क्या यूक्रेन में युद्ध अपराधों के लिए पुतिन पर मुकदमा चलेगा? कौन करेगा पुतिन को गिरफ्तार? जानिए
यूक्रेन युद्ध शुरू करने के लिए पश्चिमी देशों ने सामूहिक रूप से रूस की निंदा की है, और रूस को सबक सिखाने के इरादे से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने मॉस्को को प्रतिबंधों की जाल में बुरी तरह से जकड़ने की कोशिश की है।
मॉस्को/वॉशिंगटन, मार्च 14: यूक्रेन में युद्ध शुरू करने की मांग को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ जंग शुरू करने के आरोप में मुकदमा चलाने की मांग की जा रही है। वहीं, यूक्रेन युद्ध को लेकर इस महीने की शुरुआत में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद किए गए कथित युद्ध अपराधों की जांच शुरू कर दी है। लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या पुतिन के खिलाफ युद्ध अपराधों के तहत मुकदमा चलाना संभव है और अगर क्या अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट के पास इतनी ताकत है, कि वो पुतिन को सजा दे पाए?

पुतिन के खिलाफ चलेगा मुकदमा?
यूक्रेन युद्ध शुरू करने के लिए पश्चिमी देशों ने सामूहिक रूप से रूस की निंदा की है, और रूस को सबक सिखाने के इरादे से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने मॉस्को को प्रतिबंधों की जाल में बुरी तरह से जकड़ने की कोशिश की है, लेकिन रूस बिना डरे हुए लगातार यूक्रेन पर हमला करना जारी रखे हुआ है और यूक्रेन युद्ध में अभी तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और एक अभूतपूर्व शरणार्थी संकट बन गया है। अभी तक यूक्रेन से कम से कम 20 लाख से ज्यादा लोग यूक्रेन छोड़कर पड़ोसी देशों में जा चुके हैं।

रूस को युद्ध अपराधी ठहराने की मांग
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडोमिर ज़ेलेंस्की ने एबीसी न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि, "वो सभी लोग जो हमारी जमीन पर आए, वे सभी लोग जिन्होंने वे(हमले) आदेश दिए, वो सभी सैनिक जो शूटिंग कर रहे हैं, वो सभी युद्ध अपराधी हैं।" अमेरिका ने भी कई मौकों पर इस बात पर जोर दिया है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के दौरान युद्ध अपराध किए गए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है, कि आरोपों की बढ़ती सूची के बावजूद, इस तरह की स्थिति में पूरी तरह से दोषी ठहराना असंभव साबित हो सकता है। अगर आईसीसी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखा जाए, तो इसमें कई साल लग सकते हैं। पिछले दो दशकों में ICC ने सिर्फ 10 व्यक्तियों को ही दोषी ठहराया है।

क्या होता है युद्ध अपराध?
40 सदस्य देशों के अनुरोधों के बाद ICC के मुख्य अभियोजक करीम खान ने 2 मार्च को घोषणा की थी, कि वह यूक्रेन में संभावित युद्ध अपराधों की जांच शुरू करेंगे। ICC नरसंहार, युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रामकता के अपराध की स्पष्ट परिभाषा देता है। और आईएसीसी के इस परिभाषा को 'रोम संविधि' नाम के एक संधि में भी शामिल किया गया है, जो आईसीसी की नींव बनाती है। इसके निर्देशों के मुताबिक, नागरिक आबादी को निशाना करना, जिनेवा सम्मेलनों का उल्लंघन करना, और लोगों के विशिष्ट समूहों को निशाना बनाकर उन्हें मारना, इन सभी तरह के कृत्यों में शामिल लोग, युद्ध अपराध का मुकदमा चलाए जाने योग्य हैं। युद्ध अपराधों में हत्या, अंग-भंग, क्रूर व्यवहार, बंधक बनाना, बलात्कार और यौन दासता को भी आईसीसी के दिशानिर्देशों में शामिल किया गया है और ये तमाम काम युद्ध के नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत वैसे हथियारों के इस्तेमाल पर भी रोक है, जो अंधाधुंध पीड़ा का कारण बन सकते हैं, जैसे रासायनिक या जैविक हथियारों के इस्तेमाल पर पाबंदी है।

