Trump Tariff On India: 'आप लोग बकवास..', भारत को लेकर क्यों आगबबूला हुए ट्रंप? व्हाइट हाउस में तीखी बहस
Trump Tariff On India: अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर हुए विवाद के पीछे की कहानी अब सामने आने लगी है। न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हेबरमैन और जोनाथन स्वान की नई किताब "Regime Change: Inside the Imperial Presidency of Donald Trump" में दावा किया गया है कि भारत के टैरिफ को लेकर डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के अंदर अपने ही अधिकारियों से नाराज हो गए थे। किताब के मुताबिक, ट्रंप को लगता था कि भारत अमेरिकी सामानों पर बहुत ज्यादा टैक्स लगा रहा है। उन्हें यह भी शक था कि उनके अधिकारी सही जानकारी छिपा रहे हैं और उन्हें वास्तविक आंकड़े नहीं बताए जा रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों पर भड़क गए थे ट्रंप
किताब में दावा किया गया है कि ट्रंप का मानना था कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर करीब 175 प्रतिशत तक टैरिफ वसूलता है। जब उस समय के अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने उन्हें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के आधिकारिक आंकड़े दिखाने की कोशिश की, तो ट्रंप नाराज हो गए। किताब के मुताबिक, ट्रंप ने कहा, "मुझे कोई सही आंकड़े नहीं दे रहा है। चीन और भारत हम पर कितना टैरिफ लगाते हैं, इसकी असली जानकारी कहां है? आप लोग सिर्फ बकवास आंकड़े दे रहे हैं।" लटनिक ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन ट्रंप ने उन आंकड़ों को भी खारिज कर दिया। यही वजह थी कि भारत के खिलाफ उनका रुख लगातार सख्त होता गया।

भारत को बताया गया था 'टैरिफ का महाराजा'
टैरिफ को लेकर केवल ट्रंप ही नाराज नहीं थे। उस समय के अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट भी भारत की कर नीतियों के आलोचक थे। उन्होंने एक बार भारत को "टैरिफ का महाराजा" तक कह दिया था। व्हाइट हाउस के कई दस्तावेजों में भी यह देखने को मिला कि भारत के Import Duty को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर असंतोष बढ़ रहा था।
यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ा व्यापारिक तनाव
व्हाइट हाउस के अंदर हुई इसी बहस का असर बाद में व्यापारिक फैसलों पर भी दिखा। अमेरिका ने 'लिबरेशन डे' शुल्क कार्रवाई के तहत भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। इसके कुछ महीनों बाद अगस्त 2025 में ट्रंप ने भारत पर एक और बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत रूस से लगातार कच्चा तेल खरीद रहा है और इससे यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को आर्थिक मदद मिल रही है। इसी आरोप के आधार पर भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत का एक और एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया गया। इसके बाद भारतीय उत्पादों पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
भारत, चीन और ब्राजील की कैटेगरी में पहुंचा
50 प्रतिशत टैरिफ लगने के बाद भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल हो गया, जिन पर अमेरिका सबसे ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी लगा रहा था। इस सूची में चीन और ब्राजील जैसे देश भी शामिल थे। इस फैसले से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया और कई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडलों के दौरे भी रद्द होने लगे।
नए व्यापार समझौते से खुला समाधान का रास्ता
लंबे समय तक चले तनाव के बाद दोनों देशों ने बातचीत का रास्ता चुना। 2 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका ने एक नए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ढांचे का ऐलान किया। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ। वहीं भारत ने भी अमेरिकी कृषि उत्पादों, सोयाबीन तेल, फलों, वाइन और स्पिरिट्स पर लगने वाले टैरिफ को धीरे-धीरे कम करने का फैसला किया।
रूस से तेल खरीद पर बनी अहम शर्त
इस समझौते का सबसे अहम हिस्सा रूस से तेल खरीद को लेकर था। किताब में ये भी लिखा कि, अमेरिका ने अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क हटाने पर सहमति जताई, जबकि भारत ने यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस से कच्चे तेल के आयात को बंद करने पर सहमति दी। हालांकि इस समझौते को अभी पूरी तरह लागू किया जाना बाकी है, लेकिन दोनों देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच इस मुद्दे पर सकारात्मक बातचीत भी हुई।
क्या खत्म हो जाएगा टैरिफ विवाद?
एक समय भारत-अमेरिका संबंधों में सबसे बड़ा विवाद बना टैरिफ मुद्दा अब सुलझता हुआ दिखाई दे रहा है। अगर समझौते को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।
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