Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

दासता और नस्लवाद से हुए नुकसान की भरपाई करें सरकारेंः यूएन

दुनियाभर में फैले नस्लवाद और अफ्रीकी मूल के लोगों पर इसके असर के बारे में एक रिपोर्ट पेश करते हुए मिशेल बैचलेट ने कहा कि वित्तीय और अन्य माध्यमों से क्षतिपूर्ति की जानी चाहिए. 2020 में एक श्वेत अमेरिकी पुलिस अफसर द्वारा एक अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या किए जाने के बाद इस अध्ययन की मांग उठी थी.

अध्ययन में एक भी ऐसा मामला नहीं मिला जबकि किसी देश ने अपने बीते वर्षों में किए गए कृत्यों को पूरी तरह से स्वीकार किया हो या अफ्रीकन लोगों पर हुए असर को पूरी तरह से समझा ही हो. ऐसा तब है जबकि कुछ देशों ने माफी मांगी है, कुछ अपील जारी हुई हैं और कुछ स्मारक भी बनाए गए हैं.

un rights boss urges reparations for slavery racism

अमेरिका ने किया रिपोर्ट का स्वागत

बैचलेट ने सिफारिश की है कि विभिन्न देश एक "विस्तृत प्रक्रिया तैयार करें, उसके लागू करें और उसके लिए धन उपलब्ध करवाएं" जो इतिहास में हुए कृत्यों और उनकी वजह से आज तक हो रहे प्रभावों की पूरी सच्चाई उजागर करे. उन्होंने कहा, "इसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी होनी चाहिए."

बैचलेट ने कहा कि यह प्रक्रिया हमारे समाजों के घाव भरने में और खौफनाक अपराधों के लिए न्याय करने में बहुत अहम साबित होगी.

तस्वीरों मेंः नस्ली दंगों का इतिहास

जेनेवा में अमेरिका के उप-राजदूत बेन्जामिन मोएलिंग ने इस 'गहरी और बेबाक' रिपोर्ट का स्वागत किया है. काउंसिल को भेजे एक वीडियो संदेश में मोएलिंग ने कहा, "अमेरिका घर के अंदर और बाहर, दोनों ही जगह इन चुनौतियों को हल कर रहा है. पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ नस्लवादी भेदभाव और पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने के पीछे की वजहों को दूर किया जा रहा है."

दासता और सामाजिक व न्यायिक भेदभाव की क्षतिपूर्ति करने के विचार पर अमेरिका में बहस जारी है.

क्या कहती है रिपोर्ट?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने यह रिपोर्ट विस्तृत अध्ययन के बाद तैयार की है. बैचलेट ने कहा कि उन्होंने पुलिस द्वारा कत्ल किए गए अफ्रीकी मूल के लोगों के परिवारों से मुलाकात की. 340 से ज्यादा लोगों से बातचीत की गई, जिनमें से ज्यादातर अफ्रीकी मूल के थे. विभिन्न देशों और पक्षों से 110 लिखित प्रतिक्रियाएं भी मिलीं.

बैचलेट ने बताया कि इस रिपोर्ट में जाहिर होता है कि अफ्रीकी मूल के लोगों को जिंदगी के हर पहलू में भेदभाव से गुजरना पड़ता है, जिसकी शुरुआत बचपन में ही हो जाती है. उन्होंने कहा, "अफ्रीकी मूल के बच्चों को अक्सर स्कूलों में भेदभाव सहना पड़ता है. उनकी शिक्षा के नतीजे प्रभावित होते हैं और बहुत बार तो कम उम्र से ही उनसे अपराधियों की तरह सलूक किया जाता है."

देखिए, विवादित विज्ञापन

बैचलेट के मुताबिक उनके दफ्तर को कानूनपालकों के हाथों अफ्रीकी मूल के कम से कम 190 लोगों की मौत की सूचना मिली. इनमें से 98 प्रतिशत यूरोप, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में हुईं.

उन्होंने कहा, "बहुत से देशों ने बल प्रयोग को लेकर स्पष्ट और प्रभावशाली कानून नहीं बनाए हैं, जिस कारण इनके उल्लंघन के खतरे बढ़ जाते हैं. साथ ही, कानूनपालक अधिकारियों को मानवाधिकार उल्लंघन और अफ्रीकी मूल के लोगों के खिलाफ अपराधों के लिए सजा भी शायद ही कभी होती है. ढीली-ढाली जांच, शिकायत और जवाबदेही की प्रक्रिया और अफ्रीकी मूल के लोगों के दोषी होने की पूर्व-अवधारणा भी अहम कारक हैं"

रिपोर्टः विवेक कुमार (एएफपी)

Source: DW

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+