भारत के नेतृत्व वाले वैश्विक गठबंधन ISA में जुड़ा अमेरिका, PM मोदी ने दिया बाइडेन को धन्यवाद
नई दिल्ली। वैश्विक महाशक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) भी अब भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर-गठबंधन (आईएसए) का हिस्सा बन गया है। ऐसा करने वाला अमेरिका 101वां देश है। पृथ्वी की जलवायु स्वच्छ रखने व सौर-ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गठित किए गए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) को दुनियाभर में प्रशंसा मिल रही है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के विशेष दूत जॉन केरी ने इस गठबंधन में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर किए हैं, तो भारत के लिए यह बड़ी अच्छी खबर है।

आईएसए को अब अमेरिका का भी साथ मिला
अमेरिका की आईएसए में एंट्री पर खुशी जताते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को धन्यवाद दिया है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के सदस्य बनने पर कहा, "यह अद्भुत समाचार मिला...@ClimateEnvoy! मैं @POTUS को धन्यवाद देता हूं और @isolaralliance में संयुक्त राज्य अमेरिका का तहे दिल से स्वागत करता हूं। यह हमारे ग्रह के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने की हमारी साझा खोज में गठबंधन को और मजबूत करेगा।"
वहीं, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा- हमें खुशी है कि अब संयुक्त राज्य अमेरिका औपचारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का हिस्सा है, जो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक दूरदर्शी पहल है।

2016 में गठित किया गया था आईएसए
अमेरिकी विशेष राष्ट्रपति के दूत जॉन केरी ने उत्साह जाहिर करते हुए कहा कि, "सौर-उूर्जा वाले दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक उूर्जा जरूरतों के लिए व स्वच्छ जलवायु को बढ़ाने देने लिए आईएसए बहुत जरूरी है। यह लंबे समय से आ रहा है, और अब हम इस अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होकर खुश हैं, जिसे तैयार करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहम भूमिका निभाई।"
बता दें कि, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), पहली बार 2016 में कई देशों के समर्थन से अस्तित्व में आया, जो कि उनके सहयोग के माध्यम से सभी देशों को वैश्विक प्रासंगिकता और सौर-उूर्जा के लाभ प्रदान करने पर जोर देता है। आईएसए के शुभारंभ की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने नवंबर 2015 में - फ्रांस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी -21) के 21 वें सत्र में की थी।

5 साल बाद अमेरिका ने यूं ली एंट्री
5 साल बाद अब अमेरिका ने आईएसए का हिस्सा बनने के लिए ग्लासगो में COP26 जलवायु शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। जहां केरी ने अमेरिकी सदस्यता को सौर ऊर्जा की तेजी की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा, "हम इसकी डिटेल में गए हैं और पाया है कि, यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका हिस्सा बनना गर्व की बात होगी। हम खुश हैं कि, यह वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के अधिक तेजी से परिनियोजन में एक महत्वपूर्ण योगदान होगा। यह विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।"
इससे पहले COP26 में भी, अमेरिका GGI-OSOWOG की संचालन समिति में शामिल हुआ, जिसमें 5 सदस्य शामिल थे- यूएस, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, यूके और भारत- और इन्होंने 80 देशों के लिए वन सन डिक्लेरेशन का समर्थन किया।

101 वां सदस्य देश बना है यूएस
आईएसए के महानिदेशक डॉ अजय माथुर ने कहा, "यूएसए का आईएसए के गठन और उसके दृष्टिकोण का समर्थन करना एक उत्साहजनक कदम है, विशेष रूप से हमारे 101 वें सदस्य राष्ट्र के रूप में आना, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, यह दर्शाता है कि दुनियाभर के देश सौर के आर्थिक और जलवायु कम करने वाले मूल्य को पहचान रहे हैं, साथ ही साथ वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के लिए उत्प्रेरक के रूप में इस ऊर्जा स्रोत की क्षमता का लोहा मान रहे हैं।, "
वहीं, भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आईएसए के 101वें सदस्य के रूप में अमेरिका का स्वागत किया। यादव ने कहा, "यह कदम आईएसए को मजबूत करेगा और दुनिया को ऊर्जा का एक स्वच्छ स्रोत प्रदान करने पर भविष्य की कार्रवाई को बढ़ावा देगा।"

दुनिया में सौर उूर्जा बढ़ेगी, जलवायु स्वच्छ होगी
भारत की अगुवाई वाले इस वैश्विक गठबंधन की खास बात यह है कि, आईएसए लगभग 5 गीगावॉट क्षमता की सौर परियोजना पाइपलाइन का निर्माण व स्थापना कर रहा है। आईएसए के प्रमुख लक्षित बाजारों में सौर प्रौद्योगिकियों के प्रचार और तैनाती को सुविधाजनक बनाने के लिए तत्परता और गतिविधियों को सक्षम करने, जोखिम कम करने और नवीन वित्तपोषण साधनों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। आईएसए के महानिदेशक डॉ अजय माथुर का कहना है कि, "अब हम इस विश्वास को धरातलीय-विकास में बदलने के लिए और भी अधिक प्रतिबद्ध हैं, कि सूर्य की उूर्जा से दुनिया का बहुत भला होगा। हम आशा करते हैं कि, अन्य देश और अर्थव्यवस्थाएं भी इसका अनुसरण करेंगी, और तेजी से, किफायती और प्रभावी जलवायु कार्रवाई को प्राप्त करने के लिए हमारे साथ संरेखित होंगी, साथ ही साथ अपने संबंधित आर्थिक विकास और दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं को भी प्राप्त करेंगी।''












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