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चीन से तनाव के बीच अमेरिकी रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन आज आ रहे हैं भारत, जानिए बातचीत के 5 बड़े एजेंडे

अमेरिका के रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन आज भारत दौरे पर आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधित कई मुद्दों पर बातचीत होगी।

नई दिल्ली/वाशिंगटन: कई गुटों में बंट चुकी दुनिया और बड़े देशों के बीच चरम पर पहुंच चुके तनाव के बीच अमेरिका के रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन का आज से भारत दौरा शुरू हो रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री अगले तीन दिनों तक भारत दौरे पर रहेंगे और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत होगी। अमेरिका और भारत के रक्षामंत्री के बीच कई एजेंडों पर बातचीत होगी। ऐसे में आइये जानते हैं वो पांच बड़े मुद्दे जिनपर दोनों देश या तो सहमत हैं या फिर अमेरिकी रक्षामंत्री के इस दौरे में सहमति जता सकते हैं।

चीन को सख्त संदेश

चीन को सख्त संदेश

आज शाम अमेरिका के राष्ट्रपति लॉयड ऑस्टिन भारत में होंगे और वो सीधे जापान से आ रहे हैं। जापान में अपने समकक्ष से बात करते वक्त अमेरिकी रक्षामंत्री ने चीन को विश्व के लिए खतरा बताया था और उसकी विस्तारवादी नीति के लिए आलोचना की थी। इससे पहले क्वाड की भी मीटिंग हो चुकी है, लिहाजा भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के दौरान अमेरिकी रक्षामंत्री चीन का मुद्दा उठाएंगे। ये तय है कि भारत और अमेरिका सामूहिक तौर पर चीन के खिलाफ बयान जारी करेंगे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारत दौरे में अमेरिकी रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा भारत के एनएसए अजित डोवल और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान चीन की आक्रामक और विस्तारवादी नीति और हिंद प्रशांत क्षेत्र में उसे रोकने के लिए दोनों देशों के बीच गहन मंथन हो सकती है। क्वाड की बैठक के दौरान भी भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर गंभीर बातचीत हुई थी।

अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया

अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया

भारत और अमेरिका के रक्षामंत्रियों के बीच मुलाकात और बातचीत के दौरान अफगानिस्तान एक बड़ा मुद्दा होगा। अमेरिका की मदद से भारत उस बातचीत कमेटी में शामिल हो पाया है, जो अफगानिस्तान में शांति के लिए रास्ता खोजेगी। चूंकी उस टीम में रूस, चीन और पाकिस्तान भी है, लिहाजा अमेरिका के लिए भारत बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। अमेरिकन मीडिया ने दावा किया है कि अफगानिस्तान से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया में 6 महीने का इजाफा कर दिया गया है, लिहाजा दोनों देशों के रक्षामंत्री अफगानिस्तान के मसले पर किसी सामूहिक फैसले की ओर बढ़ सकते हैं। भारत की शांति के लिए अफगानिस्तान की शांति बेहद जरूरी है, वहीं पाकिस्तान लगातार आतंकी संगठन तालिबान को सपोर्ट कर रहा है, लिहाजा पाकिस्तान और तालिबान को खामोश रखने के लिए भारत को अमेरिकी मदद की जरूरत है।

क्वाड पर रणनीतिक बातचीत

क्वाड पर रणनीतिक बातचीत

पिछले हफ्ते क्वाड की वर्चुअल बैठक में भारत और अमेरिका के बीच कोविड वैक्सीन डिप्लोमेसी के अलावा कई और मुद्दों पर बातचीत हुई है। जिसमें इंडो-पैसिफिक रीजन में स्वतंत्र व्यापार और एशिया में शांति रखने जैसे मुद्दे हैं। लिहाजा दोनों देशों के बीच क्वाड में रखे गये एजेंडो को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इसे लेकर रणनीतिक बैठक होगी। भारतीय रक्षा मंत्री से मुलाकात के दौकान अमेरिकन रक्षामंत्री से हिंद महासागर और साउथ चायना सी में स्वंतत्र बढ़ावा देने के लिए भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।

एस-400 मिसाइल रक्षा डील

एस-400 मिसाइल रक्षा डील

माना जा रहा है कि भारतीय रक्षामंत्री से मुलाकात के दौरान अमेरिका, भारत और रूस के बीच हथियार समझौते का मुद्दा उठा सकता है। भारत और रूस के बीच एस-400 मिसाइल सिस्टम को लेकर एग्रीमेंट है और इस साल अंत तक रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम का भारत पहुंचना भी शुरू हो जाएगा। अमेरिका ने रूस पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं और अमेरिकन कानून के मुताबिक अमेरिका का सहयोगी देश रूस से हथियार समझौता नहीं कर सकता है, लिहाजा माना जा रहा है कि अमेरिकन रक्षामंत्री भारत के सामने एस-400 मिसाइल सिस्टम को लेकर अपनी चिंता जताएंगे। हालांकि भारत पहले ही कह चुका है कि एक संप्रभु देश होने के नाते भारत किसी भी देश के साथ हथियार समझौता करने के लिए स्वतंत्र है।

विश्व की सुरक्षा

विश्व की सुरक्षा

एशिया में चीन को सिर्फ भारत ही चुनौती दे सकता है, लिहाजा अमेरिका के लिए एशिया में भारत और जापान ही दो सबसे बड़े पार्टनर हैं। हालिया समय में चीन की वजह से शांति भंग हुई है, लिहाजा भारत और अमेरिका के बीच वैश्किक शांति कैसे कायम रखी जा सकती है, इसे लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। जिसमें पाकिस्तान का भी जिक्र आएगा। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति कई बार पाकिस्तान को आतंकियों को पालने के लिए आलोचना कर चुके हैं और भारत एक बार फिर से अमेरिका के नये प्रशासन के सामने पाकिस्तान का आतंक प्रेम और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाली हिंसा का मुद्दा उठा सकता है।

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