US elections 2024: राष्ट्रपति बनाने वाले राज्यों में मुस्लिम वोटरों का कितना असर, गाजा युद्ध से किसे नुकसान?

As the US elections approach, analysts suggest rising tensions in the Middle East could negatively affect Kamala Harris's campaign, particularly among Arab voters. The impact of these dynamics on voter turnout remains a

US elections 2024: संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में चार हफ्ते से भी कम समय बचा है और उससे पहले विश्लेषकों ने चेतावनी दी है, कि मध्य पूर्व में इजराइल के बढ़ते सैन्य अभियान से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

विदेश नीति शायद ही कभी अमेरिकी मतदाताओं की सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। लेकिन गाजा पट्टी में पिछले एक साल से चल रही इजराइल और हमास की लड़ाई, और अब लेबनान में इजराइली सैनिकों के शुरू हुए जमीनी सैन्य अभियान ने मुस्लिम वोटरों के बीच अमेरिका की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

US elections 2024

राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन इजराइल के समर्थन में अडिग रहा है, और आशंका है, कि बाइडेन प्रशासन के इस स्टैंड ने डेमोक्रेटिक पार्टी के कोर मुस्लिम वोटरों को चोट पहुंचाया है और अमेरिकी अरब, कमला हैरिस के खिलाफ दिख रहे हैं। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है, कि अरब वोटरों के पास कोई और विकल्प नहीं है, क्योंकि वो एकजुट होकर वोट करते हैं और ट्रंप को वोट करने की संभावना नहीं के बराबर है।

अरब वोटर्स क्या वोट ही नहीं डालेंगे?

कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच काफी कड़ी टक्कर देखी जा रही है, लिहाजा बाइडेन प्रशासन पर अरब वोटरों के गुस्से का मतलब ये हुआ, कि कमला हैरिस पर इसका असर हो सकता है, ऐसे में अगर अरब मुस्लिम वोटर्स कमला हैरिस के खिलाफ गुस्सा निकालेंगे और डोनाल्ड ट्रंप को वोट नहीं करेंगे, तो क्या मिशिगन जैसे प्रमुख राज्यों में अरब मतदाता 5 नवंबर को होने वाले चुनाव के दिन घर पर ही बैठने वाले हैं?

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में अरब-अमेरिकी संस्थान के सह-संस्थापक जिम जोगबी ने कहा है, कि "यह एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है, जिसने बराकग ओबामा को दूसरी बार राष्ट्रपति बनाने में अहम भूमिका निभाई थी और यहां 2:1 में डेमोक्रेटिक बमान रिपब्लिकन वोटर्स हैं, लेकिन अब दोनों ही पार्टियों के पास 38-38 प्रतिशत वोट हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है, कि मिशिगन में बाइडेन प्रशासन के खिलाफ गुस्से का असर कमला हैरिस पर पड़ा है, क्योंकि अरब मुस्लिमों का मानना है, गाजा में एक साल से चल रहा युद्ध, जिसमें 42 हजार से ज्यादा लोग मारे गये हैं, उसे नहीं रोक पाना बाइडेन प्रशासन की नाकामी है।

अरब मुस्लिमों में एक धारणा ये बनी है, कि बाइडेन प्रशासन के मन में फिलीस्तीन और लेबनानी लोगों की जिंदगी कोई मायने नहीं रखती है।

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कमला हैरिस का कैसे घट रहा जनाधार?

सितंबर महीने में अरब अमेरिकन इंस्टीट्यूट की तरफ से किए गए सर्वेक्षण में पाया गया था, कि अरब मतदाताओं के बीच कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप बराबरी पर पहुंच गये थे, जिन्हें क्रमशः 41 प्रतिशत और 42 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हो रहा था।

यह आंकड़ा वास्तव में डेमोक्रेट्स के लिए एक उल्लेखनीय सुधार है। जब बाइडेन चुनावी रेस में शामिल थे, उस वक्त गाजा में युद्ध की शुरुआत के बाद अरब मतदाताओं के बीच उनका समर्थन काफी कम हो गया था और अक्टूबर 2023 में किए गये सर्वेक्षेण में बाइडेन को सिर्फ 17 प्रतिशत वोट ही मिल रहे थे। जबकि, 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन को 59 प्रतिशत से ज्यादा अरब मुस्लिम वोटरों का साथ मिला था।

हालांकि, कमला हैरिस के चुनावी रेस में शामिल होने के बाद से अरब मुस्लिम वोटरों में एक उम्मीद जगी थी, कि इजराइल को सख्त संदेश भेजा जाएगा, लेकिन कमला हैरिस ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे फिर से उनकी उम्मीदें टूटने लगी हैं।

इस सप्ताह एक टीवी इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया, कि क्या वह किसी मुद्दे पर बाइडेन से अलग राय रखती हैं, तो कमला हैरिस ने जवाब दिया: "ऐसी कोई बात नहीं है जो दिमाग में आती हो।"

अगस्त के डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन के दौरान भी कमला हैरिस चुनाव अभियान की आलोचना की गई थी, जब पार्टी के अधिकारियों ने गाजा में पीड़ा को व्यक्त करने के लिए एक फिलिस्तीनी अमेरिकी वक्ता को मंच पर आने की इजाजत नहीं दी। जोगबी ने कहा, "लोग मानवता के मामूली संकेत की तलाश में हैं, लेकिन कमला हैरिस के चुनाव अभियान से लोगों को ये भी नहीं मिल रहा है और वे एक गलती कर रहे हैं, जिससे उन्हें वोटों की कीमत चुकानी पड़ेगी।"

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मुस्लिम वोटरों का स्विंग स्टेट में कितना प्रभाव?

