US Iran War: ईरान ने गिराया अमेरिका का KC-135 एयरक्राफ्ट! Trump ने छुपाई जानकारी? अब खुल रही पोल?
US Iran War: मिडिल ईस्ट में लगातार बिगड़ते हालात के बीच इराक से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने अमेरिका को झटका दे दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिमी इराक में एक अमेरिकी एयरफोर्स का एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बमबारी जारी है। क्रैश हुआ यह एयरक्राफ्ट एक KC-135 था, जो हवा में ही दूसरे एयरक्राफ्ट में ईंधन भरने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। जिसमें कम से कम पांच सैन्य कर्मी सवार बताए जा रहे हैं।
अमेरिका ने कहा- गलती से हुआ
इस घटना की जानकारी United States Central Command ने दी। बयान के मुताबिक इस घटना में एक दूसरा एयरक्राफ्ट भी शामिल था। हालांकि सेंट्रल कमांड ने साफ कहा कि यह दुर्घटना किसी दुश्मन के हमले या मित्र देशों की गोलीबारी की वजह से नहीं हुई। बयान में कहा गया कि एक एयरक्राफ्ट पश्चिमी इराक में दुर्घटनाग्रस्त हुआ जबकि दूसरा एयरक्राफ्ट सुरक्षित उतर गया। साथ ही अमेरिका इस घटना या हमले में किसी के अमेरिकी सैनिक के मारे जाने या घायल होने की जानकारी नहीं दे रहा।

ईरान ने कहा- हमने गिराया
हालांकि, सेंट्रल कमांड के दावे से उलट, ईरान समर्थित प्रॉक्सी गुट के लड़ाकों में एस गुट जो इराक में एक्टिव है 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' ने KC-135 विमान को गिराने की जिम्मेदारी ली। इस गुट अपने बयान में कहा कि उन्होंने "अपने देश की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र की रक्षा में" विमान को मार गिराया। गौर करने वाली बात है कि अमेरिका को ये नुकसान तब हुआ जब ईरानी फौज के मुखिया अली लारीजानी ने कहा था कि तेहरान अमेरिका को ईरान में युद्ध शुरू करने के लिए अफसोस कराएगा।
KC-135 स्ट्रैटोटैंकर: 60 साल से अमेरिकी एयरफोर्स की रीढ़
Boeing KC‑135 Stratotanker पिछले लगभग 60 सालों से अमेरिकी एयरफोर्स की हवाई ईंधन भरने की क्षमता का अहम हिस्सा रहा है। यह एयरक्राफ्ट हवा में उड़ रहे दूसरे लड़ाकू एयरक्राफ्टों को ईंधन देने के लिए बनाया गया है, जिससे वे बिना जमीन पर उतरे लंबे समय तक मिशन जारी रख सकें।
कैसे काम करता है यह हवाई ईंधन भरने वाला सिस्टम?
KC-135 मुख्य रूप से उड़ान के दौरान ईंधन ट्रांसफर करने के लिए "फ्लाइंग बूम" नाम की तकनीक का इस्तेमाल करता है। एयरक्राफ्ट के पीछे बैठे बूम ऑपरेटर इस पूरी प्रक्रिया को कंट्रोल करते हैं। जिन एयरक्राफ्टों में प्रॉब सिस्टम होता है, उनके लिए बूम के पीछे शटलकॉक के आकार का एक "ड्रॉग" लगाया जाता है, जो ईंधन ट्रांसफर करने में मदद करता है। कुछ KC-135 एयरक्राफ्टों में मल्टीपॉइंट रिफ्यूलिंग सिस्टम भी लगाया गया होता है। इस सिस्टम की मदद से एक ही समय में दो अलग-अलग एयरक्राफ्टों को ईंधन दिया जा सकता है।
कई तरह के सैन्य अभियानों में होता है इस्तेमाल
KC-135 केवल अमेरिकी एयरफोर्स के लिए ही नहीं बल्कि नेवी, मरीन कॉर्प्स और अमेरिका के सहयोगी देशों के सैन्य अभियानों में भी इस्तेमाल किया जाता है। ईंधन भरने के अलावा यह एयरक्राफ्ट मेडिकल इवैकुएशन यानी हवाई चिकित्सा निकासी के दौरान घायल सैनिकों और मरीजों को भी ले जाने में सक्षम है।
तकनीकी क्षमता: भारी वजन और लंबी उड़ान
यह एयरक्राफ्ट चार टर्बोफैन इंजनों से चलता है, जो इसके 35 डिग्री झुके हुए पंखों के नीचे लगे होते हैं। KC-135 लगभग 322,500 पाउंड तक के कुल वजन के साथ उड़ान भर सकता है। इसकी ईंधन प्रणाली के ऊपर बना कार्गो डेक यात्रियों और सामान दोनों को ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक बार में 83,000 पाउंड तक सामान ले जाने की क्षमता
कार्गो डेक का इस्तेमाल ईंधन भंडारण के विन्यास के आधार पर अलग-अलग तरह से किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर यह एयरक्राफ्ट करीब 83,000 पाउंड तक का सामान या अन्य सैन्य उपकरण ले जाने में सक्षम है।
ईरान युद्ध के बाद चौथा अमेरिकी एयरक्राफ्ट नुकसान का शिकार
यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ हमले शुरू होने के बाद से यह चौथा अमेरिकी एयरक्राफ्ट है जो इस संघर्ष के दौरान खो गया है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में कई सैन्य घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
कुवैत में गलती से गिराए गए तीन अमेरिकी फाइटर जेट
इसी महीने की शुरुआत में एक और बड़ी घटना सामने आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम की ओर से गलती से फ्रेंडली फायर की घटना में तीन अमेरिकी एयरफोर्स के लड़ाकू एयरक्राफ्ट मार गिराए गए थे। हालांकि इस हादसे में सभी पायलट सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने में कामयाब रहे। लेकिन एयरक्राफ्ट का भारी नुकसान अमेरिका को हुआ है।
जंग में बढ़ता जा रहा है नुकसान
मिडिल ईस्ट में जारी इस जंग में अब तक सात अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। वहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 150 अमेरिकी सैन्य कर्मी घायल भी हुए हैं।
ईरान में मौत का आंकड़ा 1300 के पार
दूसरी तरफ ईरान में भी इस युद्ध का भारी असर देखने को मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक ईरान में मरने वालों की संख्या 1,300 से ज्यादा हो चुकी है।
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