VIDEO: भारत के 'करीबी दोस्त' को बड़ी कामयाबी, हाईटेक हेलीकॉप्टर को बिना पायलट उड़ाया

नई दिल्ली: दुनिया के सभी देश अपनी-अपनी सेनाओं को हाईटेक बनाने में जुटे हुए हैं। इसी क्रम में भारत के 'करीबी दोस्त' अमेरिका ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है, जहां पहली बार हाईटेक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर ने बिना पायलट के उड़ान भरी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। (वीडियो-नीचे, तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

अत्याधुनिक सिस्टम सूट का इस्तेमाल

अत्याधुनिक सिस्टम सूट का इस्तेमाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 फरवरी को ब्लैक हॉक ने करीब 30 मिनट तक बिना पायलट के उड़ान भरी। इस दौरान लैंडिंग और टेक ऑफ दोनों आसानी से हुआ। इस टेस्ट फ्लाइट के लिए अत्याधुनिक सिस्टम सूट का इस्तेमाल किया गया। ये नया कारनामा अमेरिकी वायुसेना की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी ने लॉकहीड मार्टिन की सहायक कंपनी सिकोरस्की की मदद से किया। इसमें UH-60A ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को अलग तरह से मॉडिफाई किया गया था।

40 हजार फीट की ऊंचाई तक गया

40 हजार फीट की ऊंचाई तक गया

वहीं 5 फरवरी को पहली परीक्षण उड़ान के दौरान ब्लैक हॉक 30 मिनट तक हवा में रहा, साथ ही उसने करीब 40 हजार फीट की ऊंचाई पर 115-125 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी। सोमवार को उसी हेलीकॉप्टर ने फिर से एक टेस्ट फ्लाइट को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ये पूरा प्रोग्राम एलियास ( Alias) नाम के प्रोजेक्ट के तहत चलाया जा रहा है। जिसका टेस्ट केंटकी में फोर्ट कैंपबेल के बाहर हुआ था।

हेलीकॉप्टर की टेस्टिंग के तीन अहम कारण

हेलीकॉप्टर की टेस्टिंग के तीन अहम कारण

एलियास के प्रोग्राम मैनेजर स्टुअर्ट यंग ने पॉपुलर साइंस को बताया कि इस तरह की बिना पायलट वाली उड़ान के तीन मुख्य लक्ष्य हैं। इसमें पहला सुरक्षा है, जो आपदा के वक्त काम आएगा, जबकि दूसरा इन-फ्लाइट मदद। इसके अलावा तीसरा सबसे अहम कारण है- लागत में कमी। इस प्रोजेक्ट के तहत हेलीकॉप्टर्स को बिना पायलट उड़ने योग्य बनाया जा रहा है। इसमें दिन के अलावा रात की उड़ान की भी टेस्टिंग की जाएगी।

क्या है खासियत?

क्या है खासियत?

आपको बता दें कि ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर अमेरिका के सबसे हाईटेक हेलीकॉप्टर्स में से एक हैं, जिसका इस्तेमाल अफगानिस्तान, ईराक, ईरान समेत कई देशों में किया गया था। ये हेलीकॉप्टर 357 किमी प्रति घंटे की टॉप स्पीड से उड़ान भर सकता है, जबकि इसकी ऑपरेशनल रेंज 583 किलोमीटर की है। वैसे इसकी लागत बहुत ज्यादा है। अगर किसी देश को ये हेलीकॉप्टर लेना है, तो उसे एक यूनिट के लिए 2.13 करोड़ डॉलर का भुगतान करना होगा। इसमें 1200 किलो कार्गो और 11 सैनिक आसानी से उड़ान भर सकते हैं।

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