यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को कैद करेंगे या मार देंगे पुतिन? कीव पर कब्जा करने के बाद क्या करेगा रूस?

गुरुवार को एक वीडियो बयान जारी करते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आशंका जताई थी, कि रूस के निशाने पर वो और उनका परिवार है।

कीव/मॉस्को, फरवरी 26: यूक्रेन पर रूस बुरी तरह से कहर बरपा रहा है और पूरी आशंका है अगले चंद घंटों में यूक्रेन का अस्तित्व ही खत्म होने के कगार पर पहुंच जाए। तमाम रिपोर्ट्स यही हैं, कि चंद घंटों में राजधानी कीव पर रूस का कब्जा स्थापित हो जाएगा और राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने देश से भागने के मना कर दिया है। उन्हें अमेरिका ने देश से निकलने को कहा था और उन्हें कीव से निकालने के लिए प्लेन भेजने की बात कही थी, लेकिन राष्ट्रपति जेलेंस्की ने साफ कहा, कि उन्हें सवारी नहीं, रूस से लड़ने के लिए हथियार चाहिए। यानि, राष्ट्रपति अपने देश को छोड़कर नहीं जाएंगे, तो रूसी सैनिकों के हाथों उनका पकड़ा जाना करीब करीब तय है, तो फिर रूस उनके साथ क्या करेगा? क्या रूस, यूक्रेन के राष्ट्रपति को खत्म कर देगा, जिसकी आशंका वो खुद जता चुके हैं।

राष्ट्रपति के साथ क्या करेगा रूस?

राष्ट्रपति के साथ क्या करेगा रूस?

गुरुवार को एक वीडियो बयान जारी करते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने आशंका जताई थी, कि रूस के निशाने पर वो और उनका परिवार है। उन्होंने कहा था, कि ''हमारी जानकारी के अनुसार दुश्मन ने मुझे टारगेट नंबर 1 के रूप में और मेरे परिवार को टारगेट नंबर 2 के रूप में चिह्नित किया है।" उन्होंने कहा था, कि "वे राज्य के मुखिया को नष्ट करके यूक्रेन को राजनीतिक रूप से नष्ट करना चाहते हैं। हमारे पास सूचना है कि दुश्मन के तोड़फोड़ करने वाले समूह कीव में घुस गए हैं।" यानि, यूक्रेनी राष्ट्रपति साफ कह चुके हैं, कि रूस की कोशिश उन्हें जान से मारने की है।

‘आप हमें आखिरी बार देख रहे’

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने शुक्रवार देर रात भी एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने रूस के सामने सरेंडर करने से इनकार करते हुए देश से बाहर भागने के अमेरिकी ऑफर को खारिज कर दिया। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यूरोपीय देश के नेताओं को संबोधित करते हुए साफ कहा, कि वो उन्हें शायद आखिरी बार देख रहे हैं और अब रूस इस रात कीव के ऊपर 'तूफान' बनकर बरसने वाले हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति के साथ उनके प्रधानमंत्री भी साथ थे और उन्होंने युद्धविराम करने की भी अपील करते हुए उन्होंने कहा कि, 'आज रात वो तूफान लाएंगे और हमें आज की रात को झेलना होगा'। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की का ठिकाना अभी भी गुप्त है, लेकिन कहा जा रहा है कि, वो लगातार राष्ट्रपति भवन में हैं और युद्ध ऑपरेशन को संभाल रहे हैं।

देश छोड़ने से किया इनकार

देश छोड़ने से किया इनकार

इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि, जेलेंस्की देश छोड़कर भाग गये हैं, जिसको झूठा बताते हुए जेलेंस्की कीव की सड़कों पर बाहर निकले और अपने प्रधानमंत्री और रक्षा अधिकारियों के साथ एक वीडियो जारी किया और उन्होंने कहा कि, ''ये देश हमारा है, यहां हमारे नागरिक हैं, हम सब यहां अपनी आजादी, अपने राज्य की रक्षा कर रहे हैं और यह आगे भी होगा। हमारे रक्षकों की जय, यूक्रेन की जय! " उन्होंने देश से भागने के बजाए आखिरी दम तक मुकाबला करने और अमेरिका के देश से बाहर निकलने के ऑफर के बजाए लड़ने के लिए और हथियार देने की मांग की है।

कीव पर कब्जा होगा तो क्या होगा?

कीव पर कब्जा होगा तो क्या होगा?

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की बार बार अपने इरादे पर अडिग रहने की बात कर रहे हैं और यहां तक कि गुरुवार को एक संबोधन के दौरान उन्होने ये भी कहा था, जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, कि "आप हमारे चेहरे देखेंगे, हमारी पीठ नहीं, बल्कि हमारे चेहरे।" लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर कीव रूसी सेना के हाथों आ गया तो राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को तो मार डाला जाएगा या उन्हें रूस का कैदी बना लिया जाएगा। अगर वह बच निकलते हैं, तो वह देश से बाहर जाकर रूस के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। अटलांटिक काउंसिल के यूरेशिया सेंटर के वरिष्ठ निदेशक और 2003 से यूक्रेन में पूर्व अमेरिकी राजदूत जॉन हर्बस्ट ने कहा कि, ज़ेलेंस्की पश्चिमी यूक्रेन से सरकार चला सकते हैं, यदि उसके पास उचित संचार स्थापित हो पाए। उन्होंने कहा कि, 'उस क्षेत्र से रूस के खिलाफ प्रतिरोध किया जा सकता है'। वहीं, पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में रूसी और पूर्वी यूरोपीय अध्ययन के प्रोफेसर मिशेल ओरेनस्टीन ने कहा कि, ज़ेलेंस्की के कीव से बाहर होने के बाद पुतिन राजधानी कीव में एक कठपुतली सरकार का निर्माण करेंगे।

दमनकारी सरकार का होगा निर्माण?

