US Election: खोला खजाना, युद्ध में नहीं झोंका, फिर भी US की सेना डोनाल्ड ट्रंप का क्यों नहीं कर रही समर्थन?
As the US election approaches, military opinions on presidential candidates Donald Trump and Kamala Harris reveal significant divides. Many retired officers endorse Harris, citing concerns over Trump's respect for milita
Donald Trump News: नवंबर की 5 तारीख को अमेरिका के लोग तय करेंगे, कि उनका अगला राष्ट्रपति कौन होगा। और इन दिनों अमेरिका में चल रहे चुनाव प्रचार में सबसे गर्म बहस का मुद्दा यह है, कि 47वें राष्ट्रपति के रूप में कौन दुनिया की महाशक्ति की बागडोर अपने हाथों में संभालेगा?
क्या 45वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुने जाएंगे या मौजूदा उपराष्ट्रपति कमला हैरिस? दूसरे शब्दों में कहें, तो क्या ट्रंप या कमला हैरिस, अमेरिकी सशस्त्र बलों के अगले सुप्रीम कमांडर बनने के लिए सबसे उपयुक्त हैं, यह एक बड़ा सवाल है।

यह सवाल अमेरिकी सेना के सेवारत और रिटायर्ड कर्मियों से संबंधित है। वे सबसे ज्यादा किसके लिए वोट करने की संभावना रखते हैं?
अमेरिकी सेना में कितने लोग काम करते हैं?
30 जून 2024 तक, अमेरिकी सेना में लगभग 28 लाख सैनिक हैं, जिनमें सेना, नौसेना, मरीन कॉर्प्स, वायु सेना, अंतरिक्ष सेना और तटरक्षक बल में "सक्रिय ड्यूटी" में लगभग 13 लाख जवान शामिल हैं। वहीं, "रिजर्व और राष्ट्रीय रक्षक" में लगभग 738000 सदस्य हैं और सेना के साथ काम करने वाले लगभग 754 000 "सिविलियन" हैं।
वे पूरी दुनिया में तैनात हैं। और यदि वे अपने रजिस्टर्ड निवास के बाहर ड्यूटी पर हैं, तो वो ईमेल, फैक्स, वेब-आधारित पोर्टल या ऐप के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से चुनाव में मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
हालांकि, यह पता लगाना मुश्किल है कि वे किसे वोट देंगे क्योंकि जब तक वे सेवा में हैं, वो सार्वजनिक रूप से अपने राजनीतिक झुकाव के बारे में बात नहीं कर सकते हैं। इसलिए, कोई केवल अनुमान लगा सकता है, और यह अनुमान लगाने का एकमात्र तरीका है, कि अमेरिकी सेना अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के बारे में क्या सोचती है, जो रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों की तरफ से लिखे गये लेख या सार्वजनिक मंचों से कही गई बातों से पता चलता है।
और अगर पूर्व सैन्य अधिकारियों की बातों को समझें, तो कमला हैरिस ओवल ऑफिस पर 'कब्जा' करने की दौड़ में ट्रंप से बहुत आगे दिखाई दे रही हैं।
प्रमुख अमेरिकी अखबारों और पत्रिकाओं में दिग्गजों ने जो लिखा है, या हाल ही में समाचार चैनलों पर जो कहा है, उसका बारीकी से अनुसरण करने पर पता चलता है, कि उनमें से ज्यादातर का मानना है, कि ट्रंप भले ही बार बार दावा कर रहे हों, कि कोई भी सेना को उनसे ज्यादा प्यार नहीं करता है या उनके लिए उनसे ज्यादा किसी ने कुछ नहीं किया है, लेकिन वास्तव में, उन्होंने "सैन्य सेवा, अनुशासन और परंपरा" का अपमान किया है।
रैंडी मैनर, जो रिटायर्ड अमेरिकी सेना के मेजर जनरल हैं, और जो नेशनल सिक्योरिटी लीडर्स फॉर अमेरिका के समूह का हिस्सा हैं, जिसमें 740 से ज्यादा पूर्व सैन्य, सरकारी, राष्ट्रीय सुरक्षा नेता और अन्य लोक सेवक सदस्य हैं, उन्होंने उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को संयुक्त राज्य अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में गर्व से समर्थन करते हुए एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
उन्होंने खुलासा किया है, कि "अमेरिकी सेना सही ढंग से सक्रिय ड्यूटी सेवा सदस्यों को पक्षपातपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों या समर्थन में शामिल होने से रोकती है, इसलिए सैन्य कमांडर और नेशनल सिक्योरिटी में शामिल पूर्व अधिकारियों ने अगले कमांडर इन चीफ के रूप में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का समर्थन करने का नैतिक दायित्व महसूस किया है।"