गाजा में चल रहा युद्ध अमेरिका का असर अमेरिका के आम मतदाताओं पर कुछ खास नहीं है, लेकिन 80 प्रतिशत से ज्यादा अरब मुस्लिम वोटर्स का कहना है, कि गाजा युद्ध उनके वोट को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लेकिन, स्विंग स्टेट्स, जो राष्ट्रपति चुनाव में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं, उनमें मुस्लिम वोटर्स इस तादाद में नहीं हैं, कि वो एक बड़ी भूमिका निभा सकें।

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उदाहरण के लिए, मध्यपश्चिमी स्विंग स्टेट मिशिगन में देश की दूसरी सबसे बड़ी अरब आबादी है। इसमें किसी भी राज्य की तुलना में अरब अमेरिकियों का सबसे बड़ा प्रतिशत भी है। एक करोड़ की आबादी वाले राज्य में लगभग 3 लाख 92 हजार ही अरब मुस्लिम वोटर्स हैं।

और हालिया सर्वेक्षण में इस राज्य में कमला हैरिस को डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर सिर्फ 1.8 प्रतिशत का बढ़त मिलते हुए दिखाया गया है, जो त्रुटि के मार्जिन के भीतर है। सबसे अहम बात ये देखी गई है, कि कई अरब मुस्लिम वोटर्स, जिल स्टीन जैसे तीसरे पक्ष के उम्मीदवार को वोट देने की बात कर रहे हैं, जिनके चुनाव जीतने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन अगर अरब वोटर्स जिल स्टीन को वोट करते हैं, तो डोनाल्ड ट्रंप को जबरदस्त फायदा होगा और कमला हैरिस, मिशिगन को हार सकती हैं।

मिशिगन विश्वविद्यालय में राजनीतिक अध्ययन केंद्र के एक शोध प्रोफेसर माइकल ट्रौगॉट ने कहा, "गाजा की स्थिति ने मिशिगन में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत को मुश्किल बना दिया है।"

एक्सपर्ट्स का मानना है, मिशिगन राज्य में मुस्लिम वोटर्स किसी उम्मीदवार को जिता तो नहीं सकते, लेकिन किसी उम्मीदवार को हराने की शक्ति रखते हैं।

माइकल ट्रौगॉट ने कहा, "चूंकि हम उम्मीद कर रहे हैं, कि मुकाबला काफी कड़ा है, इसलिए अगर राज्य के अरब समुदाय का एक बड़ा हिस्सा चुनाव के दिन घर पर रहता है, तो यह कमला हैरिस को नुकसान पहुंचाएगा।"

लेकिन मिशिगन की सारी अरब अमेरिकी आबादी एक समान ही सोच नहीं रखती है और समुदाय के भीतर इस बात को लेकर कटु मतभेद हैं, कि इसके चुनावी लाभ का सबसे अच्छा उपयोग कैसे किया जाए।

कुछ लोगों का मानना ​​है, कि मिशिगन में कमला हैरिस की हार, भविष्य के उम्मीदवारों को अरब मतदाताओं के प्रभाव को कम आंकने के बारे में चेतावनी देगी। लेकिन, अरब आबादी के भीतर डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक अलग तरह का डर है। इजराइली समर्थक हर हाल में डोनाल्ड ट्रंप की जीत चाहते हैं। रिपब्लिकन पार्टी ने पहले कहा था, कि इजराइल को गाजा में "काम खत्म करना चाहिए" और उसने अमेरिका में हुए फिलिस्तीन समर्थक छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल विदेशी नागरिकों को देश से बाहर निकालने की कसम भी खाई है।

लिहाजा, अरब वोटर्स को इस बात का डर सता रहा है, कि ट्रंप के आने का अंजाम क्या होगा?

जिससे मुस्लिम वोटर तय नहीं कर पा रहे हैं, कि वो वोटों का बहिष्कार कर कमला हैरिस को सबक सिखाएं या वोट नहीं देकर डोनाल्ड ट्रंप का रास्ता आसान बनाएं?

फिलीस्तीनी-अमेरिकियों का मानना है, कि बाइडेन प्रशासन निश्चित तौर पर इजराइल के 'गाजा नरसंहार' को रोकने में नाकाम रहा है, लेकिन हकीकत ये है, कि अगर डोनाल्ड ट्रंप आते हैं, तो हालात का अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है और बेंजामिन नेतन्याहू वो शख्स हैं, जिससे ज्यादा और कोई नहीं चाहता, कि व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हो, क्योंकि यही उनके लिए फिलीस्तीन को नक्शे से मिटाने का टिकट हो सकता है।'

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