Trump U-Turn: अपने ही दावों से फिर पलटे ट्रंप, स्पीच में बदला जंग का टारगेट, 7 बातें जो कर रही कन्फ्यूज
Trump U-Turn: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच ट्रंप ने गुरुवार (भारतीय समयानुसार) सुबह 6.21 पर अपनी स्पीच दी। लोगों को उम्मीद थी की शायद ट्रंप युद्ध खत्म करने का ऐलान करेंगे। लेकिन बातों से पलटने का सबसे बड़े जिंदा पर्याय बने ट्रंप ने अपने स्वभाव को जिंदा रखा। इस स्पीच में ट्रंप ने कई दावे किए और साथ में पूर्व में दिए कई बयानों से पलटी भी मार ली। आइए जानते हैं कि किस-किस बयान से पलट गए ट्रंप।
'रिजीम चेंज नहीं था टारगेट', मारी पलटी
ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से पलटी मार दी है। पहले के बयानों में ट्रंप ने रिजीम चेंज की बात कही थी, लेकिन इस स्पीच में उन्होंने कहा कि उनका टारगेट "रिजीम चेंज" नहीं था, बल्कि मौजूदा नेतृत्व को हटाना था। जबकि वे जंग शुरू होने के पहले से ही रिजीम चेंज की बात करते हुए डेमोक्रेटिक स्ट्रक्चर को वहां पर लागू करने की बात करते रहे हैं।

लीडरशिप खत्म और फिर पलटे ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना इस युद्ध में बेहतर काम कर रही है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान की नेवी, एयरफोर्स और वहां की मौजूदा सरकार को लगभग खत्म कर दिया है। जबकि इसके पहले वाले बयान में ट्रंप ने कहा था कि बड़े नेता मारे गए हैं लेकिन नई लीडरशिप जो खड़ी हो रही है उसे भी खत्म करेंगे। ऐसे में सरकार कैसे खत्म हो गई है ईरान की, ट्रंप से पूछा जाना चाहिए।
IRGC पर पलट गए ट्रंप
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को अमेरिकी हमलों मेंबुरी तरह नुकसान पहुंचा है और उनके हथियारों का जखीरा तबाह कर दिया गया है। कमाल की बात है कि ट्रंप ने खुद कहा था कि ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोन्स का भंडार है और जब तक ये भंडार खाली नहीं होगा तब तक अमेरिकी हमले नहीं रुकेंगे।
होर्मूज पर लड़े या अमेरिका से तेल खरीदें- ट्रंप
ट्रंप NATO के साथ मिलकर होर्मुज को कंट्रोल करने और खार्ग आईलैंड पर फौज उतारने जैसी बातें करते रहे हैं। बीच-बीच में होर्मुज खुलवाएंगे, ऐसे भी दावे किए। लेकिन अब ट्रंप ने इन सब से पलटी मारते हुए एक नई बात कह दी है। ट्रंप ने कहा कि जिन देशों के जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर फंसे हैं वे या तो अमेरिका के साथ मिलकर लड़ें या फिर अमेरिका से तेल खरीदने के लिए तैयार रहें। ये बताता है कि ट्रंप किसी भी बात पर टिके नहीं रह सकते।
ईरान की न्यूक्लियर फेसिलिटी तबाह लेकिन नहीं
ट्रंप ने पिछले साल जब ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था तब भी और इस साल के हमलों में अभी तक कई बार ये दावा किया कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को उन्होंने पूरी तरह से तबाह कर दिया है। लेकिन आज की स्पीच में उन्होंने ऐसी बात कही जो उनके ही बयान पर उंगली उठाती है। अब ट्रंप कह रहे हैं कि अगर ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार आ गए तो यह मिडिल ईस्ट, दुनिया और अमेरिका सभी के लिए बेहद खतरनाक होगा। मतलब इतने हमलों के बावजूद ट्रंप ये मान रहे हैं कि न तो वे न्यूक्लियर फेसिलटी तक पहुंच बना पाए और न ही उसे तबाह कर सके।
डील की लगाई थी रट, अब बोले नहीं करेंगे
इतने दिनों से डोनाल्ड ट्रंप एक बात की रट लगाए हुए हैं कि ईरान के नेता उनसे डील करना चाहते हैं, बात चल रही है। पाकिस्तान ने भी इस डील में हाथ धोने की कोशिश की। यहां तक कि युद्ध शुरू होने के कुछ महीने पहले से बातचीत चल रही थी। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पर भी पलटी मार दी है। इस बार ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से कोई डील ही नहीं करेंगे। अगर डील नहीं करेंगे तो चाहते क्या हैं, ये ट्रंप से पूछा जाना चाहिए।
"ईरान अब खतरा नहीं रहा", तो फिर हमला क्यों?
ट्रंप ने जंग के पहले सप्ताह के बाद से ही ये दावा करना शुरु कर दिया था कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल प्रोग्राम को इस हद तक कमजोर कर दिया है कि अब वह भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरा नहीं रहा। गुरुवार की स्पीच में भी यही दावा किया। अब अगर ईरान वाकई में इतना कमजोर हो गया है फिर तो इजरायल और अमेरिका को हमले बंद कर देने चाहिए। लेकिन ट्रंप यहां भी राजी नहीं हैं।
बार-बार बदलते बयानों से हैरान दुनिया
ट्रंप के बार-बार बदलते बयानों से पूरी दुनिया में लोग परेशान हैं। कहीं गैस-तेल के दाम बढ़ रहे हैं तो कहीं पर मार्केट हिल रहा है। इसके अलावा जंग बीच मिडिल ईस्ट में स्थिरता और शांति की कोशिश करने वाले देशों को भी अपनी रणनीति बार-बार बदलना पड़ रही है। जंग का अंत क्या होगा कोई नहीं जानता, पर ट्रंप इस भाषण से भी पलट सकते हैं इसका अंदेशा सभी को है।
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