US Iran War: सीजफायर टूटने की कगार पर! बहरीन में अमेरिकी के ठिकानों पर ईरान का हमला, फिर होगा युद्ध?

US Iran War: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में बहरीन पर ईरानी ड्रोन हमले और हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में एक मालवाहक जहाज पर हमले के बाद हाल ही में हुआ युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है। दोनों देश एक-दूसरे पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में फिर से युद्ध जैसे हालात बनने लगे हैं।

बहरीन और हॉर्मुज में हमलों से बढ़ी चिंता

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि शनिवार सुबह देश के कई इलाकों को निशाना बनाकर ईरानी ड्रोन दागे गए। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) का हेडक्वार्टर मौजूद है, इसलिए यह जगह रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है। इसी बीच हॉर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर पर भी अंजान प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। ब्रिटेन के एक नौसैनिक समूह ने इस घटना की जानकारी दी, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई।

US Iran War

हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा सुरक्षा अलर्ट

व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के बाद 'ज्वाइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर' ने हॉर्मुज स्ट्रेट के लिए खतरे का स्तर बढ़ाकर 'सब्सटेंशियल' यानी बेहद गंभीर कर दिया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का सबसे अहम मार्ग है, जहां से हर दिन दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

कैसे बढ़ा अमेरिका-ईरान का टकराव?

तनाव की शुरुआत गुरुवार को हुई, जब हॉर्मुज में एक कंटेनर शिप पर ईरानी ड्रोन हमला हुआ। इसके जवाब में शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल स्टोरेज और रडार केंद्रों पर हवाई हमले किए। इसके बाद शनिवार को ईरान ने दावा किया कि उसने फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने इस महीने हुए आपसी समझौते (MoU) का उल्लंघन किया है, जबकि अमेरिका का आरोप है कि ईरान लगातार समझौते की शर्तें तोड़ रहा है।

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ट्रम्प प्रशासन की सख्त चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित 60 दिनों का युद्धविराम अब खतरे में दिखाई दे रहा है। इस समझौते के तहत ईरान को न्यूक्लियर टॉक आगे बढ़ानी थी और समुद्री जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी थी। बदले में अमेरिका कुछ प्रतिबंधों में राहत देने को तैयार था। लेकिन मौजूदा हालात के बाद समझौता लगभग टूटता नजर आ रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साफ कहा कि अमेरिका ने समझौते का पालन किया है, लेकिन यदि हिंसा जारी रही तो उसका जवाब भी सैन्य ताकत से दिया जाएगा।

हॉर्मुज पर कंट्रोल क्यों है इतना अहम?

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापारिक मार्ग माना जाता है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कंट्रोल और संभावित ट्रांजिट टोल लगाने की योजना पर भी काम कर रहा है। दूसरी ओर अमेरिका इस समुद्री मार्ग को हर हाल में खुला रखना चाहता है ताकि वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो।

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दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देश बातचीत का रास्ता अपनाते हैं या फिर यह सैन्य तनाव और गहरा होता है। आने वाले दिनों में हॉर्मुज स्ट्रेट की स्थिति न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है।

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