'मां-बाप और बिछड़े बच्चों को मिलवाए ट्रंप सरकार'
अमरीका में अवैध प्रवासियों से उनके बच्चों को अलग किए जाने के मामले में हर दिन कोई न कोई नई ख़बर आ रही है. अब एक अमरीकी जज ने माता-पिता से अलग हुए बच्चों को 30 दिन के भीतर उनसे मिलाए जाने का आदेश दिया है.
डोनल्ड ट्रंप शुरुआत से ही अवैध प्रवासियों को लेकर कड़ा रवैया अपनाते आए हैं और उनकी 'ज़ीरो टॉलरेन्स पॉलिसी' भी इसका हिस्सा है.
इस विवादित नीति के तहत पहले बिना ज़रूरी काग़जातों के अमरीकी सीमा में घुसने वालों पर आपराधिक मामला दर्ज करके उन्हें जेल में डाल दिया जाता था. ऐसी स्थिति में उनके बच्चों को उनसे अलग 'डिटेन्शन सेंटर' में रखा जाता था.
इस नीति की चौतरफ़ा आलोचना के बाद उन्होंने इसमें बड़े बदलाव किए थे. अब परिवारों और बच्चों को एकसाथ हिरासत में रखा जाता है. हालांकि उनके आदेश में ये साफ़ नहीं था कि जो बच्चे पहले से माता-पिता से अलग हैं, उनका क्या होगा.
जज ने क्या कहा
अब कैलिफ़ोनिर्या में सैन डियागो के एक फ़ेडरल जज ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा है कि सरकार पांच साल से कम उम्र के बच्चों को 15 दिनों के भीतर और पांच से ज़्यादा उम्र के बच्चों को 30 दिनों के भीतर उनके माता-पिता से मिलवाए.
फ़ैसला देते हुए जज डैना साब्रा ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वो ख़ुद की फ़ैलाई अफ़रातफ़री को काबू नहीं कर पा रही है. जज ने ये फ़ैसला अमरीकी सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनाया.
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एसीएलयू ने यह याचिका उस मां की ओर से दायर की थी जो पिछले साल अमरीका में आने के बाद अपनी छह साल की बेटी से अलग हो गई थी.
एसीएलयू ने अपनी याचिका में उन कई अभिभावकों की आपबीती दर्ज की थी जो सीमा पर अपने बच्चों से बिछड़ने के बाद अब तक उनसे मिल नहीं पाए हैं.
बच्चों की तस्वीरों से बढ़ा था विवाद
ट्रंप प्रशासन के प्रवासी क़ानून पर विवाद उस वक़्त और बढ़ गया था जब ज़ंजीर लगे दरवाज़ों के पीछे प्रवासियों के बच्चों की कुछ तस्वीरें मीडिया में आईं. इन तस्वीरों को देखकर बच्चों के लिए बने इन केंद्रों की तुलना नाज़ी यातना शिविरों से की जाने लगी.
अमरीकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ 5 मई से 9 जून के बीच 2,342 प्रवासी बच्चे उनके माता-पिता से अलग हो चुके हैं. इसके बाद ट्रंप प्रशासन को अपने फ़ैसले में तब्दीली करनी पड़ी.
इसके साथ ही डोनल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि अब प्रवासी परिवार एकसाथ रह सकेंगे.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप की पत्नी मेलानिया और बेटी इवांका ने भी उन पर नियमों में बदलाव का दबाव डाला था. इसके बाद मेलानिया टेक्सस के एक 'चाइल्ड डिटेंशन सेंटर' में माता-पिता से बिछुड़े बच्चों से मिलने पहुंची थीं.
पहले क्या थीं ट्रंप की दलीलें?
इससे पहले डोनल्ड ट्रंप ने अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए 'ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी' का बचाव किया था.
उन्होंने ये भी कहा था कि यूरोपीय देशों ने लाखों प्रवासियों को अपने यहां जगह देकर बड़ी ग़लती की है. इतना ही नहीं ट्रंप ने प्रवासियों को 'संक्रमण' बताते हुए कहा था कि वो नहीं चाहते कि अमरीका की सीमा में लाखों लोग घुस आएं.
अवैध प्रवासियों के मामले में अमरीकी राष्ट्रपति का रुख़ हर पल बदलता नज़र आया था.
प्रवासी परिवारों को एकसाथ रखने के आदेश पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने अवैध प्रवासियों के हाथों मारे गए लोगों के परिजनों को व्हाइट हाउस बुलाया और कहा कि उनके प्रियजनों की मौत बेकार नहीं जाएगी.
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