जापान ने चीन को घेरने के लिए अमेरिका को दे दी पूरी छूट, इस खास जगह पर घातक मिसाइल तैनात करेगा US
ओकिनावा को अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी मुख्य वजह ओकिनावा की सामरिक स्थिति है। ओकानावा, ताइवान के बेहद करीब स्थित है। ओकिनावा में 25 हजार से भी अधिक अमेरिकी सैनिक हैं।

Image: oneindia
चीन की महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाने के लिए जापान और अमेरिका और करीब आ गए हैं। दोनों देशों ने ऐलान किया है कि वे अपने सैन्य रिश्तों को और मजबूत करेंगे। इसके साथ ही अमेरिकी सेना जापान के भीतर अपनी भूमिका को और मजबूत बनाने जा रही है। इसके लिए अमेरिका जापान में उन्नत खुफिया क्षमता और एंटी शिप मिसाइलों को फायर करने वाली एक मरीन यूनिट को वहां तैनात करने जा रहा है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने सीएनएन को इसकी जानकारी दी है।

12वीं मरीन रेजिमेंट को किया जाएगा रिडिजायन
जापान की राजधानी टोक्यो में अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, जापानी विदेश मंत्री हयाशी योशिमासा और जापानी रक्षा मंत्री हमादा यासुकाज़ू के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि 12वीं मरीन रेजिमेंट को 12 वीं मरीन लिटोरल रेजिमेंट के रूप में फिर से डिजायन किया जाएगा। लॉयड ने कहा, "हम एक आर्टिलरी रेजिमेंट को एक ऐसे संगठन के साथ बदल रहे हैं, जो अधिक घातक, अधिक चुस्त, अधिक शक्तिशाली है।" उन्होंने कहा कि इस कदम से इलाके में प्रतिरोध बढ़ेगा जिससे जापान और जापानी लोगों की अधिक प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सकेगी।

ओकिनावा द्वीप पर बनेगा मरीन यूनिट
जानकारों के मुताबिक अमेरिका और जापान की ये संयुक्त घोषणा चीन को एक मजबूत संदेश है। इसके साथ-साथ यह दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया संबंधों को और मजबूत बनाने का कदम है। दोनों के बीच सैन्य रिश्तों को मजबूत करने की घोषणा तब की गई है जब जापान के पीएम फुमियो किशिदा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की मुलाकात होने वाली है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि नया डिजायन हुआ मरीन यूनिट को जापान के ओकिनावा बेस पर तैनात किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इसका उद्देश्य एक स्टैंड-इन फोर्स तैयार करना है जो जापान की रक्षा करने और किसी आपातकालीन स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने सक्षम होगा।

सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है ओकिनावा
ओकिनावा को प्रशांत इलाके में अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी मुख्य वजह ओकिनावा की सामरिक स्थिति है। ओकानावा, ताइवान के बेहद करीब स्थित है। दुनिया जानती है कि ताइवान, चीन की दुखती रग है। ओकिनावा में 25 हजार से भी अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इसके साथ-साथ यहां लगभग 25 अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जापान में लगभग 70 फीसदी अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान ओकिनावा में ही हैं। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, ओकिनावा प्रान्त के भीतर योनागुनी नाम का एक द्वीप है जो कि ताइवान से महज 70 मील की दूरी पर स्थित है।

खाड़ी देशों को छोड़ हिंद-प्रशांत पर US का ध्यान
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि हाल के वर्षों में यह अमेरिका द्वारा उठाया गया सबसे महत्वपूर्ण सैन्य बदलाव है। यह दर्शाता है कि अब अमेरिका मिडिल ईस्ट से ध्यान हटाकर अब हिंद-प्रशांत इलाके में लगा रहा है। यह परिवर्तन एक प्रमुख वाशिंगटन थिंक टैंक के वॉरगेम के रूप में आता है जिसमें यह अनुमान लगाया गया था कि ओकिनावा बेस ही वह जगह है जो चीन से जंग में अमेरिकी सेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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