आईसीसी कैसे काम करता है?
अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय, यानि आईसीसी नीदरलैंड के हेग में स्थिति है और ये स्वतंत्र तौर पर संचालित होता है और चार प्राथमिक अपराधों के लिए व्यक्तियों पर मुकदमा चला सकता है। जिनमें युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध, नरसंहार और आक्रामकता का अपराध शामिल हैं। वहीं, दुनिया के करीब करीब हर देश, कुल मिलाकर दुनिया के 123 देश, आईसी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जिन्होंने 'रोम संविधि' पर हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन कुछ उल्लेखनीय अपवाद भी हैं। जैसे अमेरिका, रूस और यूक्रेन सहित लगभग 31 देशों ने संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, लेकिन इसमें शामिल नहीं हुए हैं। जबकि, साल 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे पर ICC के 2016 में आए फैसले के बाद जब रूस ने कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था, तब रूस इससे बाहर हो गया था।

लोगों पर चलता है मुकदमा, देश पर नहीं
सबसे बड़ी बात ये है, कि आईसीसी में व्यक्तियों पर मुकदमा चलता है, ना कि व्यक्तियों के ऊपर। आईसीसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसी भी व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जा सकता है और ICC आमतौर पर शीर्ष अधिकारियों और नेताओं पर मुकदमा चलाने की कोशिश करता है, जिनके ऊपर युद्ध शुरू करने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी होती है। यूक्रेन में युद्ध के मामले में, जांचकर्ता पिछले और वर्तमान दोनों आरोपों पर गौर करेंगे। इसमें उन युद्ध अपराधों को शामिल करने की संभावना है जो पुतिन ने यूक्रेन से क्रीमिया के रूस के कब्जे के दौरान आदेश दिए थे।

पुतिन के खिलाफ जारी हो सकता है वारंट
यदि आईसीसी में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो फिर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है, लेकिन दिक्कत ये है, कि बिना पुतिन की उपस्थिति के उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है और चूंकी अब रूस आईसीसी का सदस्य ही नहीं है, तो फिर पुतिन के अदालत में शामिल होने की संभावना ही नहीं है। यानि, या तो व्लादिमीर पुतिन को रूस की सेना गिरफ्तार कर उसे आईसीसी के हवाले कर दे, या फिर रूस के बाहर जाने के बाद, उस देश की सरकार पुतिन को गिरफ्तार कर आईसीसी को सौंपना होगा। इसके साथ ही, या तो किसी देश की सरकार या फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद मामलों की जांत करने के लिए आईसीसी को निर्देश दे सकती है। चूंकि रूस यूएनएससी का स्थायी सदस्य है, इसलिए उसके पास वीटो पावर है, लिहाजा अगर संयुक्त राष्ट्र से रूसी राष्ट्रपति के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया जाता है, तो फिर रूस अपना वीटो इस्तेमाल कर उसे यूएनएससी के आदेश को रोक सकता है।

रूस की किन कार्रवाइयों को युद्ध अपराध कहा जाएगा?
यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने रूसी लड़ाकू विमानों पर देश भर में नागरिक ठिकानों पर अंधाधुंध गोलियां चलाने का आरोप लगाया है। अमेरिका ने ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमले को भी "युद्ध अपराध" कहा है। इस महीने की शुरुआत में नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा था कि, रूस यूक्रेन में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के जोखिम के कारण क्लस्टर बमों के उपयोग की लंबे समय से निंदा की है। इसके साथ ही, रूस पर मारियुपोल में एक प्रसूति अस्पताल पर हमला करने का भी आरोप लगाया गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने घटना के बाद ट्वीट किया, "लोग, बच्चे मलबे के नीचे हैं।'' और जेलेंस्की ने इसे भी 'युद्ध अपराध' कहा है। लेकिन, इसकी संभावना काफी कम है, कि पुतिन के खिलाफ 'युद्ध अपराधों' के तहत मुकदमा चलाया जाए और फिर उन्हें कोई सजा दे पाए।












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