जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने की अमेरिकी राष्ट्रपति रीगन की जासूसी
राष्ट्रपति बराक ओबामा के आधिकारिक फोटोग्राफर पीट सुजा ने जारी की थी एक फोटो। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के समय की इस फोटो में रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन थे अंडरकवर एजेेंट।
मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी चुनावों में हैकिंग की वजह से रूस पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन प्रतिबंधों के बाद रूस के 35 राजनयिकों को भी अमेरिका से निकाल दिया है।ओबामा ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन पर आरोप लगाया है कि वह खुद हैकिंग में शामिल थे। पुतिन ने इस तरह के आरोपों को बकवास करार दिया है। पुतिन पर अमेरिका की ओर से जासूसी के आरोप लगना कोई नई बात नहीं है। पहले भी उन पर ऐसे आरोप लगे हैं।

नए नहीं हैं पुतिन पर जासूसी के आरोप
वर्ष 2009 में राष्ट्रपति ओबामा ने पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभाला था तब से ही शायद उन्होंने पुतिन के जरिए रूस पर आक्रामक नीति अपनाने का फैसला कर लिया था। इसी वर्ष ओबामा के अधिकारिक फोटोग्राफर पीट सुजा ने एक फोटो जारी की। वर्ष 1988 में उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पहली बार रूस की यात्रा पर गए थे। सुजा उस समय रीगन के आधिकारिक दल में शामिल थे। उन्होंने मॉस्को के रेड स्क्वायर पर इस फोटोग्राफ को क्लिक किया। फोटो में पुतिन एक साधारण नागरिक की तरह वहां मौजूद थे। पुतिन उस समय रशियन इंटेलीजेंस एजेंसी केजीबी के एजेंट थे। जैसे ही यह फोटो आई मॉस्को का ब्लड प्रेशर हाई हो गया था। पुतिन वर्ष 2009 में रूस के प्रधानमंत्री थे।
रूस ने किया था दावे से इंकार
फोटो के जारी होने के बाद पुतिन के ऑफिस से कहा गया कि ओबामा प्रशासन ने ही इस फोटोग्राफ का जारी करने की मंजूरी दी थी। रूस ने कहा कि फोटो में जो युवक नजर आ रहा है वह पुतिन नहीं हैं लेकिन सुजा अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने अमेरिका के नेशनल पब्लिक रेडियो को बताया कि उन्होंने यह फोटो उस समय खींची जब रीगन और सोवियत संघ के जनरल सेक्रेटरी मिखाइल गोर्बाचेव रेड स्क्वायर का घूम रहे थे। सुजा ने उस समय सीक्रेट सर्विस ऑफिसर के हवाले से दावा किया कि उस समय जितने भी टूरिस्ट्स मौजूद थे वह सभी केजीबी के सदस्य थे। राष्ट्रपति पुतिन के बारे में अगर आपको ज्यादा नहीं मालूम तो आपको बता दें कि राष्ट्रपति पुतिन 16 वर्ष तक रूस के जासूस थे। पुतिन 1975 से 1991 तक ईस्ट जर्मनी में रशियन इंटेलीजेंस एजेंसी केजीबी के ऑफिसर बनकर रहे। यहां पर उन्होंने जर्मनी की पुलिस की जासूसी की। इस दौरान पुतिन का काम अमेरिका के लिए अंडरकवर एजेंट्स की भर्ती करना और फिर उन्हें तैयार करके अमेरिका भेजना था। वर्ष 1991 में पुतिन रूस वापस लौटे और तब वह लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक पर थे और उन्होंने एजेंसी छोड़ दी। पढ़ें-अमेरिका ने रूस के 35 राजनयिकों को निकाला












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