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US Debt: क्या पाकिस्तान से भी बुरा होगा अमेरिका का हाल.. 50 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, टूट जाएगा सुपरपावर का घमंड?

US Debt News: कई दशकों से दुनिया की राजनीति को कंट्रोल करने वाला अमेरिका, जिसे सुपरपावर का खिताब हासिल है, क्या उसका घमंड टूटने वाला है? दुनिया में अंधाधुंध युद्ध शुरू करने वाला और दूसरी लड़ाइयों में पैसे झोंकते झोंकते, क्या अमेरिका दिवालिएपन की राह पर चल निकला है।

ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, कि साल 2034 तक अमेरिका के ऊपर राष्ट्रीय कर्ज 50 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान लगाया गया है, जिसे अमेरिका की राजनीति में तहलका मचा दिया है। अनुमानों में कहा गया है, कि अमेरिका पर वास्तविक कर्ज साल 2034 तक बढ़कर 50 ट्रिलियन डॉलर से काफी आगे निकल सकता है।

America will be 50 trillion in debt By 2034

क्या अमेरिका, कर्ज के जाल में फंस गया है?

अमेरिकी कांग्रेस के बजट कार्यालय ने नोट किया है, कि संघीय ऋण अब से एक दशक बाद उसके सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 122% तक पहुंच जाएगा, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की राजकोषीय स्थिति को बौना कर देगा।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि ऐसी स्थिति में अमेरिका को डिफेंस, सामाजिक सुरक्षा खर्च में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इतना ही नहीं, ऐसी स्थिति में फंसने के बाद अमेरिका को टैक्स में बेतहाशा इजाफा करना होगा। इसके अलावा, अगर अमेरिका गंभीर युद्ध की स्थिति में फंसता है, या आर्थिक मंदी में फंसता है, तो उकी स्थिति विचलित करने वाली हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि ऐसी स्थिति में अगर दुनिया किसी आर्थिक आपदा में फंसती है, या अगर अमेरिका गंभीर राजनीतिक झगड़े में फंसता है, या अगर शीर्ष उभरते बाजार में डी-डॉलरीकरण की कोशिश होती है, तो फिर अमेरिका पर इसका भयानक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, शीर्ष उभरते बाजार में अमेरिका को प्रेशर में लाने के लिए डी-डॉलरीकरण को जोर दे सकते हैं।

अमेरिका में गहराता राजनीतिक संकट

अमेरिका में घरेलू राजनीतिक संकट का सबसे बड़ा उदाहरण ये है, कि अगर 5 नवंबर को होने वाले चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप हार जाते हैं और जो बाइडेन जीत जाते हैं, तो निश्चित तौर पर 'ट्रंप की आर्मी' खामोश नहीं रहने वाली है। इस बात की संभावना न्यूनतन है, कि चुनावी हार के बाद ट्रंप समर्थक अपने घरों में शांति से बैठें।

ऐसा माना जा रहा है, कि अगर ट्रंप चुनाव हारते हैं, तो कैपिटल हिल 2.0 शुरू होने की आशंका है। इससे पहले 6 जनवरी 2021 को जब ट्रंप समर्थकों ने कैपिटल हिल पर हमला किया था, उसके बाद फिच रेटिंग्स ने अमेरिका की रेटिंग्स AAA को रद्द कर दिया था। ऐसे में अगर फिर से कैपिटल हिल हिंसा जैसा कुछ होता है, कि सवाल ये हैं, कि क्या अब अगला कदम मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस को पिछली AAA रेटिंग को हटाने के लिए उकसा सकता है?

पिछले कुछ महीनों से देखने को मिल रहा है, कि चीन के खिलाफ टैरिफ रेट बढ़ाने के बाद भी डॉलर के प्रति वैश्विक विश्वास नहीं बढ़ रहा है। आपको बता दें, कि अमेरिका ने चीन की इलेक्ट्रिक कारों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है, इसके बाद भी डॉलर को बल नहीं मिला है।

दिक्कत ये है, कि चीनी इलेक्ट्रिक कार काफी सस्ते हैं और यूरोप के साथ साथ रूस और एशियाई बाजारों में उनका कब्जा हो रहा है, जिससे डॉलर चीन के खजाने में ही जा रहे हैं। लिहाजा, अमेरिका अपने इन कदमों से जलवायु परिवर्तन, सैन्य-से-सैन्य संचार, काउंटरनारकोटिक्स, एआई-संबंधित जोखिमों या यहां तक ​​कि बुनियादी आर्थिक सहयोग पर भी चीनी नेता शी जिनपिंग का सहयोग हासिल नहीं कर सकता है।

2017 से अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार युद्ध को काफी तेज कर रखा है। तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीनी सामानों और वैश्विक स्टील और एल्यूमीनियम पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। जब​ बाइडेन सत्ता में आए, तो उन्होंने ट्रम्प के समय शुरू किए गये व्यापार युद्ध को ना सिर्फ बरकरार रखा, बल्कि उसे और आगे बढ़ाया है।

us federal debt to increase 50 trillion

चीन के खिलाफ अमेरिका और होगा सख्त

मौजूदा राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कैम्पेनिंग में डोनाल्ड ट्रंप ने सभी चीनी सामानों पर 60 प्रतिशत का भारी-भरकम टैक्स थोपने की धमकी दी है और माना जा रहा है, कि चाहे ट्रंप हो या बाइडेन, अमेरिका का अगला प्रशासन चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध को और तेज करेगा।

इसने अमेरिका को और ज्यादा आक्रामक बनाया है, और अमेरिका ने मिडिल ईस्ट समेत ग्लोबल साउथ के दूसरे देशों के साथ व्यापारिक समझौते करने के लिए उकसाया है। चीन ने मिडिल ईस्ट के बाजारों पर तेजी से कब्जा करना शुरू किया है और अमेरिका ने पहले ही प्रतिबंध लगाकर चीन की थाली में रूस को सौंप रखा है। वहीं, भारत जैसे देश, जो अमेरिका के सहयोगी देश हैं, वो भी अलग अलग देशों के साथ स्थानीय करेंसी में समझौता कर रहे हैं, जिससे डॉलर पर आने वाले भविष्य में गंभीर खतरा पड़ने की संभावना है।

अमेरिका के ऊपर मौजूदा समय में राजकोषीय ऋण बढ़कर 35 ट्रिलियन डॉलर हो गया है।

गोल्डमैन की अर्थशास्त्र टीम का अनुमान है, कि अमेरिका का ऋण-से-जीडीपी अनुपात वर्तमान 98% से 2034 तक 130% तक पहुंच जाएगा - जो कि CBO के अनुमानों से 8 प्रतिशत ज्यादा है। लेकिन क्या यह उससे कहीं अधिक हो सकता है?

इकोनॉमिस्ट फर्ग्यूसन के मुताबिक, "बाइडेन प्रशासन ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और हाल के दिनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अर्थव्यवस्था में चमत्काल लाने का वादा किया था, जो नहीं हो पाया। स्थिति ये है, कि अमेरिकी गैर-कृषि व्यवसाय क्षेत्र में उत्पादकता की वार्षिक औसत वृद्धि दर 2007 से सिर्फ 1.5% पर अटकी हुई है, जो निराशाजनक है।"

लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या अमेरिका अपनी इस स्थिति को सुधार पाएगा, क्यों वो ऋण को कम कर पाएगा और भविष्य में तबाही की किसी संभावना को वक्त रहते ठीक कर पाएगा?

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