ऑस्ट्रेलिया ग्रुप में शामिल होने पर अमेरिका ने भारत को दी बधाई, कहा- साथ मिलकर करेंगे काम
वॉशिंगटन। मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम (MTCR) और वासेनार अरेंजमेंट (WA) की सदस्यता हासिल करने के बाद भारत 19 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया ग्रुप में शामिल हुआ था, इसको लेकर अमेरिका ने नई दिल्ली को बधाई दी है। अमेरिका ने मंगलवार को कहा, भारत की यह नई उपलब्धि सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार, संवेदनशील वस्तुओं और टेक्नोलॉजी के व्यापार को रोकने की वचनबद्धता को दर्शाता है।

क्या कहा अमेरिका ने?
ऑस्ट्रेलिया ग्रुप का नया मेंबर बनने के लिए अमेरिका ने भारत को बधाई देते हुए कहा है कि केमिकल और बायॉलोजिकल हथियार रोकने की कोशिश करता है, जो अब 43 सदस्य के रूप में जाना जाएगा। अमेरिका ने कहा, भारत एक मूल्यवान अप्रसार (नॉन-प्रोलिफिरेशन) साथी है। अमेरिका ने आगे कहा कि हम इस क्षेत्र में भारत के साथ काम करते रहेंगे।

क्यो अहम है ऑस्ट्रेलिया ग्रुप?
भारत को ऑस्ट्रेलिया ग्रुप में सदस्यता मिलना इसलिए भी काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि एनएसजी में भारत की दावेदारी को दुनिया के तकरीबन सभी बड़े देश को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन चीन पाकिस्तान के इशारे पर लगातार भारत की दावेदारी पर रोड़ा अटकाता रहा है। चीन इस बात को मुद्दा बनाता रहा है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है, ऐसे में बगैर एनपीटी पर हस्ताक्षर किए भारत को इसकी सदस्यता नहीं दी जा सकती है, लिहाजा इस क्लब में पाकिस्तान को शामिल करना चाहिए। लेकिन एजी में शामिल होने के बाद भारत अपनी दावदारी को और भी मजबूती से आगे रख पाएगा।

क्या है ऑस्ट्रेलिया ग्रुप
ऑस्ट्रेलिया समूह विभिन्न देशों का एक अनौपचारिक समूह है (इसमें अब यूरोपीय आयोग भी जुड़ गया है।) जिसकी स्थापना 1984 में इराक द्वारा रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के बाद 1985 में की गयी थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को उन निर्यातों की पहचान करने में मदद करना है जिन्हे नियंत्रित किये जाने की आवश्यकता है ताकि रासायनिक और जैविक हथियारों के प्रसार को रोका जा सके। इस संगठन का यह नाम 'ऑस्ट्रेलिया ग्रुप' इसलिए हैं, क्योंकि ऑस्ट्रलिया ने यह समूह बनाने के लिए पहल की थी। ऑस्ट्रेलिया ही इस संगठन के सचिवालय का प्रबंधन देखता है।












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