UAE के OPEC छोड़ने से पाक को नुकसान- भारत को फायदा कैसे? 59 साल बाद क्यों हुआ GCC से अलग
UAE OPEC Exit: UAE ने हाल के दिनों में अपने एक फैसले पाकिस्तान और सऊदी अरब को करारा झटका दिया है। जिससे पेट्रोल-डीजल की किल्लत से जूझ रहा पाकिस्तान और ज्यादा गहरी खाई में जा सकता है। इसके साथ ही UAE के इस फैसले भारत को भी फायदा हो सकता है। दरअसल UAE ने खुद को OPEC (Organisation of Petroleum Exporting Countries) से बाहर कर लिया है। आइए जानते हैं इसे डिटेल में।
भारत के लिए कैसे फायदेमंद?
UAE के OPEC से अलग होने के बाद माना जा रहा है कि वह तेल उत्पादन बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है तो ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट आ सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इससे भारत का आयात बिल कम हो सकता है और घरेलू महंगाई पर भी कंट्रोल पाने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पॉजिटिव साइन मान रहे हैं।

पाकिस्तान के लिए कैसे बढ़ेगी परेशानी?
जहां भारत को सस्ती ऊर्जा और मजबूत रिश्तों का फायदा मिल सकता है, वहीं पाकिस्तान के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव और रणनीतिक अस्थिरता ला सकती है। UAE का झुकाव भारत की तरफ बढ़ना पाकिस्तान के लिए चिंता की बात माना जा रहा है। इससे उसकी खाड़ी देशों में पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
UAE को क्या मिलेगा फायदा?
OPEC से बाहर होने के बाद UAE अब अपनी पूरी क्षमता से तेल उत्पादन कर सकेगा। इससे उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा आर्थिक फायदा मिलने की उम्मीद है। UAE के ऊर्जा मंत्री सुहेल मोहम्मद अल माजुरी ने इसे देश की लॉन्ग टर्म एनर्जी सट्रेटजी से जुड़ा फैसला बताया। लेकिन सबसे ज्यादा माजुरी की वो बात चर्चा में रही है जिसमें उन्होंने UAE के अपने हितों को प्राथमिकता देने वाला फैसला बताया।
UAE को क्यों लेना पड़ा ये फैसला?
UAE के इस बदलाव के पीछे हालिया इजरायल-अमेरिका बनाम ईरान की जंग को भी अहम वजह माना जा रहा है। ईरान के साथ तनाव के दौरान UAE को सीधे हमलों का सामना करना पड़ा था, लेकिन उसे खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों से वैसा समर्थन नहीं मिला, जैसी उम्मीद थी। इससे अबू धाबी की रणनीतिक सोच बदली। लिहाजा उसने OPEC को नमस्कार करने का मन बना लिया। अबू धाबी रक्षा मंत्रालयों की मानें तो, 8 अप्रैल तक UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने 537 बैलिस्टिक मिसाइलें, 26 क्रूज मिसाइलें और 2256 ड्रोन सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किए थे। इससे साफ है कि UAE सीधे खतरे में था।
पाकिस्तान से नाराज क्यों हुआ UAE?
UAE की नाराजगी पाकिस्तान की कथित तटस्थ भूमिका से जुड़ी बताई जा रही है। UAE चाहता था कि पाकिस्तान ईरान के खिलाफ साफ और निर्णायक रुख ले। लेकिन पाकिस्तान ने मध्यस्थता का रास्ता चुना, जिससे अबू धाबी नाराज हो गया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि UAE इस मामले को सिर्फ दो पक्षों, ब्लैक और व्हाइट के नजरिए से देख रहा था। मतलब हां या न के तराजू पर तौल रहा है।
पाकिस्तान पर पड़ा आर्थिक असर
इस नाराजगी का असर पाकिस्तान पर तुरंत दिखा। UAE ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज तय समय से पहले मांग लिया है। यह रकम उस समय पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा थी। बाद में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का लोन दिया और 5 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन देने का वादा किया।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता भी बना वजह?
सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बड़ा रक्षा समझौता हुआ। इसके तहत जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान रियाद की सुरक्षा के लिए अपने न्यूक्लियर और मिसाइल संसाधनों का इस्तेमाल कर सकता है। ईरान के हालिया हमलों के बाद पाकिस्तान ने इस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई लेकिन UAE के साथ ऐसी कोई डील नहीं है।
खाड़ी देशों में बन रहा नया 'गल्फ ऑर्डर'
अब खाड़ी देशों में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। एक तरफ UAE भारत के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच नए रणनीतिक गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है। इसके अलावा UAE और सऊदी दोनों देशों के बीच तेल उत्पादन नीति पर भी लंबे समय से असहमति है। दशकों से OPEC का नेतृत्व सऊदी अरब करता रहा है, लेकिन UAE अब अपने उत्पादन पर किसी तरह की सीमा नहीं चाहता। लिहाजा UAE ने 59 साल बाद GCC से अलग होने का फैसला लिया।
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