जाता है। नॉर्वे स्थित हेंगॉ मानवाधिकार संगठन के अनुसार, शबानी पर घायल प्रदर्शनकारियों की मदद करने का आरोप था और उन्हें फरवरी में हिरासत में लिया गया।
वीनस और गुलनाज के साथ क्या हुआ?
28 साल वीनस हुसैननेजाद को 15 जनवरी को हिरासत में लिया गया था। उनके परिवार ने Australian Broadcasting Corporation को बताया कि उन्हें टीवी पर जबरन अपने खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर किया गया। वहीं फेमेना मानवाधिकार समूह के अनुसार, 37 साल की गुलनाज नाराघी, जो हाशमी-नेजाद अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट हैं, को 14 जनवरी को गिरफ्तार किया गया और क़ारचक महिला जेल में उनसे जबरन इकबालिया बयान पर साइन करवाए गए।
बाकी महिलाएं कौन हैं?
याकोबी की पोस्ट में शामिल अन्य महिलाएं- गजल घालंदरी, पनाह मोवाहेदी और एनसिए नेजात के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि तेहरान सरकार विरोध करने वालों के खिलाफ ढोंग भरे मुकदमे (sham trials) चलाती है। जनवरी के विरोध प्रदर्शनों के बाद से ऐसे मामलों में तेजी आई है।
बड़े स्तर पर गिरफ्तारी और फांसी के आंकड़े
US आधारित ह्यूमन राइट्स न्यूज एजेंसी Human Rights Activists News Agency के मुताबिक, इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान 50,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था। वहीं NCRI का अनुमान है कि इस साल के पहले महीने में ही 300 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा चुकी है। ये आंकड़े ईरान में मानवाधिकार की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
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