कश्मीर, इजरायल, यहूदी, नरेन्द्र मोदी.. अमेरिकी संसद ने भारत विरोधी मुस्लिम सांसद पर गिराई गाज
इल्हान उमर सोमाली मूल की हैं, जो अमेरिका में एक शरणार्थी बनकर आईं थीं और फिर अमेरिका की राजनीति में कदम रखा और सांसद चुनी गईं। अमेरिकी कांग्रेस में चुनी जाने वाली दो महिला नेताओं में इल्हान उमर भी शामिल हैं।

Ilhan Omar: भारत, इजरायल, यहूदी और कश्मीर को लेकर जहरीली बयानबाजी करने वाली सांसद इल्हान उमर के खिलाफ अमेरिकी संसद ने बड़ी कार्रवाई की है और उन्हें विदेश मामलों की समिति से बाहर कर दिया गया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,अमेरिकी संसद में इल्हान उमर को निकालने के लिए वोटिंग की गई थी और ज्यादा सांसदों ने इल्हाम उमर को विदेश मामलों की समिति से बाहर निकालने के पक्ष में वोट डाला है।

इल्हान उमर पर क्यों की गई कार्रवाई
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इल्हान उमर के विवादित बयानों और यात्राओं को लेकर पहले ही अमेरिका में विरोध होता रहा है, लेकिन उन्हें विदेश मामलों की समिति से उस वक्त बाहर का रास्ता दिखाया गया, जब उन्होंने इजरायल के बारे में काफी विवादित टिप्पणी की थी। इल्हाम उमर की टिप्पणी के बाद यहूदी समाज की तरफ से कड़ा विरोध जताया गया था और रिपब्लिकन पार्टी ने भी इल्हान उमर की निंदा की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इल्हाम उमर को विदेश मामलों की समिति से बाहर निकालने के लिए रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से संसद में प्रस्ताव पेश किया गया था और वोटिग में ज्यादातर सांसदों ने इल्हान उमर को निकालने के प्रस्ताव के समर्थन में वोट डाला। इल्हान उमर की अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी के भी कुछ सांसदों ने उनके खिलाफ वोट डाला था।

इल्हान उमर की टिप्पणी से गुस्सा
अमेरिकी संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में हुई वोटिंग के दौरान इल्हान उमर को निकालने के पक्ष में 218 सांसदों ने वोट डाला था, जबकि उनके खिलाफ लाए गये प्रस्ताव के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी के 211 सांसदों ने वोट डाला था। लिहाजा, इल्हान उमर 218-211 वोटों के अंतर से विदेश मामलों की समिति से बाहर कर दी गईं। अमेरिकी संसद के स्पीकर केविन मैक्कार्थी ने इल्हान उमर को विदेश मामलों की समिति से बाहर निकालने के लिए वोटिंग करवाने की इजाजत दी थी। आपको बता दें, कि अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत है, लिहाजा प्रस्ताव पेश होते ही करीब करीब तय हो गया था, कि इल्हान उमर के लिए अब विदेश मामलों की समिति में रहना मुश्किल है।

डोनाल्ड ट्रंप भी दे चुके हैं सख्त बयान
इल्हान उमर अपने इस्लामिक एजेंडे के लिए जानी जाती है और सोमालिया से शरणार्थी बनकर अमेरिका में राजनीति करने वाली इल्हान, हमेशा से भारत, इजरायल और यहूदियों के खिलाफ जमकर जहरीली बयानजाबी करती रही है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2019 में प्रसिद्ध रूप से कहा था, कि इल्हाम उमर और तीन कथित प्रगतिशील महिलाओं को अपने देशों में "वापस जाना" चाहिए। वहीं, विदेश मामलों की समिति से बाहर किए जाने के बाद, जैसा की उम्मीद थी, ठीक वैसा ही इल्हान उमर ने भी मुस्लिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया। इल्हान उमर ने कहा, कि वो एक मुस्लिम महिला है और चूंकी शरणार्थी बनकर अमेरिका आई थी, इसीलिए उसके खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी ने ये कार्रवाई की है।

भारत के खिलाफ बयानबाजी में माहिर
इल्हान उमर अपने पाकिस्तान प्रेम और भारत के खिलाफ नफरती बयानबाजी के लिए कुख्यात रही हैं और वो भारत-अमेरिका संबंधों में भी कड़वाहट लाने की कोशिश कर चुकी हैं। जुलाई 2022 में, उन्होंने भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड की निंदा करते हुए प्रतिनिधि सभा में भारत विरोधी प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने कहा था, कि नई दिल्ली मुसलमानों, सिखों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है। इसके अलावा इल्हान उमर, अप्रैल 2022 में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की यात्रा पर भी गई थीं, और अपने मतदाताओं को खुश करने और कश्मीर के लिए फंड जुटाने का वादा किया था। आलोचकों का आरोप है, कि इल्हाम उमर को असल में राजनीति के बारे में कुछ नहीं मालूम है, वो सिर्फ मुस्लिम कार्ड की राजनीति में माहिर हो गई है और नस्लवाद को बड़े मुद्दे के तौर पर सहानभूति वोट बटोरती है। वहीं, वह पहचान की राजनीति में काफी रुचि रखती है।

इल्हान की पीओके यात्रा पर भारत गुस्सा
इल्हान उमर की पीओके यात्रा को लेकर भारत ने अमेरिका के सामने गहरी नाराजगी जताई थी, जिसके बाद व्हाइट हाउस को बकायदा बयान जारी करना पड़ा था और व्हाइट हाउस ने कहा था, कि उसे इल्हान उमर के पीओके की यात्रा की जानकारी नहीं थी और इल्हान की पीओके यात्रा व्यक्तिगत थी। वनइंडिया ने जिन विशेषज्ञों से बात की, उनका कहना है, कि उनके जैसे कई लोग हैं, जो व्यक्तिगत लाभ और अपनी छवि निर्माण के लिए इस्लामोफोबिया को भुनाते हैं। वह भी पाकिस्तान के जाल में फंस गई है और कश्मीर मुद्दे को भुनाने के लिए पाकिस्तान पहुंच गईं।

नागरिकता के लिए भाई से शादी
ऑपइंडिया ने एक लेख में दावा किया है, कि इल्हान उमर को शक्तिशाली इस्लामवादी लॉबी के लिए काम करने वाली नेता के तौर पर देखा जाता है, जिसका एकमात्र लक्ष्य आधुनिक समाजों में कट्टरपंथी इस्लाम को आगे बढ़ाना है। इल्हान उमर 1995 में 12 साल की उम्र में अमेरिका पहुंची थी और पांच साल बाद वो अमेरिका की नागरिक बन गई। आरोप है, कि अमेरिका की नागरिकता हासिल करने के लिए इल्हान उमर ने अपने ही जैविक भाई से शादी कर ली थी और ऐसा करके उसने अमेरिका की आव्रजन कानून से बचने की कोशिश की थी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी जांच की मांग की थी। इसके साथ ही इल्हान उमर ताजा-ताजा हिन्दू विरोधी नेता भी बनी हैं और वह अपने भारत विरोधी बयानों के लिए भी कुख्यात हैं। खासकर उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार को निशाना बनाया है। उन्होंने इस नैरेटिव को फैलाने के लिए भारत में वामपंथी गुटों का समर्थन हासिल किया है।












Click it and Unblock the Notifications