दमनकारी सरकार का होगा निर्माण?

द लैंड्स इन बिटवीन: रूस वर्सेस द वेस्ट एंड द न्यू पॉलिटिक्स ऑफ हाइब्रिड वॉर के लेखक ओरेनस्टीन का मानना है कि, राष्ट्रपति जेलेंस्की को हटाने और कीव पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कीव में एक दमनकारी सरकार की स्थापना करेंगे जो लुहांस्क पीपुल्स रिपब्लिक की तरह "क्रूर फैशन" में शासन करेगी। उन्होंने कहा कि, "रूस की कोशिश मॉस्को से यूक्रेन की सरकार को नियंत्रित करने की होही और इसके लिए वो यूक्रेन में प्रॉक्सी सरकार का गठन कर सकते हैं और ऐसे किसी यूक्रेनी 'देशभक्त' के हाथों में सत्ता सौंप सकते हैं, जो पुतिन का भरोसेमंद तो हो, लेकिन यूक्रेन के लोगों के लिए भी स्वीकार्य हो।

अगर निर्वासित सरकार बनती है...

अगर निर्वासित सरकार बनती है...

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान और सार्वजनिक नीति के प्रोफेसर पॉल डी'एनेरी का कहना है कि, यदि राष्ट्रपति जेलेंस्की किसी तरह कीव से निकल जाते हैं, तो संभवत: वो एक निर्वासित सरकार का निर्माण कर सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें किसी देश की सरकार को निर्वासन में काम करना पड़ा है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, नाजी जर्मनी और सोवियत संघ के आक्रमण के बाद पोलिश सरकार लंदन में रहती थी। बेलारूसी लोकतांत्रिक गणराज्य का राडा निर्वासित सरकार का एक और उदाहरण है। तिब्बत की सरकार भारत से चलत है, लेकिन निर्वासित सरकारों के साथ एक बड़ी दुविधा यह है कि क्या उन्हें उस देश के स्थान पर रखे गए प्रशासन पर वैध माना जाएगा जिसका वे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स ये भी मानते हैं कि, आज के जमाने में निर्वासित सरकारों का औचित्य कोई खास नहीं रह गया है। डी'एनेरी ने कहा कि, वास्तव में निर्वासित सरकार के हाथ में कुछ नहीं रहता है और उन्हें देश के किसी भी भी फैसले में शामिल नहीं किया जाता है।

निर्वासित सरकार...यूक्रेन की हार

निर्वासित सरकार...यूक्रेन की हार

वहीं, विशेषज्ञ हर्बस्त ने कहा कि, अगर राष्ट्रपति जेलेंस्की एक निर्वासित सरकार का नेतृत्व किसी दूसरे देश में बैठकर करते हैं, तो इसका मतलब भी यूक्रेन की हार ही है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं, कि युद्ध का अंत हो जाए। उन्होंने कहा कि, ''असल सवाल ये है कि, क्या रूसी आक्रमण के खिलाफ यूक्रेन का प्रतिरोध जारी रहेगा?'' उन्होंने कहा कि, ''अगले कई हफ्तों तक रूस की जीत होने वाली है और रूस को यूक्रेन में लाभ होगा, लेकिन असल सवाल ये भी है, कि क्या रूस के खिलाफ प्रितिरोध हमेशा के लिए खत्म हो पाएगा? हर्बस्ट ने कहा कि, अगर यूक्रेन के नागरिकों ने विरोध और प्रतिरोध का रास्ता चुन लिया, तो फिर पुतिन के लिए काफी मुश्किल होगा, क्योंकि भले ही वो जेलेंस्की की सरकार को गिरा दें, लेकिन फिर नई सरकार को आप जनता की नजरों में वैधता कैसे दिला पाएंगे? उन्होंने कहा कि, ''पुतिन के लिए वास्तविक समस्या यही है, कि अगर अब से चार महीने के बाद भी यूक्रेन के लोग विरोध करें, तो फिर पुतिन क्या करेंगे''।

यूक्रेन में आ पाएगी शांति?

यूक्रेन में आ पाएगी शांति?

विशेषज्ञों का कहना है कि, रूस ने आक्रमण करके यूक्रेन की शांति को खत्म कर दिया है और अब रूस जनता की अपेक्षाओं के खिलाफ जाकर किसी कठपुतली सरकार का ना तो निर्माण कर सकते हैं और ना ही यूक्रेन में शांति की स्थापना कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि, राष्ट्रपति ने जनता के हाथों में हथियार दे दिया है और वो इस लड़ाई को गांव तक पहुंचा चुके हैं। वहां के सांसदों ने हथियार उठा लिए हैं, जिससे गांव-गांव तक लड़ाई पहुंच गई है, ऐसे मे रूस के पास जेलेंस्की की सरकार को उखाड़ फेंकने से भी कुछ हासिल नहीं होने वाला है।

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