चीन-उत्तर कोरिया का हाइपरसोनिक स्पेस WAR, अमेरिका-जापान कर पाएगा तानाशाहों पर पलटवार?
इस वक्त चीन, उत्तर कोरिया और रूस...लगातार हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी को मजबूत करने की कोशिश में दिन रात लगे रहते हैं और उत्तर कोरिया ने पिछले हफ्ते फिर से हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण का दावा किया है।
वॉशिंगटन, जनवरी 07: दुनिया में अगर इस वक्त सनकी तानाशाहों की लिस्ट बने, तो टॉप पर चीन के तानाशाह शी जिनपिंग और नंबर दो पर उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को ही रखा जाएगा। इन दोनों तानाशाहों ने अपने 'पागलपन' भरे फैसलों से पूरी दुनिया को दहशत में डाल रखा है, खासकर हाइपरसोनिक हथियारों को लेकर ये दोनों देश, जिस तरह से धरती से लेकर अंतरिक्ष तक प्रक्षेपण कर रहे हैं, वो तबाही लाने के लिए काफी है। लेकिन, अब अमेरिका और जापान ने इन दोनों तानाशाहों के पर कतरने की मंशा के साथ एक महाप्लान बनाया है, लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या ये दोनों देश...चीन और उत्तर कोरिया को रोक पाएंगे?

अमेरिका-जापान में समझौता
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को कहा कि. अमेरिका और जापान उभरते रक्षा खतरों का मुकाबला करने के लिए एक नए रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसमें हाइपरसोनिक्स और अंतरिक्ष-आधारित क्षमताएं शामिल करना लक्ष्य होगा। संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के विदेश और रक्षा मंत्रियों ने हाइपरसोनिक हथियारों से बढ़ने वाले खतरों को लेकर नये रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की है और दोनों देशों के बीच पंचवर्षीय सुरक्षा समझौता हुआ है। जिसका मकसद साफ तौर पर चीन और उत्तर कोरिया को लेकर मजबूत रणनीति और डिफेंस तैयार करनी है।

उत्तर कोरिया पर सीधा निशाना
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ऐलान करते हुए कहा कि, ''यूएस-जापान गठबंधन को न केवल हमारे पास मौजूदा उपकरणों को मजबूत करना चाहिए, बल्कि नए अत्याधुनिक उपकरण भी विकसित करने चाहिए"। यूक्रेन के खिलाफ रूस के सैन्य निर्माण, ताइवान और उत्तर कोरिया के नवीनतम मिसाइल प्रक्षेपण और बीजिंग की "उत्तेजक" कार्रवाइयों को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री ने जापान के साथ सहयोग को और भी ज्यादा बढ़ाने की घोषणा की है। अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से साफ झलक रहा है कि, उत्तर कोरिया द्वारा फिर से हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण करना अमेरिका के लिए चिंता की बात है।

अमेरिका का सीधा ऐलान
इस वक्त चीन, उत्तर कोरिया और रूस...लगातार हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी को मजबूत करने की कोशिश में दिन रात लगे रहते हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल जुलाई और अगस्त के महीने में चीन ने अंतरिक्ष में दो हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण भी किया था। हालांकि, चीन का निशाना सिर्फ 27 किलोमीटर से चूक गया था, लेकिन रिपोर्ट में पांच जानकारों के हवाले से कहा गया है कि, चीन ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी हासिल कर ली है और निशाने पर अमेरिका है और ताइवान के लिए चीन अपने विध्वंसक हथियार का इस्तेमाल भी कर सकता है। लिहाजा, इन चुनौतियों को देखते हुए एंटनी ब्लिंकन ने सीधा ऐलान करते हुए कहा कि, ''अमेरिका और जापान का गठबंधन दुनिया के लिए राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और तकनीकी चुनौतियां पैदा करने वालों के खिलाफ है''।

अमेरिका-जापान की चिंता
अमेरिका और जापान ने पूर्वी चीन सागर में चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है, जहां चीन का जापान के साथ सेनकाकू द्वीपों को लेकर विवाद है और चीन के "गैरकानूनी समुद्री दावों, सैन्यीकरण और दक्षिण चीन सागर में जबरदस्ती गतिविधियों" पर दोनों देशों ने अपनी "कड़ी आपत्ति" दोहराई है। बीजिंग अपनी तथाकथित नौ-डैश लाइन के तहत लगभग पूरे समुद्र पर दावा करता है जिसे 2016 में फिलीपींस द्वारा लाए गए एक मामले के बाद एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने खारिज कर दिया था। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन वहां पर कृत्रिम द्वीपों और सैन्य चौकियों का निर्माण कर रहा है, साथ ही साथ अपने तट रक्षक को भी तैनात कर रहा है, जो सीधे तौर पर जापान के लिए खतरा है।

हाइपरसोनिक मिसाइल का खतरा
बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि, अमेरिका और जापान एक नए रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसे हाइपरसोनिक और अंतरिक्ष-आधारित हथियार जैसे उभरते खतरों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है। आपको बता दें कि, पिछले हफ्ते ही उत्तर कोरिया ने हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण करने का दावा किया था और ये दूसरा मौका है, जब उत्तर कोरिया ने हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है। रूस, चीन और अमेरिका भी हाइपरसोनिक हथियार बनाने की दौड़ में हैं और अमेरिका के पास फिलहाल ऐसी टेक्नोलॉजी नहीं है, जिससे वो चीनी मिसाइलों को काउंटर कर सके।












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