UN में अमेरिकी राजदूत अगले हफ्ते जाएंगी Taiwan, भड़का चीन बोला- चुकानी होगी भारी कीमत

US Diplomat Taiwan Visit: ताइपे। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत केली क्राफ्ट अगले सप्ताह ताइवान के दौरे पर जा रही हैं। जहां वह ताइवान के प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेंगी। ताइवान की सरकार और संयुक्तर राष्ट्र में अमेरिकी दूतावास ने इसकी जानकारी दी है। अमेरिका के इस कदम से चीन भड़का हुआ है। चीन ने अमेरिका के इस कदम पर कहा है कि वे आग से खेल रहे हैं।

अमेरिकी प्रतिनिधि की यात्रा से भड़का चीन

अमेरिकी प्रतिनिधि की यात्रा से भड़का चीन

चीन जो कि स्वायत्ततशासी ताइवान द्वीप को अपना क्षेत्र बताता है, ट्रम्प प्रशासन द्वारा ताइवान से नजदीकी बढ़ाने से भड़का हुआ है। इसके पहले भी अमेरिकी अधिकारियों की ताइवान यात्रा को लेकर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी। वहीं अमेरिका लगातार ताइवान के साथ अपने संबंधों को बढ़ा रहा है। पिछले साल 40 साल पर कोई अमेरिकी मंत्री ताइवान पहुंचा था जिसे संबंधों में नए आयाम की तरह देखा गया था। इसके बाद चीन ने ताइवान पर अपना दबाव बढ़ाने के लिए कई भड़काऊ कार्रवाई की थी।

पिछले साल अगस्त और सितम्बर में अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री एलेक्स जार और उपमंत्री कीथ क्रैच ताइवान पहुंचे थे तब चीन ने अपने फाइटर जेट ताइवान जलडमरू मध्य में भेज दिए थे। इसके बाद ताइवान ने भी चीनी जेट्स के जवाब में अपने जेट भेजे थे और सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिया था।

अब एक बार फिर अमेरिका की प्रतिनिधि इस द्वीप पर पहुंच रही हैं। वह द्विवसीय यात्रा के तहत 13 से 15 जनवरी तक ताइवान में रहेंगी। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन ने गुरुवार को बताया कि 'अपनी इस यात्रा के दौरान राजदूत ताइवान के अंतरराष्ट्रीय स्थान के लिए मजबूत और पहले से जारी समर्थन को और सुदृढ़ करेंगी जो कि वन चाइना नीति के तहत ताइवान रिलेशन एक्ट, अमेरिका-पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के द्वारा तीन संयुक्त विज्ञप्तियों और ताइवान को दिए गए छह आश्वासनों द्वारा निर्देशित है।'

अमेरिका को चुकानी होगी भारी कीमत- चीन

अमेरिका को चुकानी होगी भारी कीमत- चीन

ताइवान को चीन अपना हिस्सा मानता है और किसी भी देश द्वारा इसके साथ कूटनीतिक संबंध रखने का विरोध रखता है। दूसरे देशों की तरह अमेरिका ने भी वन चाइना नीति को मान्यता दी है और ताइवान से उसके औपचारिक सम्बन्ध नहीं हैं लेकिन अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सपोर्टर है और ताइवान को सैन्य हथियार भी पहुंचाता है। अमेरिका ऐसा ताइवान रिलेशन एक्ट 1979 के तहत करता है। इस एक्ट के तहत अमेरिका ताइवान को किसी खतरे से बचाने के लिए उसे सहायता प्रदान करेगा।

चीन ने इस प्रस्तावित यात्रा की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र में चीनी मिशन ने कहा हम अमेरिका को याद दिलाना चाहते हैं कि जो आग से खेलता है वह खुद ही जल जाता है। अमेरिका को अपने गलत कामों के चलते इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

आगे कहा गया है "चीन मजबूती से संयुक्त राज्य अमेरिका से आग्रह करता है कि वह अपने पागलपन भरे उकसावे को रोके और चीन-अमेरिका के रिश्तों और संयुक्त राष्ट्र में दोनों के सहयोग के लिए नई कठिनाइयाँ पैदा करना बंद करे।"

ताइवान ने क्राफ्ट को कहा पक्की दोस्त

ताइवान ने क्राफ्ट को कहा पक्की दोस्त

यात्रा को लेकर ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा है "हमारी पक्की दोस्त केली क्राफ्ट अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति साइ इंग-वेन और विदेश मंत्री जोसेफ वू से मुलाकात करेंगी।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन की प्रमुख का इस यात्रा पर जाने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ताइवान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं है। क्योंकि चीन इसका विरोध करता है और कहता है कि ताइवान एक अलग देश नहीं बल्कि उसका ही एक प्रदेश है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ताइवान के लिए बोलने का हक केवल बीजिंग को है।

ताइवान का कहता है कि यह अधिकार वहां की चुनी हुई सरकार को है न कि बीजिंग को। ताइवान लंबे समय से अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए प्रयास कर रहा है लेकिन 2016 में राष्ट्रपति साइ इंग-वेन के सत्ता में आने के बाद इसमें तेजी आई है। वेन स्वतंत्र नीतियों को लेकर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यही वजह है कि चीन उनसे नाराज रहता है।

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