थ्रेड्स और ट्विटर की जंग में कूदा तालिबान: हक्कानी ने कहा- एलन मस्क के प्लेटफॉर्म में हैं 2 खास बातें
ट्विटर को टक्कर देने के लिए हाल में ही मार्क जुकरबर्ग ने थ्रेड्स लांच किया है। हालांकि एलन मस्क ने इसे ट्विटर की कॉपी करार दिया है और इसे लेकर कानूनी धमकी दे रहे हैं।
इससे इतर पूरी दुनिया में ये बहस तारी है कि ट्विटर और थ्रेड्स में कौन सा ऐप बेहतर है या क्या कभी थ्रेड्स, ट्विटर को पीछे छोड़ सकता है? अब इस बहस में तालिबान भी कूद गया है।

थ्रेड्स और ट्विटर में कौन बेहतर है के सवाल में अब तालिबान ने भी अपनी राय रखी है।
तालिबान प्रमुख अनस हक्कानी ने ट्विटर की तारीफ करते हुए कहा कि कोई भी दूसार प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म की जगह नहीं ले सकता है। हक्कानी ने ट्विटर की दिलखोल कर प्रशंसा करते हुए कहा कि कोई भी सोशल मीडिया ऐप इसके जैसा नहीं है।
हक्कानी ने ट्विटर पर पोस्ट कर लिखा,'अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की तुलना में ट्विटर के दो महत्वपूर्ण फायदे हैं। पहला-'फ्रीडम ऑफ स्पीच' और दूसरा ट्विटर की प्रकृति और विश्वसनीयता।'
हक्कानी ने कहा कि ट्विटर के पास मेटा जैसी असहिष्णु नीति नहीं है। कोई भी अन्य प्लेटफ़ॉर्म इसकी जगह नहीं ले सकता। हक्कानी ने कहा कि ट्विटर की खुले संवाद की अनुमति देने की प्रतिबद्धता और इसकी कथित विश्वसनीयता इसे इसके प्रतिद्वंद्वियों विशेषकर मेटा (फेसबुक) से अलग करती है।
कौन है अनस हक्कानी?
अनस हक्कानी, प्रसिद्ध मुजाहिदीन सेनानी जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा और तालिबान के गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी का भाई है। अनस हक्कानी आंदोलन के सबसे युवा राजनीतिक नेताओं में से एक है।
अनस के ट्विटर पर साढ़े पांच लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। इसके साथ वह अक्सर क्रिकेट और कविता से लेकर स्थानीय और वैश्विक राजनीति तक के विषयों पर अक्सर अंग्रेजी में अपनी राय देता है।
हालांकि ट्विटर की प्रशंसा करने पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने तालिबान को खूब खरी खोटी सुनाई। कई ट्विटर यूजर्स ने तालिबान अधिकारी पर नाराजगी जताते पूछा कि अफगानिस्तान में फ्रीडम ऑफ स्पीच क्यों नहीं है? लोगों ने कहा कि तालिबान सरकार ने अपने ही नागरिकों को समान अधिकार नहीं दिए हैं।
कुछ यूजर्स ने अनस हक्कानी को पाखंडी कहा। लोगों ने कहा कि अनस को फ्रीडम ऑफ स्पीच की प्रशंसा करने का कोई अधिकार नहीं है। निर्वासित लेखिका और कार्यकर्ता होमिरा कादरी ने लिखा, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में बात करना आपके लिए कितना शर्मनाक है।"
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक आम अफ़गानों की सोशल मीडिया गतिविधि पर तालिबान अधिकारियों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाती है। तालिबान सरकार की आलोचना करने वाले पोस्ट के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की गई है।
आपको बता दें कि अगस्त 2021 में सत्ता में वापस आने तक तालिबान की सोशल मीडिया पर कम उपस्थिति थी। लेकिन दोबारा सत्ता में वापसी के बाद से तालिबान ट्विटर का खूब उपयोग कर रहा है।
वहीं, मेटा के प्लेटफॉर्म जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अब थ्रेड्स आते हैं अभी भी सक्रिय रूप से तालिबान से जुड़े खातों को बंद कर रहा है। पिछले साल, फेसबुक ने राज्य के स्वामित्व वाली रेडियो टेलीविजन अफगानिस्तान और बख्तर समाचार एजेंसी के पेजों को बंद कर दिया था।
आपको बता दें कि फेसबुक और टिकटॉक दोनों तालिबान को एक आतंकवादी संगठन मानता है, इसलिए उन्होंने इस संगठन की पोस्टिंग पर बैन लगा रखा है। जबकि इसके उलट तालिबान से जुड़े कई मंत्रालय और प्रांतीय विभागों के ट्विटर पर आधिकारिक खाते हैं।
हालांकि किसी भी विभाग को अभी तक ब्लू टिक नहीं मिला है वहीं, एलन मस्क द्वारा ब्लू वैरिफिकेशन पॉलिसी शुरू किये जाने के बाद तालिबान के दो अधिकारियों द्वारा ब्लू टिक खरीदे जाने की खबर सामने आई थी।












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