इस समूह में रिटायर्ड फोर स्टार जनरल लैरी एलिस जैसे हाई रैंक अनुभवी व्यक्ति शामिल हैं, जिन्होंने 10 राष्ट्रपतियों के शासनकाल में काम किया है, उनके सहयोगी, जनरल लॉयड डब्ल्यू न्यूटन, एडमिरल स्टीव एबॉट, राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के पूर्व सलाहकार, और जनरल माइकल वी हेडन, जिन्होंने उनके (राष्ट्रपति बुश) अधीन सीआईए का नेतृत्व किया, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को "राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए खतरा" बताया है।
इसी तरह, एमएल कैवनॉघ, जिन्होंने हाल ही में अमेरिकी सेना से रिटायर्ड होने के बाद वेस्ट प्वाइंट में मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट की सह-स्थापना की, जहां उन्होंने 25 वर्षों तक काम किया, उनका तर्क है, कि जब ट्रंप राष्ट्रपति थे, तो उन्होंने एक प्रोफेशनल सेना की अवधारणा को नष्ट कर दिया। वो खुद को किसी पार्टी या राष्ट्रपति के प्रति वफादार नहीं है, बल्कि संविधान को बनाए रखने की शपथ के माध्यम से सभी लोगों के प्रति वफादार बताते हैं।
इन पूर्व सैन्य अधिकारियों ने डोनाल्ड ट्रंप पर सैन्य-नागरिक संबंधों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।
ये सैन्य दिग्गज इस विचारधारा से सहमत लगते हैं, कि ट्रंप सच्चे लोकतांत्रिक नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में उत्तर कोरिया के किम जोंग-उन जैसे तानाशाहों के साथ हाथ मिलाया था, नाटो सहयोगियों को नीचा दिखाया था, टैरिफ प्रतिबंध लगाकर देश की आर्थिक वृद्धि को नुकसान पहुंचाया था और देश की चुनावी प्रणाली की अखंडता को चुनौती दी थी।
क्या पूर्व सैन्य अधिकारियों के ये आरोप सही हैं?
हालांकि, एक और विचारधारा है, जो ऐसा नहीं सोचती। लॉरेन थॉम्पसन जैसे वरिष्ठ विश्लेषक लिखते हैं, "उनसे प्यार करें या उनसे नफरत करें, राष्ट्रपति ट्रंप की रक्षा विरासत बहुत गहरी है।" उनके लिए, ट्रंप दशकों में पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका को नए विदेशी सैन्य अभियानों के लिए प्रतिबद्ध नहीं किया। उन्होंने सेना को चार सालों तक शांत रहने दिया और किसी भी युद्ध में नहीं झोंका।
लॉरेन थॉम्पसन का मानना है, कि ट्रंप वो पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अमेरिकी सैन्य तैयारियों के केन्द्र में चीन को रखा और बीजिंग की चुनौतियों का सामना करने की जरूरतों को ध्यान में रखने हुए उस डिजाइन के हथियारों को सेना में शामिल करने पर फोकस रखा।

उन्होंने कहा, कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी रणनीतिक परमाणु बलों के मजबूत आधुनिकीकरण का आह्वान किया था। थॉम्पसन का तर्क है, "शीत युद्ध के न्यूक्लियर ट्रायड के सभी तीन चरण- समुद्र में मिसाइलें, जमीन पर मिसाइलें और लंबी दूरी के बमवर्षक- खत्म हो रहे थे, और ट्रंप ने शक्ति के माध्यम से शांति के लिए रीगन दर्शन को अपनाया। उनके प्रशासन ने ओबामा से विरासत में मिली आधुनिकीकरण योजना को पूरी तरह से वित्तपोषित किया। उन्होंने शीत युद्ध समाप्त होने के बाद से परमाणु कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के पहले बड़े आधुनिकीकरण को भी फंड दिया।"
इसके अलावा व्हाइट हाउस के दस्तावेजों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने न सिर्फ अमेरिकी सेना का पुनर्निर्माण किया, बल्कि सशस्त्र बलों की छठी शाखा - संयुक्त राज्य अंतरिक्ष बल, का भी गठन किया, जो 1947 के बाद पहली नई शाखा थी।
वो ट्रंप ही थे जिन्होंने साइबर कमांड को एक प्रमुख युद्ध-लड़ने वाली कमांड में बदलकर और साइबर ऑपरेशंस पर बोझिल प्रक्रियात्मक प्रतिबंधों को कम करके यूएस साइबर डिफेंस को एडवांस किया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए रक्षा खर्च में 2.2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का फंड जारी किया और उन्होंने अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को सशक्त बनाया, 1950 के दशक के बाद से देश की विनिर्माण और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के पहले पूरे-सरकारी मूल्यांकन का निर्देशन किया। और इसके अलावा, वो डोनाल्ड ट्रंप ही थे, जिन्होंने सैन्य कर्मियों के परिवारों के लिए थ्री स्केल वेतन वृद्धि को मंजूरी दी, जो एक दशक में सबसे ज्यादा सैलर में इजाफा था।
कुल मिलाकर, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि डेमोक्रेट और उनके समर्थक, जिनमें सैन्य दिग्गज भी शामिल हैं, ट्रंप को चाहे जितना नापसंद करें, लेकिन तथ्य यह है कि बाइडेन शासन ने कई सैन्य नीतियों को अपनाया है, जो ट्रंप की विरासत को आगे बढ़ाता है।
लेकिन फिर, राजनीति में, धारणा, जरूरी नहीं कि वास्तविकता, मायने रखती है, और ये धारणाएं अनिवार्य रूप से देश के प्रमुख मीडिया को नियंत्रित करने या उसका उपयोग करने वाले अभिजात वर्ग की तरफ से बनाई जाती है, जहां ट्रंप, कमला हैरिस से पिछड़ रहे हैं।












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