चेर्नोबल न्यूक्लियर प्लांट को लेकर बड़ी चिंता, रूस के कब्जे के बाद नहीं मिल रही हैं जानकारियां
यूएन एजेंसी ने कहा है कि, चेर्नोबिल पॉवर प्लांट पर रूसी कब्जे के बाद से अभी तक उसको लेकर कोई डेटा नहीं मिल रहा है।
कीव, मार्च 09: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यूनाइटेड नेशंस न्यूक्लियर वाचडॉग ने मंगलवार को कहा है कि, चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र से अब जानकारियां नहीं मिल रही हैं और परमाणु संयंत्र से डेटा भी नहीं मिल रहे हैं। एजेंसी ने परमाणु संयंत्र में रूसी गार्ड के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के लिए चिंता व्यक्त की है। आपको बता दें कि, चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट यूरोप का सबसे बड़ा न्यूक्लियर प्लांट है, जिसपर सबसे पहले रूस ने कब्जा किया था। (सभी तस्वीर- फाइल)

चेर्नोबल न्यूक्लियर प्लांट पर रूसी कब्जा
24 फरवरी को रूसी सेना ने यूक्रेन पर हमला किया था और निष्क्रिय संयंत्र को जब्त कर लिया था। हालांकि संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा प्रहरी ने पहले कहा था कि, भारी गोलाबारी के बाद रूसी सेना ने परमाणु संयंत्र पर कब्जा कर लिया था, लेकिन कब्जा करने के बाद रूस की तरफ से कोई विकिरण रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। इस हमले ने पूरे यूरोप में उन लोगों के डर को पुनर्जीवित कर दिया है, जो 1986 की चेर्नोबिल आपदा को याद करते हैं, जिसमें कई लोग मारे गए थे और भारी परमाणु रेडिएशन फैला था। एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने "संकेत दिया कि चोरनोबिल एनपीपी में स्थापित सुरक्षा उपायों की निगरानी प्रणाली से रिमोट डेटा ट्रांसमिशन खो गया था"। एजेंसी ने कहा है कि, "एजेंसी यूक्रेन में अन्य स्थानों में सुरक्षा उपायों की निगरानी प्रणाली की स्थिति देख रही है और जल्द ही आगे की जानकारी प्रदान करेगी।"

चेर्नोबिल का कितना रणनीतिक महत्व
अमेरिकी सेना के एक पूर्व प्रमुख जैक कीन ने कहा था कि, चेर्नोबिल का "कोई सैन्य महत्व नहीं है" लेकिन ये बेलारूस और कीव के रास्ते में सबसे छोटे मार्ग पर स्थिति है। जो यूक्रेनी सरकार को हटाने के लिए एक रूस की रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। वहीं यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि, चेर्नोबिल को कब्जे में लेना रूस की योजना का हिस्सा था और उन्होंने प्लानिंग के तहत इस पर नियंत्रण हासिल किया था।

1986 में हुआ था भयानक हादसा
यूक्रेन की राजधानी कीव के उत्तर में 108 किमी (67 मील) की दूरी पर स्थित चेर्नोबिल नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र में 1986 में एक बड़ा हादसा हुआ था जब इसके चौथे रिएक्टर में एक असफल सुरक्षा परीक्षण के दौरान विस्फोट हो गया था। इसका विकिरण (रेडिएशन) के बाद पूर्वी यूरोप और सुदूर स्थित संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी हिस्से तक पहुंचे था। 6- रेडियोधर्मी स्ट्रोटियम, सीजियम और प्लूटोनियम ने यूक्रेन, बेलारूस और रूस समेत यूरोप के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया। चेर्नोबिल हादसे इतना तेज था कि 32 कर्मचारी तुरंत मर गए थे जबकि सैकड़ों बुरी तरह झुलस गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक हादसे में हजार से कुछ कम लोगों की मौत हुई थी जबकि इसेक विकिरण से 93,000 हजार लोग कैंसर का शिकार हुए थे।












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