इमरान खान को संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठन की लताड़, UNHRC में पाकिस्तान की मौजूदगी असहनीय
नई दिल्ली- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान के रिकॉर्ड को देखते हुए उसकी मौजदगी असहनीय है। यह बात जिनेवा स्थित एनजीओ यूएन वॉच ने कहा है। इसके मुताबिक पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को भेदभाव का शिकार होना पड़ता है, उन्हें सांप्रदायिक हिंसा झेलनी पड़ती है और उनका जबरन धर्मांतरण भी करवाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठन की यह प्रतिक्रिया इसलिए आई है, क्योंकि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर पेरिस में मुस्लिम आतंकवादी के हाथों फ्रेंच टीचर का सिर कलम किए जाने की घटना का समर्थन किया था और कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ईश-निंदा असहनीय है।

दरअसल, कट्टर इस्लाम के खिलाफ सख्त कदम उठाने और पैगंबर मुहम्मद पर कार्टून का समर्थन करने के चलते फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो मुस्लिम बहुल तमाम देशों के निशाने पर हैं। मैक्रों के खिलाफ आग उगलने वालों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान भी शामिल हैं, जिन्होंने कहा है कि मैंक्रों ने 'जानबूझकर मुसलमानों को भड़काया है।' अब इसी के जवाब में यूएन वॉच ने इमरान खान को मानवाधिकार से जुड़े संगठन में पाकिस्तान जैसे देश की मौजदूगी के लिए खूब लताड़ा है।
इमरान खान ने फ्रांस की घटना पर आग उगलते हुए कहा था कि, 'अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ईश निंदा असहनीय है।' इसपर यूएन वॉच ने ट्विटर के जरिए उनपर पलटवार करते हुए कहा है, 'संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में आपकी (पाकिस्तान की) मौजूदगी असहनीय है।' इसके साथ ही एक और ट्वीट में उसने 28 सितंबर को जारी अपना वह बयान शेयर किया है, जिसमें उसने मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान के चुने जाने के खिलाफ अपने विचार रखे थे। गौरतलब है कि अक्टूबर में पाकिस्तान में मानवाधिकार के बेहद खराब रिकॉर्ड होने पर कई ऐक्टिविस्ट ग्रुप के भारी विरोध के बावजूद उसे दोबारा चुन लिया गया था।

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उस दस्तावेज में यूएन वॉच लिखता है कि पाकिस्तान में ईश निंदा कानून धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर क्रिश्चियनों के उत्पीड़न के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उसके अनुसार, 'पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को भेदभाव, सांप्रदायिक हिंसा और जबरन धर्मांतरण का शिकार होना पड़ता है। पांच बच्चों की एक क्रिश्चियन मां आसिया बीबी को ईश निंदा कानून के चलते 8 साल तक मौत के इंतजार में गुजारना पड़ा था, क्योंकि उसका स्थानीय मुस्लिम महिलाओं से एक कप पानी के लिए कुछ विवाद हो गया था। उसका समर्थन करने वाले दो पाकिस्तानी नेताओं की हत्या हो गई थी।'
एनजीओ के मुताबिक पाकिस्तान वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के रिपोर्टर्स सैंस फ्रंटियर्स में 20 फीसदी के साथ सबसे नीचले पायदान पर है। पाकिस्तानी बच्चे कई तरह के हिंसा और उत्पीड़न के शिकार हो रहे हैं, जिनमें खतरनाक बाल मजदूरी, यौन उत्पीड़न और बाल विवाह जैसे मामले शामिल हैं। यूएन चिल्ड्रेन फंड के मुताबिक वह दुनिया में बाल वधू के मामले में 6ठे स्थान पर है और वहां रोजाना 11 बच्चे यौन शोषण के शिकार होते हैं, इनमें 5 साल तक की बच्चियां भी शामिल हैं। जबकि, बच्चों की खरीद-फरोख्त भी वहां की एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है।
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