रेगिस्तान में सैलाबः UAE में 27 साल बाद हुई ऐसी मूसलाधार बारिश, सऊदी भी बाढ़ से परेशान
आबू धाबी, 29 जुलाईः वैज्ञानिक न जाने कितने ही वर्षों से चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु संकट चरम मौसमी आपात स्थितियों को काफी बढ़ा देगा। साल दर साल इसका असर भी अब देखने को मिल रहा है। वैसे इलाके जो प्रचुर मात्रा में बारिश होने के लिए जाने जाते थे आज सूखे से जूझ रहे हैं वहीं ऐसे इलाके जो रेगिस्तानी हैं जहां बेहद लंबे वक्त तक बारिश होने की कोई उम्मीद नहीं की जाती थी वे अब भीषण बाढ़ से जूझ रहे हैं।

भयंकर बारिश से जूझ रहा रेगिस्तानी देश
दुनिया में सूखे रेगिस्तानों के लिए जाना जाने वाला अरब देश इन दिनों मूसलाधार बारिश से जूझ रहे हैं। यूएई और कतर के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। गुरुवार को कतर और संयुक्त अरब अमीरात में भारी बारिश हुई और सड़कें पानी से लबालब भर गईं जिस वजह से कई लोगों को होटलों में शरण लेनी पड़ी। घरों में फंसे लोगों को सकुशल बाहर निकालने का प्रयत्न किया जा रहा है।

पुलिस ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में न जाने की अपील की
कुल मिलाकर भारी बारिश से सार्वजनिक संपत्तियों का काफी नुकसान हुआ है। बारिश के चलते यूएई के पूर्वी हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई जिसने घरों को क्षतिग्रस्त किया और कई गाड़ियां इसमें बह गईं। शारजाह पुलिस ने स्थानीय लोगों से देश के पूर्वी इलाकों में न जाने की अपील की है। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे फोटो वीडियो में पूरे दिन की बारिश के बाद हाईवे पर गाड़ियां पानी में तैरती नजर आ रही हैं। एक वीडियो में बचावकर्मी बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाते देखे जा सकते हैं।

बारिश ने तोड़ा 27 सालों का रिकॉर्ड
अल अरबिया इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक यूएई का आपदा प्रबंधन प्राधिकरण 20 से अधिक होटलों के साथ संपर्क में है जिसमें बाढ़ से विस्थापित हुए 1,885 से अधिक लोग रह सकते हैं। यूएई के मौसम विभाग का कहना है कि देश में बारिश ने 27 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। वहीं कतर की राजधानी दोहा की सड़कें भारी बारिश के बाद पानी में डूबी हुई हैं। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को हुई बारिश के चलते विश्व कप आयोजन स्थल के पास सड़कें और गाड़ियां जलमग्न हो गईं।

पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
अरब देशों में जुलाई के महीने में बारिश सामान्य घटना नहीं है। यह सीजन पर बेहद गर्म और सूखे वाला होता है। जलवायु परिवर्तन का यह घातक उदाहरण सिर्फ अरब देशों में ही नहीं पूरी दुनिया में देखा जा रहा है। चीन इन दिनों भारी बारिश और झुलसा देने वाले तापमान से एकसाथ जूझ रहा है। यूरोपीय देशों में ने भी हाल ही में भयंकर गर्मी को झेला है।

ब्रिटेन में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड
कुछ दिनों पहले ठंडा देश माना जाने वाला ब्रिटेन इतिहास के सबसे गर्म दिनों से गुजर चुका है जब यहां का तापमान 40 डिग्री को पार कर गया था। भारत में मरूस्थलीय राज्य यानी राजस्थान के कई जिले इन दिनों भारी बारिश का सामना कर रहे हैं जिससे कई शहरों में बाढ़ की स्थिति बन चुकी है और कई जगहों पर अलर्ट जारी किया गया है।












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