ब्राह्मणों को निशाना बनाते हुए अमेरिकी प्रोफेसर ने भारत को बताया गंदा देश, हो रही आलोचना
वाशिंगटन, 12 अप्रैल: दुनिया के ज्यादातर देशों में भारतीय लोग बसते हैं। देश का नाम ऊंचा करने के साथ-साथ भारतीय दूसरे देशों को भी काफी आगे ले जाने का काम कर रहे हैं। एक तरफ जहां भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर आशीष झा को व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति जो बाइडेन के कोविड-19 सर्जन जनरल के पद पर नियुक्त किया। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी कानून की प्रोफेसर ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान भारतीय प्रवासियों (Indian immigrants) की ऐसा आलोचना की, जिसको सुनकर के बाद किसी भी भारतीय को गुस्सा आना लाजमी है। इस वाीडियो के वायरल होने के बाद पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर को सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा।

कानून की प्रोफेसर एमी वैक्स का वीडियो वायरल
अमेरिका में पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी की एक कानून की प्रोफेसर एमी वैक्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिनका टकर कार्लसन टॉक शो में अप्रवासियों और अन्य जातियों के लोगों के बारे में बोलते हुए दो वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो में वैक्स को अप्रवासी भारतीयों के बारे में बोलते हुए देखा जा सकता है। जिसमें वो कह रही है कि 'यहां समस्या है। उन्हें (भारत की ब्राह्मण महिलाओं को) सिखाया जाता है कि वे हर किसी से बेहतर हैं, क्योंकि वे ब्राह्मण कुलीन हैं और फिर भी किसी न किसी स्तर पर उनका देश गंदा है।'

भारतीय डॉक्टरों की भी आलोचना की
वहीं वैक्स ने एशियाई और दक्षिण एशियाई भारतीय डॉक्टरों की भी आलोचना की। दूसरी वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि कैसे अश्वेत और एशियाई लोग अपनी "बाहरी उपलब्धियों और योगदान" के लिए पश्चिमी लोगों के खिलाफ "नाराजगी, शर्म और ईर्ष्या" रखते हैं। उनके इस अपमानजनक इंटरव्यू ने लोगों को नाराज कर दिया। प्रोफेसर एमी वैक्स की भड़काऊ टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नेटिजेंस ने एमी वैक्स को जमकर खरी खोटी सुनाई। कुछ ने यह भी कहा कि कैसे एक कॉलेज के प्रोफेसर के इस तरह के विचार घृणा अपराध को बढ़ाने का कारण हैं।

पहले भी दे चुकीं ऐसे बयान
बता दें कि एमी वैक्स कई दफा ऐसे बयानों के जरिए लोगों को भड़काने का काम कर चुकी हैं। यहां तक उन्होंने काले रंग के छात्रों की पढ़ाई की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अमेरिका उस वक्त बेहतर होगा, जब एशिया से कम संख्या में लोग यहां आएंगे। हालांकि उनकी यूनिवर्सिटी ने पहले भी उनके बयानों की निंदा की है।












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