UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का UK ने किया समर्थन
भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होना चाहिए, और सुरक्षा परिषद में पांच की बजाए 6 सदस्य होने चाहिए, इसका समर्थन ओबामा प्रशासन के अलावा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भी किया था।
UNSC News: भारत पिछले कई सालों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता का मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक भारत कई देशों की विरोध की वजह से भारत की स्थाई सदस्यता को लेकर बात नहीं बनी है। लेकिन, अब एक बार फिर से भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता देने की तेजी से मांग उठी है और यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया है।

यूके ने किया भारत का समर्थन
यूनाइटेड नेशंस में यूनाइटेड किंगडम की स्थायी प्रतिनिधि बारबरा वुडवर्ड ने यूएन को संबोधित करते हुए कहा कि, "...यूके ने लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार का आह्वान किया है। हम भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील के लिए नई स्थायी सीटों के निर्माण के साथ-साथ स्थायी अफ्रीकी प्रतिनिधित्व का भी परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं..।" यूके का ये समर्थन भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन अमेरिका के साथ साथ फ्रांस और रूस भी करते हैं, लिहाजा वीटो पावर वाले पांच देशों में चार देश भारत का समर्थन करता है, लेकिन चीन भारत के रास्ते में सबसे बड़ा अड़ंगा है। वहीं, पाकिस्तान भी भारत की स्थायी समदस्यता का विरोध करता है। गुरुवार को भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने बिना नाम लिए भारत को स्थायी सदस्यता दिए जाने का विरोध किया था। वहीं, इसी साल अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया था।

ओबामा और ट्रंप का भी मिला था साथ
वहीं, इससे पहले भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होना चाहिए, और सुरक्षा परिषद में पांच की बजाए 6 सदस्य होने चाहिए, इसका समर्थन ओबामा प्रशासन के अलावा डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भी किया था। लेकिन, अमेरिका की तरफ से हमेशा शर्तों के साथ भारत को शामिल करने की मांग की गई है, जिसमें अमेरिका की तरफ से कहा जाता रहा है कि वो वीटो के विस्तार का समर्थन नहीं करेगा। पूर्व अमेरिकी सरकारों ने इसके पीछे पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, इटली और अर्जेंटीना द्वारा असहमत होने का हवाला दिया था। आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पॉवर का अधिकार सिर्फ अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस के पास है, और ये देश नहीं चाहते हैं कि भारत को भी ये अधिकार दिया जाए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के साथ ही भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक रहा है, लेकिन भारत को आज तक स्थायी सदस्यता से दूर रखा गया है और भारत ने हमेशा से मांग की है कि भारत को ना सिर्फ स्थायी सदस्य बनाया जाए, बल्कि भारत को वीटो पॉवर के इस्तेमाल का भी अधिकार मिले। भारत अब तक आठ बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य रहा है और ऐसा पहली बार हुआ है, जब अस्थाई सदस्यता के इस कार्यकाल में पहली बार पिछले साल भारत को अगस्त महीने में अध्यक्ष पद की कुर्सी दी गई थी, वहीं इस साल दिसंबर महीने में भी अध्यक्षता भारत के पास होगी। भारत का कहना है कि वो विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और जल्द ही विश्व में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा, लिहाजा भारत को यूएनएससी की स्थायी सदस्यता प्राप्त करने का बुनियादी कारण है।












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