MP News: जंगल में दौड़ने को तैयार मादा चीता, ‘टाइगर स्टेट’ से आगे बढ़कर वन्यजीव संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश वन्यजीव सुरक्षा में तेजी ला रहा है, बाघ अभयारण्यों का विस्तार कर रहा है, चीतों को फिर से ला रहा है, और संरक्षण को जैव विविधता, विरासत और ग्रामीण आजीविका से जोड़ रहा है। पहलों में नए अभयारण्य, शिकारी गलियारे, बचाव केंद्र, मानव-वन्यजीव संघर्ष विरोधी उपाय, और इको-टूरिज्म के लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण शामिल हैं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10 और 11 मई को श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को उनके बाड़े से खुले वन क्षेत्र में छोड़ेंगे। राज्य सरकार इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने पिछले डेढ़ वर्षों में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कई बड़े फैसले लिए हैं। सरकार ने संरक्षण को केवल पर्यावरण तक सीमित न रखकर इसे जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की रणनीति अपनाई है।
इसी दिशा में राज्य सरकार ने रातापानी को प्रदेश का नया टाइगर रिजर्व घोषित किया। वर्ष 2008 से लंबित यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में मंजूर हुआ। इसका नामकरण पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर किया गया है। राजधानी भोपाल के करीब स्थित होने के कारण इसे इको-टूरिज्म और संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मार्च 2025 में माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का नौवां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करना है। विशेषज्ञ इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम मान रहे हैं।
गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बनकर उभरा है। राज्य में 14 हजार से अधिक गिद्ध मौजूद हैं। भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुक्त किया गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक की उड़ान पूरी कर चुका है, जिसे संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
कूनो नेशनल पार्क अब केवल चीता परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे वैश्विक संरक्षण प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है। ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत यहां चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। सरकार गांधी सागर वाइल्डलाइफ सेंचुरी और नौरादेही वाइल्डलाइफ सेंचुरी को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है।
वन क्षेत्रों के विस्तार के तहत अप्रैल 2025 में सागर जिले में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित की गई। इसके अलावा ओंकारेश्वर और जहानगढ़ में नए वन्यजीव अभ्यारण्यों को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में वन्यजीव कॉरिडोर और जैव विविधता सुरक्षा नेटवर्क को मजबूती मिलेगी।
अगस्त 2025 में ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया। बैतूल जिले का यह इलाका टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राज्य सरकार ने घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण पर भी विशेष फोकस किया है। हाल ही में कूनो नदी में घड़ियाल और कछुए छोड़े गए, जबकि नर्मदा नदी में मगरमच्छों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों को बसाने की पहल को भी वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह खो चुकी जैव विविधता को दोबारा स्थापित करने का प्रयास है। मानव-हाथी संघर्ष कम करने के लिए राज्य सरकार ने 47 करोड़ रुपये से अधिक की योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग, सोलर फेंसिंग और राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स जैसी पहलें शुरू की गई हैं। साथ ही वन्यजीव हमलों में मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया है।
वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए मध्यप्रदेश में 5500 करोड़ रुपये से अधिक की मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर भी काम चल रहा है। यह परियोजना कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच टाइगर रिजर्व को जोड़ने का काम करेगी। एनएच-46 पर इटारसी-बैतूल सेक्शन में बनाए जा रहे अंडरपास और ओवरपास को वाइल्डलाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण माना जा रहा है।
इसके अलावा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और रातापानी टाइगर रिजर्व में सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत रोकने के लिए विशेष प्रयोग किए जा रहे हैं। रातापानी में 12 किलोमीटर लंबा साउंडप्रूफ कॉरिडोर और कई अंडरपास बनाए गए हैं, जबकि कुछ हाईवे पर ‘टेबल टॉप मार्किंग’ के जरिए वाहनों की गति नियंत्रित करने की व्यवस्था की गई है। वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिला है। चीता परियोजना और टाइगर रिजर्व विस्तार के चलते स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि हुई है। राज्य सरकार का दावा है कि मध्यप्रदेश अब केवल "टाइगर स्टेट" नहीं, बल्कि देश के समग्र वन्यजीव संरक्षण मॉडल के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है।












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