विश्वयुद्ध करवाने के मूड में अमेरिका? आग में घी डालने बाइडेन जाएंगे पोलैंड! शांति सेना भेजने की मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति यूक्रेन युद्ध के बीच पोलैंड की यात्रा पर जा रहे हैं, वहीं, अब यूक्रेन में यूनाइटेड नेशंस की ‘शांति सेना’ भेजने की बात की जा रही है और अगर ऐसा किया जाता है, तो ये विश्वयुद्ध को न्योता देना होगा।
कीव/वॉशिंगटन/मॉस्को, मार्च 22: यूक्रेन में अभी भी रूसी सेना कहर बरपा रही है, लेकिन अमेरिका जिस तरह से अभी भी यूक्रेन को भड़काने में लगा हुआ है, उसे देखकर यही लग रहा है, कि क्या अमेरिका विश्वयुद्ध करवाने के मूड में है। पहले कमला हैरिस ने यूक्रेन के पड़ोसी देश और नाटो सदस्य पोलैंड का दौरा किया था और अब खुद राष्ट्रपति जो बाइडेन पोलैंड के दौरे पर जाने वाले हैं। इस दौरान वो यूक्रेनी शरणार्थियों को देश में शरण देने के लिए पोलैंड के राष्ट्रपति को धन्यवाद देंगे, लेकिन सवाल ये हैं, कि आखिर अब जाकर, जब युद्ध खत्म होने की तरफ बढ़ रही है, तो फिर बाइडेन ने यूक्रेन में 'शांति सेना' भेजने का फैसला क्यों किया है?

पोलैंड जाएंगे जो बाइडेन
राष्ट्रपति जो बाइडेन इस सप्ताह यूरोप में अपनी यात्रा के हिस्से के रूप में यूक्रेन के शरणार्थियों को आश्रय देने के देश के प्रयासों के लिए पोलैंड के राष्ट्रपति को धन्यवाद देंगे। यूक्रेन संकट में पोलैंड एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। जहां यूक्रेन संकट के बीच हजारों अमेरिकी सैनिक अभी भी मौजूद हैं, और यूक्रेन युद्ध के दौरान अभी तक करीब 20 लाख से ज्यादा शरणार्थी भागकर पोलैंड जा चुके हैं। व्हाइट हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक, बाइडेन शनिवार को होने वाले राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए वारसॉ जाएंगे। बाइडेन इस बात पर चर्चा करेंगे कि यू.एस., अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ, मानवीय और मानवाधिकार संकट का जवाब कैसे दे रहा है, जो कि यूक्रेन पर रूस के अनुचित और अकारण युद्ध ने पैदा किया है। यह भी संभव है कि राष्ट्रपति किसी शरणार्थी शिविर का दौरा करेंगे।

रूस को भड़काने की कोशिश?
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने सोमवार को कहा कि पोलैंड "एक महत्वपूर्ण भागीदार है क्योंकि हम आने वाले हफ्तों और महीनों में 'एकीकृत' रहने के लिए काम कर रहे हैं।" राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नाटो और यूरोपीय सहयोगियों के साथ तत्काल वार्ता के लिए इस सप्ताह ब्रसेल्स की अपनी महत्वपूर्ण यात्रा पर स्थगित कर दी है। व्हाइट हाउस ने कहा कि सोमवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूनाइटेड किंगडम के यूरोपीय नेताओं ने "यूक्रेन में रूस की क्रूर रणनीति, जिसमें नागरिकों पर हमले भी शामिल हैं, पर चर्चा करते हुए लगभग एक घंटे तक बात की।" उन्होंने संघर्ष विराम तक पहुंचने के यूक्रेन के प्रयास के समर्थन में हाल के राजनयिक प्रयासों की भी समीक्षा की। साकी ने कहा कि वह यूक्रेनी नेताओं के नियमित संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस भी यूक्रेन के अधिकारियों के संपर्क में है।

यूक्रेन में शांति सेना भेजने पर विचार
एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति यूक्रेन युद्ध के बीच पोलैंड की यात्रा पर जा रहे हैं, वहीं, अब यूक्रेन में यूनाइटेड नेशंस की 'शांति सेना' भेजने की बात की जा रही है और अगर ऐसा किया जाता है, तो ये विश्वयुद्ध को न्योता देना होगा। कनाडा के पूर्व राजनयिकों ने यूक्रेन में यूनाइटेड नेशंस की शांति सेना को भेजने की मांग की है और इसके लिए यूक्रेन में शांति मिशन के लिए चीन सहित संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्यों के बीच समर्थन जुटाने के लिए काम करना चाहिए। वेस्ट ब्लॉक के गेस्ट मेजबान डेविड अकिन के साथ एक साक्षात्कार में, संयुक्त राष्ट्र में कनाडा के पूर्व राजदूत, एलन रॉक ने कहा कि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को संबोधित करने में "निष्क्रिय" रही है।

नाटो पर भड़के राष्ट्रपति जेलेंस्की
एक तरफ बाइडेन पोलैंड के दौरे पर जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोमवार को फिर से दावा किया है कि, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) रूस से 'डर' रहा है, क्योंकि मॉस्को का उसके देश पर आक्रमण जारी है, जिसमें कमी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि, "नाटो को या तो अब कहना चाहिए कि वे हमें स्वीकार कर रहे हैं, या खुले तौर पर कहें कि वे हमें स्वीकार नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे रूस से डरते हैं, जो सच है"। जेलेंस्की का ये बयान साफ तौर पर दर्शाता है, कि उनका दिल अब अमेरिका और पश्चिमी देशों से टूट गया है। ऐसे में सवाल ये भी है, कि क्या नाटो के नाम पर यूक्रेन को 'भुलावे' में रखकर युद्ध थोप दिया गया है।
नाटो में शामिल नहीं होगा यूक्रेन- जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा है कि वह संघर्ष विराम, रूसी सैनिकों की वापसी और यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी के बदले में नाटो सदस्यता नहीं लेने के लिए यूक्रेन से प्रतिबद्धता पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। जेलेंस्की ने कहा कि, "यह सभी के लिए एक समझौता है। पश्चिम के लिए, जो नहीं जानता कि नाटो के संबंध में हमारे साथ क्या करना है। यूक्रेन के लिए, जो सुरक्षा गारंटी चाहता है, और रूस के लिए, जो आगे नाटो विस्तार नहीं चाहता है"। ज़ेलेंस्की ने कहा सोमवार देर रात यूक्रेनी टेलीविजन चैनलों के साथ एक साक्षात्कार में ये बातें कही हैं। यानि, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक तरह से सरेंडर करने का फैसला कर लिया है। ऐसे में सवाल ये है, कि क्या अमेरिका यूक्रेन को युद्ध में भड़काने की कोशिश कर रहा है और रूस जो आरोप लगाता है, कि युद्ध की वजह अमेरिका है, क्या उन आरोपों में सच्चाई है?












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