तुर्की-सीरिया में भूकंप से विनाशकारी तबाही, मरने वालों की संख्या 24 हजार पार, शवों का सड़ना शुरू
तुर्की और सीरिया में मरने वालों की संख्या ने शुक्रवार को 24,000 की सीमा रेखा को पार कर गया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इससे पहले 1999 में भी तुर्की में आया भूकंप तबाही मचा चुका है।

Turkey-Syria Erthquake: तुर्की और सीरिया में सोमवार सुबह आए भूकंप ने विनाशकारी तबाही मचाई है और मलबों से शवों को बाहर निकालने का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, कि दोनों देशों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 24 हजार के आंकड़े को पार कर गई है। लिहाजा, अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है, कि भूकंप ने किस कदर कयामत सा कहर बरपाया है। वहीं, राहत और बचाव कार्य में लगे कार्यकर्ता लगातार मलबों के बीच से लोगों को जिंदा खोजने में जुटे हुए हैं, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों के जिंदा रहने की उम्मीद भी कम पड़ती जा रही है।

तुर्की में भूकंप से भीषण तबाही
तुर्की के आपदा और आपातकालीन प्रबंधन प्राधिकरण (एएफएडी) ने कहा है, कि तुर्की में मरने वालों की संख्या बढ़कर 20,665 हो गई है। प्राधिकरण ने कहा है, कि करीब 93 हजार भूकंप पीड़ितों को प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकाला गया है और राहत और बचाव कार्य में करीब 1 लाख 66 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को तैनात किया गया है। वहीं, सीरिया में 3,500 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है, कि भूकंप के बाद दोनों देशों में कम से कम 870,000 लोगों को तत्काल भोजन की आवश्यकता है, जबकि, सीरिया में बेघर हुए लोगों की तादाद 53 लाख है।

सड़ने लगे हैं मलबों में दबे शव
वहीं, अलजजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है, कि तुर्की में मलबों के नीचे दबे शवों से अब बदबू आने लगी है। यानि, अब शव सड़न लगे हैं। अलजजीरा के रिपोर्टर रेसुल सेरदार ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, कि बचाव दल जीवित बचे लोगों को खोजने के लिए लगातार काम कर रहे थे, लेकिन किसी को जीवित ढूंढना अब एक "चमत्कार" होगा। उन्होंने कहा, कि "हम चारों ओर लाशों की गंध महसूस कर सकते हैं।" उनकी रिपोर्ट में कहा गया है, कि "हमने कई शवों को बाहर निकलते देखा है और कई लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव कार्य में लगे लोग अब जानते हैं, कि उनके पास जीवित लोगों को बचाने का समय अब नहीं बचा है।"

दिल दहला देने वाली हैं तस्वीरें
सीएनएन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, कि भूकंप की वजह से आए इस आपदा का पैमाना बहुत बड़ा है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस (आईएफआरसी) में आपदाओं, जलवायु और संकट के डायरेक्टर कैरोलिन होल्ट ने कहा, कि "हमने प्रभावित क्षेत्र के आकार का थोड़ा मानचित्रण किया है और यह फ्रांस के आकार का है।" वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को कहा, कि "हमने अभी तक पूरी तरह से नुकसान और मानवीय संकट को अपनी आंखों के सामने प्रकट होते हुए नहीं देखा है।" जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक, करीब 23 मिलियन लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हो सकते हैं। उन्होंने कहा, कि एक बार रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो जाने के बाद पुनर्निमाण पर फिर से ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि तुर्की ने अतीत में भी भीषण भूकंप को झेला है और फिर से पुनर्निमाण किया है।
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तुर्की में खुद को दोहरा रहा इतिहास
तुर्की और सीरिया में मरने वालों की संख्या ने शुक्रवार को 24,000 की सीमा रेखा को पार कर गया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। मौत के आंकड़े में जैसे-जैसे इजीफा होता जाएगा, वैसे-वैसे क्रोध और आक्रोश की भावनाएं भी बढ़ती जाएंगी। तुर्की, भूकंपों के लिए कोई अजनबी नहीं है और कई लोग महसूस करते हैं, कि सरकार एक और विनाशकारी घटना की तैयारी करने में नाकाम रही है। लोगों के बीच पनप रही ये हताशा, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तईप अर्दोआन को डराती है, क्योंकि उन्होंने बुधवार और गुरुवार को घातक भूकंप के केंद्र के पास कहारनमारस क्षेत्र का सीटी-स्टॉप दौरा किया था, जहां उनके खिलाफ भारी नारेबाजी की गई है। हालांकि, अर्दोआन ने सरकार की गलतियों को स्वीकार करने के बजाए अपनी सरकार की प्रतिक्रिया का बचाव किया। उन्होंने कहा, कि इस प्रकार की आपदा के लिए तैयार रहना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी घोषणा की, कि सरकार का लक्ष्य "एक वर्ष में" पुनर्निर्माण करना है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है, कि इसमें काफी वक्त लगेगा।

1999 में भी भूकंप मचा चुका है कहर
तुर्की के लोग अभी तक 1999 में आए भीषण भूकंप को भी नहीं भूले हैं, जब मारमारा क्षेत्र में आए भूकंप ने भीषण तबाही मचाई थी। तुर्की के लिए वर्ल्ड बैंक के डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके अजय छिब्बर ने सीएनएन से बात करते हुए कहा, कि "यह एक बुरी फिल्म की तरह है, कि भूकंप फिर से वापस आ गया है।" उन्होंने कहा, कि यह लगभग 45 सेकंड तक चला, जिसमें 17,000 से ज्यादा लोग मारे गए और अनुमानित 500,000 लोग बेघर हो गए हैं। छिब्बर ने सीएनएन को बताया, कि उन्होंने "इससे पहले इतनी तबाही नहीं देखी थी।" उन्होंने उस समय जापानी और जर्मन राजदूतों के साथ यात्रा को याद करते हुए बताया, कि "यह हमें द्वितीय विश्व युद्ध की तरह लग रहा है।" 1999 को याद करते हुए छिब्बर ने कहा, कि उस वक्त भी भूकंप के बाद इमारतें चपटी हो गईं थीं और गोलकुक शहर में, जहां एक नौसैनिक अड्डा स्थित था, उस क्षेत्र में पानी के अंदर रखी पनडुब्बियां भूकंप के बाद पानी के बाहर आ गईं थीं। उन्होंने कहा, कि "आप पनडुब्बियों को बाहर देख सकते थे, जो अविश्वसनीय था।"












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