Shaheen-3 Missile: चीन-US की लड़ाई में पाकिस्तानी मिसाइल कार्यक्रम जला, शाहीन-3 प्रोजेक्ट पर कैसे फिरा पानी?

Shaheen-3 Missile: अमेरिका और चीन के बीच चल रही 'लड़ाई' ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पानी फेर दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में कथित संलिप्तता के लिए एक चीनी कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया है।

बीजिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑटोमेशन फॉर मशीन बिल्डिंग (RIAMB) इंडस्ट्री पर रॉकेट मोटर टेस्ट के लिए उपकरण खरीदने के लिए पाकिस्तान के नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स (NDC) के साथ मिलकर काम करने का आरोप है। इसके अलावा, अन्य चीनी फर्मों और एक व्यक्ति को मिसाइल टेक्नोलॉजी सीमाओं के तहत प्रतिबंधित उपकरणों को ट्रांसफर करने के लिए प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।

Shaheen-3 Missile

12 सितंबर को, संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग ने एक प्रेस रिलीज में कहा, कि वह एक चीनी रिसर्च संगठन और कई चीनी फर्मों पर प्रतिबंध लगा रहा है, जिनके बारे में उसका दावा है, कि वे पाकिस्तान को उनके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए उपकरणों की आपूर्ति कर रहे थे।

अमेरिका ने जिन चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाता है, उनके नाम इनोवेटिव इक्विपमेंट और हुबेई हुआचांगडा इंटेलिजेंट इक्विपमेंट कंपनी, यूनिवर्सल एंटरप्राइज और शीआन लोंगडे टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट कंपनी शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने बयान में दावा किया, कि पाकिस्तान के राष्ट्रीय विकास परिसर (NDC) ने शाहीन-3 और अबाबील सिस्टम और संभवतः बड़ी प्रणालियों के लिए रॉकेट मोटर्स के परीक्षण के लिए उपकरण प्राप्त करने के लिए बीजिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑटोमेशन फॉर मशीन बिल्डिंग (आरआईएएमबी) उद्योग के साथ सहयोग किया है।

अमेरिकी प्रतिबंध, पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट के लिए बहुत बड़ा झटका है।

चीन और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

चीन ने इन प्रतिबंधों की निंदा की है और तर्क दिया है, कि अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार के बिना एकतरफा कदम अस्वीकार्य हैं। पाकिस्तान के मिसाइल विकास से जुड़ी चीनी संस्थाओं पर अमेरिकी प्रतिबंधों का यह पहला मामला नहीं है। चीन और पाकिस्तान दोनों ने इन कार्रवाइयों की आलोचना की है, जबकि पाकिस्तान ने इन्हें राजनीति से प्रेरित निर्यात नियंत्रण बताकर खारिज कर दिया है।

पाकिस्तान ने Missile Technology Control Regime (MTCR ) में शामिल होने से लगातार इनकार किया है, जिसका उद्देश्य मिसाइल और मिसाइल प्रौद्योगिकी प्रसार को रोकना है। विदेशी सहायता से अपनी मिसाइल क्षमताओं में प्रगति के बावजूद, पाकिस्तान एमटीसीआर सदस्यता में दिलचस्पी नहीं रखता है, क्योंकि इससे उसकी एडवांस मिसाइल टेक्नोलॉजी हासिल करने में आसानी होती है और वो चोरी-छिपे रास्तों से उपकरणों का आयात करता है।

अमेरिका का कहना है, कि MTCR में शामिल देश, सिर्फ उन्हीं देशों को उपकरण बेच सकते हैं, जो इसमें शामिल हों। जो इसमें शामिल नहीं है, उसे इसका सदस्य देश उपकरणों का निर्यात करता है, तो उसपर प्रतिबंध लगाया जाएगा। और इसीलिए चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

Shaheen-3 Missile

अमेरिकी विदेश विभाग का सख्त रुख

अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ किया है, कि प्रतिबंधों के निशाने पर वे संस्थाएं और व्यक्ति हैं, जिन्होंने जानबूझकर MTCR-कंट्रोल्ड उपकरण और प्रौद्योगिकी को गैर-MTCR देश को ट्रांसफर किया। विदेश विभाग का कहना है, कि अमेरिका का यह कदम शामिल पक्षों के प्रतिरोध के बावजूद अप्रसार मानदंडों को लागू करने की अमेरिकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम में रेंज, सटीकता और पेलोड क्षमता में जबरदस्त सुधार हुआ है। हालांकि, MTCR में शामिल होने से इनकार करने का सिलसिला भी जारी है। पाकिस्तान का तर्क है, कि MTCR उसके खिलाफ पक्षपाती है, और उसने बताया, कि कुछ देश परमाणु अप्रसार के सख्त पालन का दावा करते हैं, जबकि अन्य के लिए अपवाद बनाते हैं।

यह मुद्दा, अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण समझौतों की जटिल गतिशीलता और उनके इर्द-गिर्द भू-राजनीतिक तनावों को उजागर करता है। अमेरिका, मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को सीमित करने के लिए प्रतिबंधों को एक टूल के रूप में लागू करता है, जबकि चीन और पाकिस्तान उन प्रतिबंधों का विरोध करते हैं जिन्हें वे अनुचित मानते हैं।

दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं, इसलिए स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

कितनी खतरनाक है शाहीन-III मिसाइल

पाकिस्तान की शाहीन-III दो चरणों वाली, मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो ठोस ईंधन से चलती है। रिपोर्ट्स बताती हैं, कि इस मिसाइल की रेंज 2,750 किलोमीटर है और यह पारंपरिक और परमाणु, दोनों तरह के हथियार ले जा सकती है, जिससे यह पाकिस्तान के सामरिक शस्त्रागार में सबसे लंबी दूरी की मिसाइल बन जाती है।

दूसरी ओर, 2,200 किलोमीटर की मैक्सिमम सीमा के साथ, अबाबील एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है जिसमें तीन चरण और ठोस ईंधन होता है। शाहीन-3 से पहले भी पाकिस्तान इसके दो वेरिएंट्स का टेस्ट कर चुका है, जिनकी क्षमता 900 किलोमीटर और 1500 किलोमीटर हैं। ये सतह से मार करने वाली मिसाइले हैं।

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