UN: क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ 29वां प्रस्ताव, अमेरिका ने किया खिलाफ वोट
वाशिंगटन, 24 जून। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अमेरिका के क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंधों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला है। 193 सदस्यों वाली महासभा में 184 देशों ने निंदा प्रस्ताव के समर्थन में वोट डाला है जबकि तीन सदस्यय अनुपस्थित रहे। वहीं अमेरिका ने निंदा प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया है। अमेरिका के साथ ही इजरायल ने भी इसका विरोध किया है।

अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के विरोध को बरकरार रखते हुए क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंधों को कायम रखा है। जिसकी इस प्रस्ताव में निंदा की गई है।
1992 से पारित हो रहा प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र महासभा 1992 से ही इस प्रस्ताव को हर साल पारित करती है जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का पुरजोर समर्थन हासिल होता रहा है। साल 2020 में कोरोना वायरस के चलते मतदान नहीं हो सका था।
संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर तीन देश, ब्राजील, कोलंबिया और यूक्रेन प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए जबकि चार देश सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, म्यांमार, मोलदोवा और सोमालिया ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
संयुक्त राष्ट्र मिशन में अमेरिका के राजनीतिक समन्यवक रोबनी हंटर ने महासभा को बताया कि बाइडेन प्रशासन ने प्रस्ताव के विरोध में वोट करने का फैसला किया है क्योंकि अमेरिका का मानना है कि ये प्रतिबंध ही वो औजार हैं जो क्यूबा में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की बहाली में अहम हैं और क्यूबा में हमारे नीतिगत प्रयासों का मूल है।
अमेरिका ने किया विरोध
वहीं अमेरिकी प्रतिबंध का विरोध करते हुए महासभा में क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने इसे युद्ध के समान बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने उनके टूरिज्म सेक्टर को झटका देने के लिए आर्थिक और यात्रा प्रतिबंध लगाए जिसके चलते उनके देश को 5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।
रोड्रिगेज ने कहा कि अमेरिका के ये प्रतिबंध ऐसे समय भी जारी हैं जब कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में क्यूबा के लिए जरूरी मेडिकल उपकरण, खाद्य सामग्री जैसी जरूरी चीजें प्राप्त करना भी कठिन चुनौती बना हुआ है।
महासभा का प्रस्ताव अमेरिका के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और प्रतिबंधों को खत्म करने का अधिकारी अमेरिकी कांग्रेस के पास ही है। लेकिन यह प्रस्ताव विश्व जनमत को दर्शाते हैं और क्यूबो को अमेरिका का विरोध करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराता है।












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