यूक्रेनी मंत्री ने भारत को धर्मसंकट में डाला, G20 में जेलेंस्की को न्योता देने की अपील, क्या करेंगे पीएम मोदी?

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने कूटनीति के रास्ते पर लौटने की वकालत की है, जबकि भारत ने इस दौरान रूस से भारी मात्रा में तेल भी खरीदा है। यूक्रेनी मंत्री ने भारत के साथ रिश्ते को फिर से शुरू करने की बात कही है।

Emine Dzhaparova india visit

Ukraine India G20 Summit: यूक्रेन ने भारत को बड़े धर्मसंकट में डाल दिया है, लिहाजा भारत में इस साल होने वाली जी20 की बैठक काफी दिलचस्प होने वाली है।

यूक्रेन ने उम्मीद जताई है, कि इस साल नई दिल्ली में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में भारत, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की को आमंत्रित करेगा। इसके साथ ही यूक्रेन ने इस बात की भी उम्मीद जताई है, कि भारत में होने वाले अन्य जी20 की बैठकों में भी यूक्रेनी अधिकारियों को भागीदारी की अनुमति दी जाएगी।

यूक्रेन की उप-विदेश मंत्री एमिने झापरोवा चार दिनों के लिए भारत दौरे पर थीं और इस दौरान उन्होंने ये बयान दिया है।

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यूक्रेन की उप विदेश मंत्री ने क्या कहा?

इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यूक्रेन की उप विदेश मंत्री ने कहा, कि "हमारी उम्मीदें काफी स्पष्ट हैं।" उन्होंने कहा, कि हमने अपने भारतीय वार्ताकारों को संदेश दिया है, कि "आइए हम जी20 में यूक्रेन के अधिकारियों की भागीदारी पर विचार करें।"

आपको बता दें, कि इस साल जी20 की अध्यक्षता भारत कर रहा है और पिछली बार जी20 की बैठक इंडोनेशिया के बाली में हुई थी, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हिस्सा नहीं लिया था।

वहीं, युद्ध शुरू होने के बाद भारत की चार दिवसीय यात्रा पर दिल्ली आने वाली एमिने झापरोवा पहली यूक्रेनी अधिकारी हैं। उन्होंने सोमवार को विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव संजय वर्मा के साथ औपचारिक प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जिसके बाद मंगलवार को विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी से भी उनकी मुलाकात हुई है।

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पीएम मोदी को सौंपा जेलेंस्की का संदेश

मिनाक्षी लेखी के साथ बैठक के दौरान यूक्रेन की उप-विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की तरफ से भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा एक पत्र सौंपा।

39 साल की पूर्व पत्रकार और अब मंत्रालय संभाल रहीं एमिने झापरोवा ने कहा, कि "यूक्रेन युद्ध के नतीजों पर चर्चा किए बिना दुनिया में अर्थव्यवस्था के बारे में चर्चा संभव नहीं है।"

उन्होंने कहा, कि इस साल सितंबर महीने में भारत में जी20 शिखर सम्मेलन होने वाली है और मुझे उम्मीद है, कि इसमें रूसी आक्रमण के प्रभाव के बारे में "मेरे राष्ट्रपति को भी बोलने में खुशी होगी।"

उन्होंने कहा, कि भारत को जी20 शिखर सम्मेलनों और बैठकों के "एजेंडे" में यूक्रेन को शामिल करने के लिए "नेतृत्व करना" करना चाहिए।

यूक्रेनी मंत्री ने यह भी उम्मीद जताई, कि भारतीय अधिकारी, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल जल्द ही कीव का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, कि एनएसए डोभाल कई बार रूस गए, लेकिन कभी यूक्रेन नहीं गए।

आपको बता दें, कि मास्को की अपनी अंतिम यात्रा के दौरान डोभाल ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की थी।

भारत दौरे पर पहुंची यूक्रेनी मंत्री ने ये भी सुझाव दिया, कि भारतीय एनएसए अजीत डोभाल "विशेष सुरक्षा तंत्र" स्थापित करने के लिए कीव का दौरा कर सकते हैं, क्योंकि यूक्रेन इसे "ऐसा करने का सही समय" मानता है।

यूक्रेनी मंत्री ने कहा, कि उनकी यात्रा का मकसद भारत के साथ संबंधों को "फिर से शुरू" करने के लिए थी, और' हम बहुत ईमानदारी से ऐसा कह रहे हैं, कि वास्तव में रूस के साथ होना इतिहास के गलत पक्ष में खड़ा होना है। रूस का समर्थन करने का मतलब है, कि दुनिया की बुरी दूरदर्शी तस्वीर में वो खड़ा है।'

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'भारत से संतुलित होने की अपील'

यूक्रेन की मंत्री ने कार्यक्रम में बोलते हुए भारत से "संतुलित" दृष्टिकोण का आह्वान किया और कहा, कि "मुझे लगता है कि मैं यहां जो सुझाव लेकर आई हूं, वह भारत के साथ बेहतर और गहरा संबंध करने की है। और इसे पारस्परिकता की जरूरत है। हमने दरवाजा खटखटाया, लेकिन यह घर के मालिक पर निर्भर करता है, कि वह दरवाजा खोले।"

आपको बता दें, कि यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का पक्ष हमेशा से साफ रहा है और भारत ने हमेशा से कूटनीति के जरिए इस समस्या को सुलझाने पर जोर दिया है।

वहीं, रूस दशकों से भारत का साझेदार रहा है और शीर्ष हथियार आपूर्तिकर्ता भी रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रूसी तेल के मुख्य खरीदारों में भी शामिल हो गया है। आधिकारिक तौर पर, भारत ने रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावों पर मतदान से भाग लेने से इनकार कर दिया है। जबकि नई दिल्ली ने नागरिकों के खिलाफ हिंसा की आलोचना की है, लेकिन भारत ने कभी भी किसी सार्वजनिक बयान में रूस को अपराधी के रूप में नामित नहीं किया है।

पिछले दिसंबर में, यूक्रेन के विदेश मंत्री ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को "नैतिक रूप से अनुचित" करार दिया था। हालांकि, यूक्रेन की उप विदेश मंत्री अपनी यात्रा के दौरान इस तरह की आलोचना से दूर रहीं।

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    वहीं, पाकिस्तान के साथ यूक्रेन के रक्षा संबंधों के बारे में एक सवाल पर, उन्होंने कहा, कि 'पाकिस्तान के साथ हमारे सैन्य संबंध इतिहास में थे, लेकिन पाकिस्तान के साथ यूक्रेन के संबंध भारत के खिलाफ लक्षित नहीं थे'।

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